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श्री गणेश अष्टकम लिरिक्स (shree ganesh ashtkam Lyrics in Hindi) - Ganesh Ashtakam S.P. BALASUBRAHMANYAM - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश अष्टकश्लोकी: विघ्न हरने का दिव्य स्तोत्र

भगवान गणेश की महिमा गाने वाली यह भक्ति एकाग्रता एवं सुख-समृद्धि का संचार करती है।

 श्री गणेश अष्टकम लिरिक्स (shree ganesh ashtkam Lyrics in Hindi) - शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते इति निशा गौरी उठी सयन से देखा सभी को घेरे है निद्रा गाती जगाती गौरी सभी को गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| गौरी उमा गणपति को जगाये जागो उठो पुत्र सुनयन खोलो शिव गण सभी धुंद निनाद करते गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| देखो गजानंद सूरज निकलता लाली सारा नभ सोभता है रंगीन किरणे गाते है पंछी गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| बहती हवाएं तरु झूमते है नर तन से नटराज प्रसन्न होते भक्ते है ताली लय में बजाते गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| धोया उमा ने मुख गणपति का सोया हुवा लाल खिला कमल सा भवरे बने शिव गण गा रहे है गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| शिव ध्यान करती माला पिरोती वो माँ बुलाती निज लाल को सब सखिया सभी सस्वर गीत गाती गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| जागो पुजारी शिव मंदिरो केकरते शिवार्चन फूलो फलो से तुमभी चलो विघ्न हरो सभी के गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....|| ओमकार के सचमुच रूप हो तुम साकार श्रिष्टि के स्वरूप हो तुम बुद्धि प्रदाता धन धान्य दाता गणेश गणनाथ नमो नमस्ते शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश गणनाथ नमो नमस्ते गणेश गणनाथ नमो नमस्तेगणेश गणनाथ नमो नमस्ते.....

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन, 'गणेश अष्टकम', का मुख्य विषय भगवान गणेश की आराधना और उनकी महिमा का वर्णन करना है। भजन के आरंभ में 'शिव पुत्र हेरंभ गणाधीनाथ गणेश' के शब्दों से यह दर्शाया गया है कि गणेश जी शिव और पार्वती के पुत्र हैं तथा उन्हें सभी विघ्नों का नाशक माना जाता है। इस गीत में माँ पार्वती की भूमिका को भी महत्वपूर्ण रूप से दर्शाया गया है, जब वह रात को सभी को जगाने का प्रयास करती हैं। यह संकेत करता है कि भक्ति का मार्ग जागरूकता और मंगलकारी विचारों से भरा होता है। इसके बाद आगे बढ़ते हुए, सुंदर प्रकृति का वर्णन किया गया है, जिसमें सूरज का निकलना, रंगीन किरणें और पंछियों का गाना शामिल है। इससे यह संदेश मिलता है कि भगवान गणेश के साथ जुड़ने से जीवन में उत्सव और रौनक का संचार होता है।

गीत के मध्य में, भक्तों के उत्साह और ताली बजाने का वर्णन करके यह बताया गया है कि गणेश जी के प्रति भक्ति में एक विशेष लय और आनंद होना आवश्यक है। जब भक्त गणेश जी की आराधना करते हैं, तो उनके साथ नटराज की उपस्थिति का संदर्भ है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति का आरंभ हमेशा आनंददायक और उत्सवमय होना चाहिए। माँ पार्वती द्वारा गणेश जी के मुख को धोने का दृश्य प्रस्तुत करता है, जो स्वच्छता और भक्ति का महत्व बताता है। यह भी संकेत करता है कि भक्ति केवल आरती करने से नहीं, बल्कि मन को पवित्र करने से भी जुड़ी है। इस तरह की भावनाएँ विश्व को एक नई दिशा देने में सहायक होती हैं।

गणेश अष्टकम का भक्ति मार्ग अत्यंत सरल और मनोहर है, जिसमें भक्त गणेश जी की आराधना करते वक्त मन, वचन, और क्रिया को एकत्रित करने का अभ्यास करते हैं। 'ओमकार के सच्चे रूप हो' की पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि गणेश जी के रूप में ब्रह्म का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां पर 'बुद्धि प्रदाता धन धान्य दाता' का उल्लेख करने से यह भी प्रकट होता है कि गणेश जी केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और समझ का भी दाता हैं। यह भक्ति मार्ग सरलता और निरंतरता के द्वारा भक्त के मन को स्थिर करता है और उन्हें दिव्यता की ओर अग्रसर करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व गहन है। यह भक्तों को भगवान गणेश की महिमा का स्मरण कराता है जो विश्व के हर कष्ट और विघ्न से छुड़ाते हैं। पुराणों में गणेश जी का वर्णन बहुत ही महत्वपूर्ण है। गणेश पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में गणेश जी की आराधना का उल्लेख मिलता है, जो ज्ञान, समृद्धि, और समर्पण की प्राप्ति हेतु आवश्यक होता है। गणेश जी की उपासना का चयन भक्त के जीवन में हर प्रकार की सकारात्मकता लाने में मदद करता है। यह गीत विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो जीवन में सुख-संपत्ति और मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश अष्टकम का जाप मानसिक शांति, ध्यान की गहराई, और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति की सोच में स्पष्टता आती है और विघ्नों को दूर करने की शक्ति पैदा होती है। यह भजन भक्ति में शक्ति लाता है और मानसिक तनाव को कम करता है। इसके साथ ही यह आध्यात्मिक रूपांतरण में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश अष्टकम का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को किया जा सकता है। पूजा के समय एक दीया जलाना चाहिए और गणेश जी को फूल, फल, या मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। इस भजन का सही उच्चारण करते समय ध्यान की मुद्रा में बैठना आवश्यक है। मन को शुद्ध एवं एकाग्र करना इस भक्ति का अभिन्न हिस्सा है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश अष्टकम का पाठ क्यों करें?

गणेश अष्टकम का पाठ विघ्नों का नाशक है, जो जीवन में सुख और समृद्धि लाने में सहायक होता है। इसके उच्चारण से भक्त को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

क्या यह भजन केवल विशेष अवसरों पर गाया जाता है?

नहीं, इस भजन का पाठ नियमित रूप से किया जा सकता है, चाहे कोई विशेष अवसर हो या न हो। इसे दैनिक पूजा में भी शामिल किया जा सकता है।

गणेश अष्टकम के लाभ क्या हैं?

इस भजन के लाभ में मानसिक तनाव में कमी, ध्यान की गहराई, और आर्थिक समृद्धि शामिल हैं। नियमित जाप से व्यवसाय में भी सफलता मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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