भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को लिरिक्स (Meri Maa Khol De Tu Mere Bhi Nasib Ko Lyrics in Hindi) - Mukesh Yaduvansi Mata Bhajan

मुकेश यदुवंशी द्वारा गाए प्रसिद्ध माता भजन 'मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को' के बोल, संदर्भ एवं व्याख्या सहित पढ़ें। | Bhaktilok

मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को - परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

भक्ति और समर्पण की पराकाष्ठा को व्यक्त करता यह भजन "मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को" माता रानी के भक्तों के हृदय की अनन्त पुकार और अगाध आस्था का प्रतीक है। प्रसिद्ध भजन गायक मुकेश यदुवंशी द्वारा स्वरबद्ध यह अत्यंत भावपूर्ण माता भजन उन सभी श्रद्धालुओं के लिए एक आत्मिक संजीवनी के समान है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों, अभावों, संघर्षों और दुखों से जूझ रहे हैं। इस भजन में एक भक्त की अपनी आराध्य जगदम्बा माँ के प्रति अटूट विश्वास, दीनता और करुणा की याचना का अत्यंत जीवंत भाव निहित है। यह भजन केवल एक पारंपरिक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह उस दृढ़ विश्वास का जीवंत दस्तावेज है कि माँ भवानी की एक मात्र कृपा दृष्टि से भाग्य की बंद रेखाएं भी खुल जाती हैं। भारतीय सनातन भक्ति परंपरा में इसे 'विनय पद' या 'ार्त प्रपत्ति' की श्रेणी में अत्यंत ऊँचा स्थान दिया गया है, जहाँ भक्त अपनी सभी चिंताओं को त्यागकर माँ के वात्सल्यमयी चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाता है और उनसे अपने उद्धार की गुहार लगाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को,
खोल दे तू मेरे भी नसीब को,
तार दे तू मैया इस गरीब को ॥
माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को ॥

तेरे दर आके दुख दिल के मैं रोता हूँ,
अश्कों से तेरे मैया चरणों को धोता हूँ।
तेरे होते दाती क्यूँ, दुखियाँ मैं होता हूँ,
चैन से ना जिऊँ मैया चैन से ना सोता हूँ ॥
गले से लगा लो बदनसीब को ॥
माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को ॥

ज्योत मैं जगाऊँ तेरी सांझ सवेरे,
दूर करो मैया मेरे गम के अंधेरे।
कष्ट निवारो मैया अब तू मेरे,
आके गिरा हूँ मैया शरण में तेरे ॥
भूलों ना माँ अपने अजीज को ॥
माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को ॥

सुख-दुख की सब कथा मैं तुमको सुनाऊँ,
कमल सा हृदय मैं तुम्हारे चरणों में लाऊँ।
मैया जो तुम रूठोगी तो मैं कहाँ जाऊँ,
कृपा की नजर मुझपे कर दो अब माऊँ ॥
उबार लो इस भव से अतीब को ॥
माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को ॥

मुकेश यदुवंशी गाए महिमा तुम्हारी,
सुन लो पुकार मेरी शेरावाली।
चरणों की धूल ले लूं मैं भाग्यशाली,
मिटा दो मेरे जीवन की हर खालीहाली ॥
दर्शन दे दो मेरे खुशनसीबी को ॥
माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस पवित्र और अटूट संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त अपनी हर समस्या के समाधान के लिए केवल अपनी माता (शक्ति स्वरूपा जगदम्बा) पर निर्भर रहता है। भजन की शुरुआत में ही भक्त अत्यंत दीन भाव से प्रार्थना करता है कि हे माँ! मेरे जीवन के भाग्य के ताले बंद हैं, इन्हें अपनी कृपा से खोल दे और इस संसार के दुखों से त्रस्त गरीब भक्त का उद्धार (तार) कर दे।

दूसरे अंतर में भक्त अपने मार्मिक दुखों का वर्णन करते हुए कहता है कि जब वह माता के दरबार में आता है, तो उसके हृदय का सारा दर्द आंसुओं के रूप में बह निकलता है। वह अपने आंसुओं से ही मैया के चरणों का अभिषेक करता है। भक्त के मन में यह प्रश्न उठता है कि हे दाती (सबको देने वाली)! जब आप जैसी दयालु माँ मेरी रक्षा के लिए विद्यमान हैं, तब भी मैं दुखी क्यों हूँ? इस असमंजस और पीड़ा के कारण न तो उसे चैन से नींद आती है और न ही जीवन में शांति मिलती है, इसलिए वह मैया से विनती करता है कि इस अभागे को अपने गले से लगा लें।

