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आसान सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में लिरिक्स (Aasan sahit chale aana gajanan Lyrics in Hindi) - Sheela Kalson Ganesh Bhajan

शीला कलसन का प्रसिद्ध गणेश भजन 'आसान सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में' के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित भक्तिमय भजन लिरिक्स।

प्रस्तावना एवं परिचय

गणपति की कृपा से संपूर्णता का मार्ग

गजानन के चरणों में समर्पित यह भजन आस्था और भक्ति का अनुपम उदाहरण है।

 आसान सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में लिरिक्स (Aasan sahit chale aana gajanan Lyrics in Hindi) - आसान सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंविष्णु को बुलाएंगे तो लक्ष्मी रूठ जाएगीलक्ष्मी रूठ जाएंगी तो फिर नहीं आएंगीलक्ष्मी सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंलक्ष्मी सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥भोले को बुलाएंगे तो गौरा रूठ जाएगीगौरा रूठ जाएंगी तो फिर नहीं आएंगीगौरा सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंगौरा सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥राम को बुलाएंगे तो सीता रूठ जाएगीसीता रूठ जाएगी तो फिर नहीं आएंगीसीता सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंसीता सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥कान्हा को बुलाएंगे तो राधा रूठ जाएगीराधा रूठ जाएंगी तो फिर नहीं आएंगीराधा सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंराधा सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥मैया को बुलाएंगे तो लांगुर रूठ जाएंगेमैया को बुलाएंगे तो भैरव रूठ जाएंगेभैरव रूठ जाएंगे तो फिर नहीं आएंगेभैरव सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥सतगुरु को बुलाएंगे तो संगत रूठ जाएंगीसंगत रूठ जाएगी तो फिर नहीं आएंगीसंगत रूठ जाएगी तो फिर नहीं आएंगीसंगत सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा मेंअरे आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में॥गणपति राखो मेरी लाज गणपति राखो मेरी लाजपूरण करियो मेरे काज पूरण करियो सबके काजगणपति राखो मेरी लाजगजानन राखो मेरी लाज...
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य सार गणेश जी को अपने निवास पर आमंत्रित करना है। 'आसान सहित चले आना गजानन' की पंक्ति में यह संदेश निहित है कि जब गणेश जी हमारे जीवन में आते हैं, तो जीवन में सुख और शांति का संचार होता है। आगे भजन में विभिन्न देवताओं का उल्लेख किया गया है, जैसे विष्णु और लक्ष्मी, भोलेनाथ और गौरा, राम और सीता, और कान्हा और राधा। इन पंक्तियों के माध्यम से यह भी कहा गया है कि यदि हम प्रतिभागियों की अनुपस्थिति पर ध्यान दें, जैसे लक्ष्मी या सीता का रूठ जाना, तो हमें यह समझना चाहिए कि प्रत्येक देवता के साथ अन्य देवताओं का संबंध भी जुड़ा हुआ है। इस भजन के माध्यम से भक्त गणेश जी से सच्चे मन से आने की प्रार्थना कर रहे हैं, जो सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।

इस भजन में गहरी भावना है कि गणेश जी केवल एक देवता नहीं, बल्कि सभी सुखों का आधार हैं। जब हम कहते हैं, 'गणपति राखो मेरी लाज', तो यह एक भावुक प्रार्थना है। भक्त गणेश जी से यह विनती करते हैं कि वे उनकी सुरक्षा करें और जीवन की कठिनाइयों में सहायता करें। यहां पर यह भी महसूस किया जा सकता है कि यदि किसी भी देवता में कोई विसंगति होती है, तो वह पूरे ब्रह्मांड में संतुलन को प्रभावित करती है। भजन में गजानन के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए भक्त हर स्थिति में उनकी कृपा को अनुभव करना चाहते हैं। गणेश जी की पूजा का उद्देश्य न केवल भक्ति है, बल्कि जीवन को सुगम बनाना भी है।

इस भजन की भक्ति मार्ग पर गहनता से ध्यान देने पर यह स्पष्ट होता है कि गजानन के प्रति आस्था न केवल व्यक्तिगत है बल्कि सामूहिक भी है। 'सतगुरु को बुलाएंगे तो संगत रूठ जाएगी' की पंक्ति इस ओर इशारा करती है कि गुरु और संगत का संबंध बहुत गहरा होता है। जब भी हम ईश्वर की उपासना करते हैं, तो यह आवश्यक है कि हम समाज को भी साथ लेकर चलें। इस भजन में समर्पण का भाव ऐसा है जो शुद्ध भक्ति की ओर अग्रसर करता है। गजानन एक मार्गदर्शक हैं जो भक्तों को सही दिशा में ले जाने का काम करते हैं। उनके प्रति यह समर्पण इच्छित फल की प्राप्ति कराता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान गणेश भारतीय संस्कृति में सर्वप्रथम पूजनीय देवता हैं। पौराणिक कथाओं में गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में स्थापित किया गया है। उनका आह्वान हमेशा से किसी भी शुभ कार्य से पहले किया जाता है। इस भजन का संदर्भ विभिन्न पुस्तकें, जैसे कि गणेश पुराण, में मिलता है, जिसमें गणेश जी के स्तुति और आभार का स्वरूप बताया गया है। हमारे कृत्यों में जब गणेश जी का नाम लिया जाता है, तो उनकी कृपा प्राप्त होती है और समस्त विघ्नों का निवारण होता है। गणेश जी की पूजा से व्यक्ति को मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश जी का यह भजन सुनने या गाने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। भक्तों को यह समझने का अवसर मिलता है कि उन्हें जीवन में कैसे आगे बढ़ना है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से व्यक्ति की आस्था दृढ़ होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। यह भजन मानसिक तनाव को कम करता है और एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना अच्छा होता है। पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान चुनें, जहां आप ध्यानपूर्वक बैठ सकें। दीया जलाएं और अपने सामने गणेश जी की एक प्रतिमा रखें। संकल्प लें कि इस भजन के माध्यम से आप अपनी समस्याओं का समाधान खोजेंगे। मन को शांत रखें और अकेले में भजन का जप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में कौन-कौन से देवताओं का उल्लेख किया गया है?

इस भजन में भगवान गणेश के साथ-साथ लक्ष्मी, गौरा, राम, सीता, कान्हा, राधा आदि का उल्लेख किया गया है। प्रत्येक देवता के संबंध में यह बताया गया है कि उनके आने से हमारे जीवन में किस तरह के परिवर्तन आ सकते हैं।

गणेश जी का आह्वान क्यों आवश्यक है?

गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है। उनका आह्वान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह भजन खासतौर पर गणेश जी की कृपा के लिए एक भावुक प्रार्थना के रूप में कार्य करता है।

क्या इस भजन का पाठ करना कोई विशेष लाभ प्रदान करता है?

जी हां, इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक उत्पीड़न कम होता है, आत्म विश्वास बढ़ता है, और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह भजन आस्था और विश्वास को मजबूती प्रदान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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