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लिङ्गाष्टकम् (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) - देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं Shiv Bhajan - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव का लिङ्गाष्टकम्: भक्ति का अनुपम गीत

इस लिङ्गाष्टकम् का पाठ करने से भक्ति में अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है।

लिङ्गाष्टकम् (Lingashtakam Lyrics in Sanskrit) - ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥८॥लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

लिङ्गाष्टकम् एक प्रसिद्ध भक्ति स्तोत्र है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसमें शिवलिंग की आराधना का वर्णन है। पहले श्लोक में, 'ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं' के माध्यम से यह बताया गया है कि शिवलिंग का पूजन केवल मानव द्वारा नहीं, बल्कि सभी देवताओं और ऋषियों द्वारा किया जाता है। 'जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं' से यह समझा सकता है कि भगवान शिव किसी भी प्रकार के जन्म के दुःख को समाप्त करने वाले हैं। आयाम में, यह ध्यान देने योग्य है कि सर्वत्र प्रभावी शाश्वतता का प्रतीक शिवलिंग है, जो न केवल भौतिक क्षेत्र में, बल्कि आध्यात्मिक स्तर पर भी अत्यधिक आवश्यक है।

प्रत्येक श्लोक में भगवान शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है, जैसे 'देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं', जिसका तात्पर्य है कि जो शिवलिंग ब्रह्मा और विष्णु जैसे प्रमुख देवताओं से भी पूजित है। 'कामदहं' उनकी करुणा और मंगलकारी शक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों की इच्छाओं को पूरा करता है। इस भक्ति गीत में शिव की करुणा, शक्ति और दिव्यता को दर्शाया गया है, जिससे भावनात्मक स्तर पर भक्त शिव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

लिङ्गाष्टकम् भगवान शिव के भक्ति मार्ग को दर्शाता है। यह समर्पण और भक्तिभाव की महत्ता को उजागर करता है। यहां विशेष रूप से 'सदाशिवलिङ्गम्' का उल्लेख किय गया है, जो निरंतरता और शाश्वतता का प्रतीक है। भक्त इस स्तोत्र का पाठ करते समय मनोबल वर्धित होता है, और उन्हें यह आभास होता है कि भगवान शिव उनके हर दुख-दर्द को दूर करते हैं। यह स्तोत्र हर प्रकार के दुखों का समाधान करने के लिए एक प्रभावी साधना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

लिङ्गाष्टकम् का महत्त्व इंडिया की प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में अत्यधिक है। यह शिव पुराण से जुड़ा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा और आराधना का प्रचार किया गया है। मान्यता है कि यह स्तोत्र उन भक्तों के लिए जीवन में आशा और शक्ति का संचार करता है, जो चिंताओं और असुरक्षा से गुजर रहे हैं। महाभारत और पुराणों के अनुसार, भगवान शिव को सभी देवताओं के गुरु के रूप में स्वीकार किया गया है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। लिङ्गाष्टकम् का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और सफलता का अनुभव किया जा सकता है। इस स्तोत्र से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और भक्तों के अंतर्संवाद में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

लिङ्गाष्टकम् का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या संध्या के समय किया जा सकता है। इस समय पूजा स्थान को स्वच्छ करना, दीपक जलाना, तथा फूलों और चंदन का भोग लगाना उचित है। भक्त को ध्यान में एकाग्रता और समर्पण के भाव से बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लिङ्गाष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?

लिङ्गाष्टकम् का पाठ सुबह सूर्योदय या संध्या के समय करना चाहिए, जब मन शांति और एकाग्रता के लिए सर्वोत्तम होता है।

क्या लिङ्गाष्टकम् का पाठ केवल शिव भक्तों के लिए है?

हालांकि यह शिव भक्तों के लिए विशेष रूप से है, परंतु जो भी भगवान शिव की कृपा और शांति की इच्छा रखते हैं, वे इसे पढ़ सकते हैं।

इस स्तोत्र का महत्व क्या है?

यह स्तोत्र अनेक धार्मिक ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इससे भक्तों को संजीवनी, मानसिक शांति, और शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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