अगले चरणों में भक्त अपनी साधना और निष्ठा का जिक्र करता है। वह प्रतिदिन सुबह और शाम माँ की ज्योति प्रज्वलित करता है और प्रार्थना करता है कि उसके जीवन के सभी कष्टों और दुखों के अंधकार को दूर कर दिया जाए। वह कहता है कि हे मैया! अब सारे कष्टों का निवारण करने वाली आप ही हैं, क्योंकि मैं आपकी शरण में आकर गिर गया हूँ। हे माँ! आप अपने इस प्रिय (अजीज) को कभी मत भूलना। अंत में गायक मुकेश यदुवंशी माँ शेरावाली से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन की सभी रिक्तियों को भर दें और अपने चरणों की धूल प्रदान करके उन्हें परम सौभाग्यशाली बनाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह एक तड़पते हुए हृदय की पुकार है जो सीधे माँ भगवती के दरबार तक पहुँचती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति का अनूठा भाव: इसमें शरणागति (Surrender) का सर्वोत्तम उदाहरण देखने को मिलता है।
  • सरल और हृदयस्पर्शी भाषा: बोल इतने सरल और भावपूर्ण हैं कि हर आम और खास भक्त आसानी से इनसे जुड़ जाता है।
  • सांत्वना और संबल: जीवन की निराशा के क्षणों में यह भजन भक्तों को मानसिक संबल और आत्मकेंद्रित होने की शक्ति प्रदान करता है।
  • संगीतबद्धता: मुकेश यदुवंशी की मधुर और दर्द से भरी आवाज इस भजन के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।

सनातन संस्कृति में माता रानी को जगत की जननी माना गया है। जैसे एक भौतिक माँ अपने बच्चे के कष्ट को देखकर तड़प उठती है, वैसे ही जगदम्बा भी अपने किसी भी भक्त को दुखी नहीं देख सकतीं। इस भजन का नियमित श्रवण या गायन मन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के पावन पाठों से भी जुड़ सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के विनय भजनों को गाने या सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं होते, क्योंकि भक्ति का संबंध सीधे मन की शुद्धता से है। फिर भी, आध्यात्मिक दृष्टि से इसका अभ्यास करने के कुछ विशेष अवसर और समय उत्तम माने गए हैं:

  • प्रातःकाल एवं संध्याकालीन वंदना: सुबह पूजा के समय जब आप माँ के सामने दीपक जलाते हैं, तब इस भजन का गान करने से दिनभर सकारात्मकता बनी रहती है। संध्या आरती के समय इसे गाना मन को शांत करता है।
  • नवरात्र के पावन अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में माता रानी की आराधना करते समय इस भजन का विशेष रूप से कीर्तन किया जाता है।
  • माता के जागरण या चौकी में: जागरण के दौरान जब माहौल पूरी तरह भक्तिमय होता है, तब इस प्रकार के भावुक भजन श्रोताओं की आँखें नम कर देते हैं और वातावरण को दिव्य बना देते हैं।
  • कठिन समय या संकट के समय: जब भी जीवन में असफलता या गहरा मानसिक तनाव हो, एकांत में बैठकर इस भजन को सुनना या गुनगुनाना बहुत बड़ी मानसिक राहत देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति, जगदम्बा, माता दुर्गा और शेरावाली हैं। हिंदू दर्शन में शक्ति को चराचर जगत की संचालिका माना गया है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी जिनके अधीन हैं, वे महामाया ही समस्त ब्रह्मांड की मूल शक्ति हैं। इस भजन के रचनाकार और स्वरकार श्री मुकेश यदुवंशी हैं, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज और समर्पण के माध्यम से इस लोकगीतनुमा भजन को अमर बना दिया है। लोक कलाकारों और भजन गायकों का यह योगदान सनातन धर्म की मौखिक और सांगीतिक परंपरा को जीवित रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

मुकेश यदुवंशी द्वारा गाए गए यह भजन ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिवेश के माता भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य उन श्रद्धालुओं को मानसिक संबल देना है जो आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह, बीमारी या अन्य दुखों से घिरे हुए हैं। समाज में अक्सर ऐसा समय आता है जब इंसान चारों तरफ से निराश हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में लोक संगीत और भक्ति गीतों का यह रूप लोगों को एक नई उम्मीद और जीने की राह दिखाता है। रचनाकार ने इसमें बहुत ही आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है ताकि हर व्यक्ति अपनी ही पीड़ा को इस भजन में महसूस कर सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा ठेठ हिंदी और अवधी-ब्रज मिश्रित लोक बोलचाल की भाषा है, जिसे आसानी से समझा और गाया जा सकता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'मुक्तक' या 'पद' शैली का भजन है जिसमें तुकबंदी (Rhyming Scheme) का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे- नसीब को, गरीब को, बदनसीब को आदि। इसमें अलंकारों का जटिल प्रयोग न करके सीधे और सच्चे भावों को प्राथमिकता दी गई है, जो श्रोताओं के हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है:

