Ram Bhajan

प्रभु मोरी नैया पार उतारो लिरिक्स (Prabhu mori naiya paar utaro Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan Anwar Hussain - Bhaktilok

87 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री राम की कृपा से नैया पार कराने वाला भजन

इस भजन के माध्यम से हृदय से भगवान राम से नैया पार कराने की प्रार्थना करें, जो सभी संकटों में सहारा देते हैं।

प्रभु मोरी नैया पार उतारो, नैया मोरी, नैया मोरी, पार उतारो। कृपा करो, कृपा करो, प्रभु मोरी कृपा करो। महासागर में जो भी डूबता है, तिनको तुम बचाओ, बचाओ, बचाओ। प्रभु मोरी नैया पार उतारो, पार उतारो, पार उतारो। कृपा करो, कृपा करो, प्रभु मोरी कृपा करो। है राम, है राम, है राम, भगवान राम, भगवान राम। श्रीराम, श्रीराम, जय श्रीराम। गोपियाँ, ग्वालों का प्यारा है-मिटाएगा दुःख। प्रभु मोरी नैया पार उतारो। कृपा करो, कृपा करो, प्रभु मोरी कृपा करो। प्रभु मोरी नैया पार उतारो, पार उतारो, पार उतारो।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय प्रभु श्रीराम से उद्धार की प्रार्थना है। 'प्रभु मोरी नैया पार उतारो' इस पंक्ति में भक्त ने अपने जीवन की नैया को महासागर की ऊँची लहरों से बचाने की याचना की है। यह प्रतीकात्मक है कि जीवन के विभिन्न संकटों से पार पाने के लिए भक्त को भगवान की सहायता की आवश्यकता है। शास्त्रों में विभिन्न प्रकार के संकटों का उल्लेख है और भक्त का यह विश्वास है कि श्रीराम की कृपा से सभी समस्याएँ समाप्त हो सकती हैं। भजन में भक्त ने 'कृपा करो' कहकर संकेत किया है कि भगवान की कृपा ही सभी संकटों का समाधान है। यह दर्शाता है कि भक्त की निष्ठा और श्रद्धा श्रद्धालु के सामने स्वामी की असीम शक्ति को दर्शाती है।

भावार्थ के अनुसार, 'महासागर में जो भी डूबता है, तिनको तुम बचाओ' इस भाव ने यह स्पष्ट किया है कि भगवान राम केवल एक deity नहीं बल्कि संकटों में सच्चे सहायक हैं। भक्त के हृदय में न केवल भगवान का अलौकिक स्नेह है, बल्कि वह अपनी परेशानियों को उन्हें सौंपता है। यहाँ 'नैया' का अर्थ केवल भौतिक नैया नहीं है, बल्कि यह जीवन की यात्राओं का प्रतीक है, जिसमें कभी संकट, कभी शांति होती है। जब भक्त श्रीराम से इस प्रकार की याचना करता है, तो वह स्वयं को उनकी शरण में देता है, विश्वास से भरा हुआ।

इस भजन के माध्यम से भक्तिभाव के मार्ग की गहराई को भी समझा जा सकता है। भक्त का राम के प्रति वह अहसास है जो केवल एक भक्ति का अनुभव नहीं बल्कि एक उच्चतम प्रेम का प्रतीक है। राम के प्रति यह गहरी भक्ति और उनके प्रति सही विश्वास उपासक को राम के निकट लाती है। भक्ति मार्ग में आत्म-समर्पण है, और इस भजन में 'कृपा करो' हेतु निवेदन भक्त की उनकी दिव्यता और शक्ति में अटूट विश्वास को दर्शाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व पौराणिक कथाओं में अविस्मरणीय है। रामायण में भगवान राम की कथा में अनेक उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, जहाँ भक्त जन संकटों में स्वयं को भगवान राम की शरण में पाते हैं। यह राम का भक्तों के प्रति अंतर्व्यक्तित्व को दर्शाता है कि वे संकट काल में अपने भक्तों की मनोदशा को समझते हैं। यह भजन प्रभु राम की करुणा और उन पर अटूट विश्वास की प्रतीक है, जो भक्तों की समस्याओं को दूर करने में सक्षम हैं।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का पाठ करने से भक्त के मन में मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और संकटों से मुक्ति का अनुभव होता है। यह न केवल मानसिक तनाव को कम करता है, बल्कि आत्मिक जागरूकता को भी बढ़ाता है। निरंतर इस भजन का उच्चारण करने से भक्त में भगवान राम के प्रति भक्ति और श्रद्धा भी बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम में सर्वोत्तम होता है। पूजा के दौरान एक दीया जलाकर, भगवान राम की चरणामृत में पुष्प अर्पित करें। उचित मुद्रा के लिए सुखासन में बैठें और मन को एकाग्र कर परमात्मा का स्मरण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रभु मोरी नैया पार उतारो भजन का क्या महत्व है?

यह भजन भक्तों को भगवान राम की कृपा के माध्यम से संकटों से उबरने का आश्वासन देता है। यह भक्ति का प्रतीक है, जिसमें भक्त अपने दुःख भरे क्षणों में निष्ठा से भगवान से सहायता की याचना करता है।

किस समय इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह की प्रार्थना या संध्या वेला में करना चाहिए, जिससे इसकी प्रभावशीलता और भी बढ़ जाती है। यह समय आत्मा के शुद्धिकरण और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है।

क्या इस भजन का नियमित जाप करने से कोई लाभ होता है?

हां, इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक वृद्धि और भगवान राम के प्रति भक्ति में वृद्धि होती है। यह अवसाद और मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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