Radha Kriya Kataksh Stotram

बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotram Lyrics in Hindi) - by आचार्य अभिराम शास्त्री - Bhaktilok

223 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

बटुक भैरव की कृपा से सभी संकटों का समाधान

इस स्तोत्र का पाठ कर भक्त संकटों से मुक्त होते हैं और भैरव की कृपा प्राप्त करते हैं।

बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotram Lyrics in Hindi) -।। भैरव ध्यान ।।वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम् कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥दीप्ताकारं विशद-वदनं सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं शूल–दण्डौ दधानम्॥।। भैरव मानस पूजन ।।ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुधारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।।। मूल स्तोत्र ।।ॐ भैरवो भूत-नाथश्च भूतात्मा भूत-भावनः।क्षेत्रज्ञः क्षेत्र-पालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥श्मशान-वासी मांसाशी खर्पराशी स्मरान्त-कृत्।रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धि-सेवितः॥कंकालः कालः-शमनः कला-काष्ठा-तनुः कविः।त्रि-नेत्रो बहु-नेत्रश्च तथा पिंगल-लोचनः॥शूल-पाणिः खड्ग-पाणिः कंकाली धूम्र-लोचनः।अभीरुर्भैरवी-नाथो भूतपो योगिनी – पतिः॥धनदोऽधन-हारी च धन-वान् प्रतिभागवान्।नागहारो नागकेशो व्योमकेशः कपाल-भृत्॥कालः कपालमाली च कमनीयः कलानिधिः।त्रि-नेत्रो ज्वलन्नेत्रस्त्रि-शिखी च त्रि-लोक-भृत्॥त्रिवृत्त-तनयो डिम्भः शान्तः शान्त-जन-प्रिय।बटुको बटु-वेषश्च खट्वांग -वर – धारकः॥भूताध्यक्षः पशुपतिर्भिक्षुकः परिचारकः।धूर्तो दिगम्बरः शौरिर्हरिणः पाण्डु – लोचनः॥प्रशान्तः शान्तिदः शुद्धः शंकर-प्रिय-बान्धवः।अष्ट -मूर्तिर्निधीशश्च ज्ञान- चक्षुस्तपो-मयः॥अष्टाधारः षडाधारः सर्प-युक्तः शिखी-सखः।भूधरो भूधराधीशो भूपतिर्भूधरात्मजः॥कपाल-धारी मुण्डी च नाग- यज्ञोपवीत-वान्।जृम्भणो मोहनः स्तम्भी मारणः क्षोभणस्तथा॥शुद्द – नीलाञ्जन – प्रख्य – देहः मुण्ड -विभूषणः।बलि-भुग्बलि-भुङ्- नाथो बालोबाल – पराक्रम॥सर्वापत् – तारणो दुर्गो दुष्ट- भूत- निषेवितः।कामीकला-निधिःकान्तः कामिनी वश-कृद्वशी॥जगद्-रक्षा-करोऽनन्तो माया – मन्त्रौषधी -मयः।सर्व-सिद्धि-प्रदो वैद्यः प्रभ – विष्णुरितीव हि॥।।फल-श्रुति।।अष्टोत्तर-शतं नाम्नां भैरवस्य महात्मनः।मया ते कथितं देवि रहस्य सर्व-कामदम् ।।य इदं पठते स्तोत्रं नामाष्ट-शतमुत्तमम्।न तस्य दुरितं किञ्चिन्न च भूत-भयं तथा ।।न शत्रुभ्यो भयं किञ्चित् प्राप्नुयान्मानवः क्वचिद्।पातकेभ्यो भयं नैव पठेत् स्तोत्रमतः सुधीः ।।मारी-भये राज-भये तथा चौराग्निजे भये।औत्पातिके भये चैव तथा दुःस्वप्नजे भये ।।बन्धने च महाघोरे पाठेत् स्तोत्रमनन्य-धीः।सर्वं प्रशममायाति भयं भैरव-कीर्तनात्।।।।क्षमा-प्रार्थना।।आवाहनङ न जानामि न जानामि विसर्जनम्।पूजा-कर्म न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं भक्ति-हीनं सुरेश्वर।मया यत्-पूजितं देव परिपूर्णं तदस्तु मे।।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