  1. पूर्ण शरणागति: मनुष्य को अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर या माता के चरणों में पूरी तरह समर्पित हो जाना चाहिए।
  2. धैर्य और प्रार्थना: कठिन समय में घबराने के बजाय अपनी पीड़ा को ईश्वर के समक्ष रखना चाहिए, रोना कमजोरी नहीं बल्कि शुद्धिकरण है।
  3. नियमित साधना: रोज सुबह-शाम ईश्वर की आराधना करना जीवन के अंधकार को दूर करने का एकमात्र मार्ग है।
  4. विश्वास की शक्ति: भाग्य को बदलने की क्षमता केवल आपकी सच्ची निष्ठा और परमपिता की कृपा में है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
नसीब भाग्य, किस्मत जीवन की बंद किस्मत को खोलने की प्रार्थना भाग्य सुधारने की गुहार
तार दे उद्धार कर दे, भवसागर से पार लगा दे गरीब भक्त का संकट हरने के लिए मोक्ष या मुक्ति का भाव
अश्क आँसू दुख में आँखों से निकलने वाले आंसू माता के चरणों को धोने का रूपक
दाती देने वाली, दाता माता रानी का संबोधन सबकी झोली भरने वाली माँ
अजीज प्रिय, अपना भक्त का माँ के साथ अपनापन माँ को अपने बच्चे की याद दिलाने हेतु

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को, तार दे तू मैया इस गरीब को ॥"
भावार्थ: भक्त कहता है कि हे मेरी माँ! मेरे भाग्य के द्वार बंद हो चुके हैं, कृपया इन्हें खोल दीजिए और इस दीन-हीन गरीब भक्त का जीवन सुधार दीजिए।

"तेरे दर आके दुख दिल के मैं रोता हूँ, अश्कों से तेरे मैया चरणों को धोता हूँ।"
भावार्थ: जब भी मैं आपके द्वार पर आता हूँ, मेरे दिल का सारा दर्द आँसुओं के रूप में बह निकलता है और ऐसा प्रतीत होता है कि मैं अपने आंसुओं से ही आपके चरण धो रहा हूँ।

"ज्योत मैं जगाऊँ तेरी सांझ सवेरे, दूर करो मैया मेरे गम के अंधेरे।"
भावार्थ: मैं प्रतिदिन सुबह और शाम आपकी अखंड ज्योति प्रज्वलित करता हूँ। हे मैया! मेरे जीवन में छाए हुए दुखों और निराशा के अंधकार को हमेशा के लिए दूर कर दीजिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इस श्लोक का अर्थ है कि हे सभी प्रकार का मंगल करने वाली मंगले, कल्याणकारी शिवे, सब प्रकार के पुरुषार्थों को साधने वाली, शरण लेने योग्य, तीन नेत्रों वाली और गौरी रूप, हे नारायणी देवी! आपको हमारा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम मेरी माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को (Meri Maa Khol De Tu Mere Bhi Nasib Ko)
आराध्य देवी माता दुर्गा / शेरावाली माँ / जगदम्बा
गायक / स्वरकार मुकेश यदुवंशी
भाषा हिंदी (लोक शैली)
भक्ति भाव विनय, समर्पण, करुणा, शरणागति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दैनिक पूजा, माता जागरण, संकट काल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन के गायक मुकेश यदुवंशी हैं, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज में इसे रिकॉर्ड किया है।

उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश माता रानी के चरणों में पूर्ण शरणागति, अटूट विश्वास और कठिन समय में भी धैर्य बनाए रखना है।

उत्तर: इसे प्रतिदिन सुबह-शाम की पूजा में, नवरात्रि के विशेष दिनों में, माता के जागरण में या जब भी मन अशांत हो, तब सुना जा सकता है।

उत्तर: हाँ, इसके बोल बेहद सरल और हिंदी भाषा में हैं, इसलिए इसे किसी भी आम श्रद्धालु द्वारा आसानी से गाया जा सकता है।

उत्तर: सनातन परंपरा में इसे 'आत्मसमर्पण' माना गया है। जब भक्त माता के सामने अपने सारे दुःख रोकर कह देता है, तो उसका मन हल्का हो जाता है और माँ उसकी रक्षा करती हैं।

उत्तर: हाँ, अटूट आस्था और सच्चे मन से की गई प्रार्थना में इतनी शक्ति होती है कि वह प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूल बना देती है।

उत्तर: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" अथवा "सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके" मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है।

उत्तर: आप भक्तीलोक वेबसाइट के भजन और माता रानी अनुभाग में जाकर ऐसे सैकड़ों लोकप्रिय भजनों के लिरिक्स और भावार्थ पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक व्याख्या को पारंपरिक भक्ति साहित्य और लोक मान्यताओं के आधार पर सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक और शांतिप्रद सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं मौखिक भक्ति परंपरा
  • देवी भागवत पुराण एवं सनातन शक्ति उपासना पद्धतियाँ
  • भक्तिकालिन विनय पद और समर्पण साहित्य
  • मुकेश यदुवंशी द्वारा प्रस्तुत लोकगीत एवं भजन ऑडियो-विजुअल आर्काइव्स

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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