भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नौराते नौ दिन है माई दसम दिन विदाई भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें नौराते नौ दिन है माई दसम दिन विदाई भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

नवरात्रि का पावन पर्व भारतीय संस्कृति में शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा उत्सव है। 'नौराते नौ दिन है माई दसम दिन विदाई' यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक भक्त के हृदय की वह पुकार है जो नौ दिनों की कठिन साधना और भक्ति के बाद माँ के विसर्जन की वेला में फूट पड़ती है। यह भजन 'करुणा' और 'समर्पण' के भावों से ओतप्रोत है, जहाँ एक ओर नौ दिनों के उत्सव का आनंद है, तो दूसरी ओर माँ के विदा होने का मीठा दर्द। नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा के नौ रूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। दशमी के दिन जब विसर्जन (विदाई) का समय आता है, तब भक्त इस भजन के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। यह लेख इस प्रसिद्ध भजन के लिरिक्स, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, और नवरात्रि की महिमा पर एक विस्तृत प्रकाश डालता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ नौराते नौ दिन है माई दसम दिन विदाई ॥

(मुखड़ा)

नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई।
दसम दिन विदाई माई, दसम दिन विदाई॥
नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई।

(अंतरा - 1)

प्रथम शैलपुत्री को ध्याऊं, दूजे ब्रह्मचारिणी।
तीजे चंद्रघंटा को मनाऊं, कष्ट निवारिणी॥
चौथे कुष्मांडा माई, जग की सुखदाई।
नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई॥

(अंतरा - 2)

पंचम स्कंदमाता को सुमिरूं, छठे कात्यायनी।
सप्तम कालरात्रि को पूजूं, असुर विनाशिनी॥
अष्टम महागौरी माई, ममता की परछाई।
नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई॥

(अंतरा - 3)

नवम सिद्धिदात्री को मनाऊं, पूर्ण हो सब काम।
भक्तों की झोली भर देती, मैया तेरा नाम॥
दशमी को विदा करें, रोवे सब लुगाई (भक्त जन)।
नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई॥

(अंतरा - 4)

लाल चुनरिया, लाल ही चूड़ा, सोहे मैया के अंग।
भक्तों की टोली नाच रही है, मैया तेरे संग॥
अगले बरस फिर आना मैया, आस हमने लगाई।
नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन नवरात्रि के नौ दिनों की आध्यात्मिक यात्रा और दशमी के दिन होने वाले विसर्जन के भावुक क्षणों का वर्णन करता है। इसका भावार्थ अत्यंत गहरा है:

उत्सव और साधना: भजन की शुरुआत इस सत्य से होती है कि नवरात्रि का उत्सव नौ दिनों का है। ये नौ दिन केवल व्रत और उपवास के नहीं हैं, बल्कि आत्म-शुद्धि और शक्ति के संचय के दिन हैं। भक्त माँ के नौ रूपों की क्रमिक आराधना करता है, जो चेतना के विभिन्न स्तरों का प्रतीक हैं।

विदाई की पीड़ा: 'दसम दिन विदाई' पंक्ति उस मानवीय भावना को दर्शाती है जहाँ भक्त अपने आराध्य को विदा करते समय भावुक हो जाता है। जैसे एक बेटी अपने मायके से विदा होती है, वैसे ही भक्त माँ दुर्गा को विदा करते हैं। यह विदाई भौतिक रूप से प्रतिमा के विसर्जन की है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से यह माँ को अपने हृदय में सदा के लिए स्थापित करने की प्रक्रिया है।

आध्यात्मिक संदेश: भजन में माँ के नौ रूपों का वर्णन यह सिखाता है कि जीवन में शक्ति के विभिन्न आयाम हैं। जहाँ शैलपुत्री स्थिरता का प्रतीक हैं, वहीं कालरात्रि बुराई के विनाश का। अंत में, सिद्धिदात्री पूर्णता प्रदान करती हैं। दशमी का दिन 'विजय' का प्रतीक है (विजयादशमी), जो यह संदेश देता है कि नौ दिनों की साधना के बाद साधक अपने आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त कर चुका है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • नवदुर्गा का स्मरण: इस भजन में माँ के नौ रूपों का संक्षिप्त लेकिन प्रभावी वर्णन है, जो भक्तों को नवरात्रि की पूरी महिमा एक ही गीत में समझा देता है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह भजन उत्तर भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अत्यंत लोकप्रिय है, विशेषकर विसर्जन जुलूसों के दौरान।
  • भक्ति और वैराग्य: यह गीत एक साथ दो भावनाओं को जगाता है—माँ के आने की खुशी और उनके जाने का वैराग्य।
  • सामूहिक गायन: इसकी लय और ताल ऐसी है कि इसे समूह में कीर्तन के रूप में गाया जा सकता है, जिससे सामुदायिक एकता और भक्ति का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने का सबसे उपयुक्त समय नवरात्रि का काल है। विशेष रूप से:

  • अष्टमी और नवमी: जब नवरात्रि अपने समापन की ओर होती है, तब इस भजन का प्रभाव और बढ़ जाता है।
  • विजयादशमी (दशमी): विसर्जन के समय, जब भक्त माँ की प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने ले जाते हैं, तब यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
  • संध्या आरती: नवरात्रि के दौरान शाम की आरती के बाद इसे सामूहिक रूप से गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

