Krishna Bhajan

कोई श्याम सुन्दर से कहदो यह जाके लिरिक्स (koi shyam sundar se kehdo yeh jaake Lyrics in Hindi) - गौरव कृष्ण गोस्वामीजी Krishna Bhajan - Bhaktilok

268 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम सुन्दर की भक्ति में लीन कर देने वाला भजन

इस भजन के माध्यम से भक्त श्री कृष्ण की अनुपस्थिति में जीवन की वेदना व्यक्त करते हैं।

कोई श्याम सुन्दर से कहदो यह जाकेभुला क्यों दिया हमें अपना बना केअभी मैंने तुमको निहारा नहीं हैतुम्हारे सिवा कोई हमारा नहीं हैचले क्यों गए श्याम दीवाना बना केभुला क्यों दिया हमें अपना बना के ||अभी मेरी आखों मे आसूँ भारे हैजखम मेरे दिल के अभी भी हरे हैंचले क्यों गए श्याम बंसी बजा केभुला क्यों दिया हमें अपना बना के ||अगर तुम ना आये तो दिल क्या करेगा तुम्हारे लिए ही तड़पता रहेगा निभाना नहीं था तो पहले तो ही कहतेभुझाते हो क्यों आग दिल मे लगा के |
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम कृष्ण भगवान की प्रगाढ़ प्रेम और दृष्टि की कमी से उत्पन्न विकलता को प्रदर्शित करना है। 'भुला क्यों दिया हमें अपना बना के' पंक्ति में भक्त अपने प्रिय कृष्ण की अनुपस्थिति का दर्द महसूस कर रहे हैं। वे पूछते हैं कि जब तुमने हमें अपना बना लिया, तो अब हमें क्यों भूल गए? भक्त की आंखों में आंसू हैं, जो उनके दिल के जख्मों का वर्णन करते हैं। 'चले क्यों गए श्याम दीवाना बना के' से स्पष्ट है कि भगवान की अवहेलना भक्त के लिए कितना कठिन है। उनके बिना, मनुष्य का जीवन खाली महसूस होता है। भजन की धुन और शब्द सुनने में मिठास घोलते हैं, लेकिन उसके पीछे एक गहरी वेदना है।

भजन में व्यक्त की गई भावना एक प्रगाढ़ व्याकुलता की है, जो भक्त की आत्मा के गहराइयों में समाई हुई है। 'अगर तुम ना आए तो दिल क्या करेगा' पंक्ति से पता चलता है कि प्रियतम की अनुपस्थिति एक स्थायी अग्नि की भांति है। भक्त का दिल केवल कृष्ण के लिए तड़ापता है, जिससे उनकी भक्ति की गहराई में प्रेम का अहसास होता है। 'निभाना नहीं था तो पहले बताते' भक्त कृष्ण से ये सवाल करते हैं, जो एक प्रेमिका के आरोप की तरह है। इस प्रकार, यह भजन हमें यह समझाता है कि भक्ति का मार्ग न केवल प्रेम है, बल्कि इससे जुड़ी वेदना भी है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का सार है, जिसमें प्रेम और भजन का एक साथ होना अनिवार्य माना जाता है। भक्त का प्रेम ईश्वर के प्रति एक व्यक्तिगत संबंध का प्रतीक है, जो भक्त को ईश्वर के साथ अधिक निकटता का अनुभव कराता है। कृष्ण की बाँसुरी का राग यहाँ एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो प्रेम और आंतरिक सौंदर्य का अनुभव कराता है। भक्ति में दीवानगी और पूर्ण समर्पण समाहित है, जो पथिक को आत्मा के परम सत्य की ओर अग्रसर करता है। ऐसा कोमल प्रेम और समर्पण बिंदु पर पहुंचता है, जहाँ भक्त का जीवन केवल ईश्वर के लिए होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का शास्त्रीय महत्व कृष्ण भक्ति परंपरा में गहराई से जुड़ा है। भगवद गीता, भागवत पुराण, और अन्य शास्त्रों में भगवान श्री कृष्ण की महिमा का वर्णन मिलता है। इस प्रकार के भजन भक्तों को संजीवनी की तरह कार्य करते हैं, जिससे उनकी भक्ति और भी प्रगाढ़ होती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भगवान की कृपा के बिना जीवन अधूरा है और भक्त की वेदना एक प्रेमिका की तरह है जो अपने प्रियतम से बिना संपर्क के व्यग्र है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मन की शांति और संतुलन की प्राप्ति होती है। भक्त का उद्देश्य केवल कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को समझना और अनुभव करना है। मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने के लिए यह भजन एक उत्कृष्ट साधना है, जिससे भक्त को भक्ति में लीन होने का अवसर मिलता है। नियमित रूप से इसकी आराधना करने से भक्त के जीवन में सकारात्मकता का प्रवाह होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: काल या संध्या के समय करना उत्तम है। भक्त को एक साफ स्थान पर बैठकर दीया जलाना चाहिए और बसंती फूलों का भोग अर्पित करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर ध्यान केंद्रित करते हुए भजन को समर्पण और प्रेम से गाना चाहिए। इस प्रकार की साधना से भक्त के हृदय में श्रद्धा का संचार होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

इस भजन का सर्वोत्तम समय सुबह का है, जब वातावरण शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष मंत्र है जो इसे प्रभावी बनाता है?

इस भजन में शब्दों की गहराई और भावनाएं शक्तिशाली हैं, जो भक्त के हृदय को छूती हैं और उन्हें श्री कृष्ण के प्रति समर्पित करती हैं।

कृष्ण भक्ति में इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन कृष्ण प्रेम की गहराई और प्रेमिका की व्याकुलता को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके प्रति गहरे संबंध की अनुभूति कराता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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