Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ (Thali bharkar layi re khichdo upar ghi ki baatki Lyrics in Hindi) - Seema Mishra Krishna Bhajan

श्याम धणी को समर्पित भक्ति भजन, जो प्रेम और श्रद्धा का संचार करता है। जीवन में सकारात्मकता लाने का अद्भुत साधन।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम बाबा की भक्ति में समर्पण

इस भजन के माध्यम से श्याम धणी का आशीर्वाद प्राप्त करें और भक्ति भाव से अपने अराध्य को अर्पित करें।

थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ उपर घी की बाटकीजीमो म्हारो श्याम धणी जिमावै बेटी जाट कीथाली भरकर ल्याइै रै.....|| बाबो म्हारो गांव गयो है ना जाने कद आवैलोऊके भरोसे बैठयो रहयो तो भूखो ही रह जावैलोआज जिमाऊं तैने रे खीचड़ो काल राबड़ी छाछ कीथाली भरकर ल्याइै रै.....|| बार-बार मंदिर न जुड़ती बार-बार में खोलतीकर्इया कोइनी जीमे रे मोहन करडी बोलतीतू जीमे तो जद मैं जिमूं मानू ना कोर्इ लाट कीजीमो म्हारो श्याम धणी जिमावै बेटी जाटी कीथाली भरकर ल्याइै रै.....|| परदो भूल गर्इ सांवरियो परदो फेर लगायो जीसा परदो की ओट बैठ के श्याम खीचड़ौ खायो जीभोला-भाला भगता सूं सांवरिया कइंया आंट कीथाली भरकर ल्याइै रै.....|| भकित हो तो करमा जैसी सावरियों घर आवेलोभकित भाव से पूर्ण होकर हर्ष गुण गावेलोसांचो प्रेम प्रभु से होतो मूरत बोले काठ कीथाली भरकर ल्याइै रै.....||
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में श्याम धणी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का गहरा भाव है। "थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ" पंक्ति से स्पष्ट होता है कि भक्त अपने इष्ट देवता के लिए अर्पित नैवेद्य की तैयारी करता है। यहां 'खीचड़ौ' और 'घी' का उल्लेख खाद्य पदार्थों के माध्यम से श्रद्धा प्रकट करने का एक तरीका है। भक्त ने इस भजन में यह संकेत दिया है कि केवल भौतिक भोग नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम भी उतना ही आवश्यक है। जब भक्त अपने इष्ट को प्रेम से भोजन अर्पित करता है, तब उस प्रेम का बल और बढ़ जाता है। इसकी प्राथमिकता इस बात में है कि भक्त अपने इष्ट का भरपूर स्वागत करता है, जिससे उनके प्रिय श्री श्याम की कृपा प्राप्त की जा सके।

भजन के भावार्थ से यह पता चलता है कि भक्त नैवेद्य अर्पित करने के वक्त अपने मन में किसी वस्तु की कमी न महसूस करें। वह विश्वास दिलाने का प्रयास कर रहा है कि जब श्याम कृपा में हैं, तब भौतिक आवश्यकताएं अपने आप पूरी हो जाती हैं। "बाबो म्हारो गांव गयो है" से भक्त यह दर्शा रहा है कि यदि इष्ट देवता (श्याम) की कृपा न हो, तो वह निर्बल है। इस भाव में भक्त की पीड़ा भी साफ झलकती है और वह अपने इष्ट से पुनः संपर्क करने का प्रयास करता है। इस प्रकार, भजन में शायरी और भक्ति के स्वरूप का एक अद्भुत साक्षात्कार है।

भक्ति मार्ग की एक गहरी साधना को इस भजन के माध्यम से व्यक्त किया गया है। श्याम धणी की उपासना में यह स्पष्ट है कि भक्त को प्रेम और भक्ति भाव से भरे पूर्ण मन से सेवा करनी चाहिए। भक्त की मन की गहराई को 'सांचो प्रेम प्रभु से होतो' में दर्शाया गया है, जो सिद्ध करता है कि वास्तविक भक्ति का सार केवल तभी प्रकट होता है जब वह सच्चे मन से की जाए। इस नीति के माध्यम से भक्त ने भगवान के प्रति श्रद्धा और प्रेम का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसे भक्ति की उच्चतम स्थिति माना जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय आत्मा और सांस्कृतिक धरोहर में गहराई से बसा हुआ है। भक्ति को एक आत्मिक साधना के रूप में देखा जाता है, जो विभिन्न शास्त्रों में वर्णित है। विशेष रूप से भगवत गीता में भक्ति का महत्व प्रतिपादित किया गया है। इसके माध्यम से भक्त भगवान के प्रति अपनी निस्वार्थ भावनाएँ व्यक्त करता है। ये भावनाएँ केवल पौराणिक कथाओं में ही नहीं, बल्कि उपनिषदों और पुराणों में भी स्पष्ट रूप से वर्णित हैं। भक्ति और सेवा को जीवन की महानता का आधार माना जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित श्रवण और जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक बल, और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भक्त को अपने इष्ट के करीब लाता है और आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाता है। साथ ही, यह भावनात्मक दुख-दर्द को कम करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या में करना उचित है। भक्त को एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर एक दीया जलाना चाहिए और प्रसाद के रूप में फल या मिठाई अर्पित करनी चाहिए। सदैव ध्यान रखें कि मन में इष्ट की छवि के साथ-साथ प्रेम और श्रद्धा का भाव हो। ध्यान पूर्वक भजन का जाप करते समय मन में भक्ति का संचार होना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्तों में श्याम धणी के प्रति भक्ति और श्रद्धा की भावना जागृत करना है। इससे भक्ति के माध्यम से शिष्य को इष्ट के आशीर्वाद प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है।

क्या इस भजन को रोज़ गाना चाहिए?

हां, यह भजन रोज़ाना गाने से आत्मिक शांति, मानसिक शक्ति और इष्ट की कृपा का अनुभव किया जा सकता है। लगातार भजन करने से एक गहरी भक्ति का विकास होता है।

क्या भजन का कोई विशेष समय है गाने का?

इस भजन को सुबह या संध्या के समय गाना वर्धमान होता है। इस समय दीया जलाकर और मन में भक्ति के भाव के साथ भजन गाना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!