विधि: भजन गाते समय मन में माँ के प्रति पूर्ण समर्पण होना चाहिए। हाथ में मंजीरा, ढोलक या खंजरी का प्रयोग कर इसकी लय को और अधिक भक्तिमय बनाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात् माँ दुर्गा (आदि शक्ति) को समर्पित है। माँ दुर्गा शक्ति, बुद्धि, और मुक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, माँ दुर्गा ने महिषासुर जैसे भयंकर राक्षसों का वध कर देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की थी।

यद्यपि इस विशिष्ट भजन के किसी एक आधुनिक रचयिता का नाम स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह भारत की समृद्ध लोक परंपरा (Folk Tradition) का हिस्सा है। सदियों से संतों और लोक गायकों ने माँ की महिमा में ऐसे पदों की रचना की है जो जन-मानस के कंठहार बन गए हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें कहीं-कहीं लोक बोलियों (जैसे अवधी या भोजपुरी) का पुट मिलता है। इसकी काव्य शैली 'पद' शैली है, जिसमें एक मुखड़ा और कई अंतरे होते हैं।

  • अलंकार: इसमें अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग है (जैसे 'दसम दिन विदाई')।
  • छंद: यह एक गेय पद है, जिसे सुविधानुसार किसी भी सुरीली धुन में बांधा जा सकता है।
  • बिंब विधान: 'लाल चुनरिया', 'लाल चूड़ा' जैसे शब्द माँ के तेजस्वी रूप का सजीव चित्रण करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ/महत्व
नौराते नवरात्रि के नौ दिन शक्ति की उपासना का समय
दसम दिन दशमी तिथि विजयादशमी या विसर्जन का दिन
विदाई विदा करना / विसर्जन साधना की पूर्णता और विदा का भाव
कष्ट निवारिणी दुखों को दूर करने वाली माँ चंद्रघंटा का विशेष गुण
असुर विनाशिनी राक्षसों का नाश करने वाली माँ कालरात्रि का रौद्र रूप
सिद्धिदात्री सिद्धियां देने वाली नौवीं शक्ति जो पूर्णता देती है

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"नौराते नौ दिन है माई, दसम दिन विदाई" - भक्त कहता है कि हे माँ, आपके उत्सव के केवल नौ दिन ही हमारे पास हैं, दसवें दिन तो आपको विदा होना ही है। यह जीवन की नश्वरता और उत्सव के क्षणिक होने का भी संकेत है।

"प्रथम शैलपुत्री को ध्याऊं... कष्ट निवारिणी" - यहाँ भक्त माँ के पहले तीन रूपों की वंदना करता है। हिमालय की पुत्री से लेकर कठिन तपस्या करने वाली ब्रह्मचारिणी और शांति प्रदान करने वाली चंद्रघंटा तक, भक्त अपनी चेतना को ऊपर उठाता है।

"पंचम स्कंदमाता को सुमिरूं... असुर विनाशिनी" - यहाँ वात्सल्य (स्कंदमाता) और वीरता (कात्यायनी व कालरात्रि) का संगम है। भक्त माँ से ममता भी मांगता है और अपने भीतर के विकारों (असुरों) के नाश की शक्ति भी।

"अगले बरस फिर आना मैया, आस हमने लगाई" - यह पंक्ति विदाई के समय की सबसे मार्मिक पंक्ति है। विसर्जन के दुख को भक्त इस आशा के साथ सहता है कि माँ अगले वर्ष फिर आएंगी।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भजन के साथ इन मंत्रों का जाप फलदायी होता है:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

(यह नवार्ण मंत्र माँ के नौ रूपों की संयुक्त शक्ति का प्रतीक है।)


सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम नौराते नौ दिन है माई दसम दिन विदाई
मुख्य देवी माँ दुर्गा (नवदुर्गा)
अवसर नवरात्रि, विजयादशमी, विसर्जन
भाषा हिंदी (लोक शैली)
मुख्य भाव भक्ति, करुणा, विदाई (Farewell)
विषय माँ के नौ रूपों का वर्णन और विसर्जन की भावना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से नवरात्रि के अंतिम दिनों (अष्टमी, नवमी) और विशेष रूप से दशमी के दिन माँ दुर्गा की विदाई या विसर्जन के समय गाया जाता है।

इसमें माँ के नौ रूपों: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का उल्लेख है।

इसका अर्थ है कि नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा के बाद दसवें दिन (विजयादशमी) माँ की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है, जिसे प्रतीकात्मक रूप से माँ की विदाई कहा जाता है।

यह मूल रूप से एक पारंपरिक लोक भजन है। हालांकि, कई प्रसिद्ध गायकों जैसे लखबीर सिंह लख्खा और नरेंद्र चंचल ने इसे अपने एलबमों में स्वर दिया है।

विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर निराकार है। हम उन्हें आकार में पूजते हैं और फिर उन्हें पंचतत्वों (जल) में विलीन कर देते हैं, यह मानते हुए कि वे हमारे हृदय में सदा निवास करेंगे।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित लोक परंपराओं के गहन अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। इस भजन की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरलता और इसमें निहित गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। यह सामग्री "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है, जिसका उद्देश्य भक्तों को सही लिरिक्स और उनके आध्यात्मिक अर्थ से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण (नवदुर्गा महिमा)
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय लोक संगीत संग्रह
  • विजयादशमी एवं विसर्जन पद्धति (धार्मिक ग्रंथ)

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!