बटुक भैरव स्तोत्र में भगवान भैरव की उपासना की गई है, जो महासंहारक और सर्वशक्तिमान माने जाते हैं। पहले श्लोक में भैरव के अलौकिक रूप का वर्णन है, जहां उन्हें स्फटिक के समान बालक के रूप में दर्शाया गया है। उनका चेहरा आभामय और त्रिनेत्र है, जो जागरूकता और सर्वज्ञता का प्रतीक है। इस स्तोत्र के माध्यम से भैरव की महिमा का गुणगान किया गया है और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए भक्ति पूर्वक प्रार्थना की गई है। आगे चलकर, भक्त उनकी पूजा में पृथ्वी, आकाश, वायु, अग्नि, और जल जैसे तत्वों से समर्पण करते हैं, जो उनके साथियों के रूप में भैरव की महिमा को दर्शाते हैं।

भैरव को एक अद्वितीय रूप में प्रस्तुत किया गया है जो न केवल भूतों के नाथ हैं, बल्कि मानव जीवन की सभी कठिनाइयों के समाधानकर्ता भी हैं। मध्य के श्लोक में 'भूतात्मा भूत-भावनः' कहते हुए भैरव के सर्वव्यापक स्वरूप को व्यक्त किया गया है। इसमें उनकी शक्तियों का उल्लेख है जैसे शूल, खड्ग और त्रिनेत्र के साथ, जो शांति के साथ साथ शासन और संरक्षण का संकेत देते हैं। अंत में, भैरव के ध्यान से सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। यह भावार्थ दर्शाता है कि भैरव की उपासना न केवल संकटों से सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि इंसान की आत्मा का परमोत्कर्ष भी करती है।

इस स्तोत्र का उपदेश भक्ति मार्ग के महत्त्व को दर्शाता है, जहां भक्ति के माध्यम से भगवती कृपा को प्राप्त किया जाता है। भैरव की छवि और उनके गुण भक्तों को आस्था, अनुशासन और निष्ठा की ओर प्रेरित करते हैं। इस प्रकार, भैरव की स्तुति के द्वारा भक्त अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। वे जीवन के कष्टों से संक्रांति के पथ पर अग्रसर होते हैं, और भैरव की उपासना से मुक्ति के मार्ग पर बढ़ते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

बटुक भैरव स्तोत्र का उल्लेख विभिन्न पुराणों में मिलता है, विशेषकर 'श्री मद्भागवत' और 'कालिका पुराण' में, जहां भैरव को समस्त भूतात्माओं का स्वामी माना गया है। ये न केवल बाधाओं को दूर करते हैं, बल्कि भक्तों को शक्ति, धन, और यश प्रदान करते हैं। भगवान भैरव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति को पाया जा सकता है, तथा मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। बटुक भैरव स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है। यह श्रद्धालुओं को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा, मानसिक मंथन और पोखराक्स उत्साह की प्राप्ति में मदद करता है। नियमित उपासना से भैरव की कृपा का अनुभव और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ सुबह के समय करना अत्यंत लाभकारी होता है। इसे एक शांत स्थान पर बैठकर, दीया जलाकर, और विभिन्न सामग्रियों (जैसे फूल, धूप) की समर्पण के साथ पढ़ा जाना चाहिए। ध्यान केंद्रित करते हुए भक्त को मन में भैरव का ध्यान करते हुए विश्वास और भक्ति के साथ इस स्तोत्र का उच्चारण करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बटुक भैरव का महत्व क्या है?

बटुक भैरव, भैरव का एक प्रमुख स्वरूप हैं जो सभी भूतों और बाधाओं के नाशक माने जाते हैं। उनकी उपासना से भक्त को संकटों से मुक्ति मिलती है।

क्या बटुक भैरव स्तोत्र का नियमित पाठ करना आवश्यक है?

हाँ, नियमित पाठ करने से मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। यह भक्त को भैरव की कृपा प्राप्त करने का सुअवसर प्रदान करता है।

मैं इस स्तोत्र का पाठ कब कर सकता हूँ?

इस स्तोत्र का पाठ सुबह के समय करने की सलाह दी जाती है। यह समय भैरव की कृपा को आकर्षित करने के लिए सर्वोत्तम है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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