Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ज्योत जगे सारी रात मईया के जगराते में (Jyot jage sari raat Maiya Ke Jagrate Main Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal Devi Bhajan

ज्योत जगे सारी रात मईया के जगराते में नरेंद्र चंचल देवी भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित भक्तिमय सामग्री।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

ज्योत जगे सारी रात 

मईया के जगराते में

ढोलक छैनों की झंकार 

गूँजे भक्तों की जयकार,


बरसे मेहरों की बरसात 

मईया के जगराते में

ज्योत जगे सारी 

रात मईया के जगराते में,


जगमग जागे ज्योत 

ज्योत देवों ने मानी

गाए वेद पुराण 

महिमा संतों ने वखाणी,


^चमके सूरज चाँद सितारे 

पावन ज्योति के ही सहारे

देखो ज्योत की करामात, 


मईया के जगराते में

ज्योत जगे सारी रात 

मईया के जगराते में,


ज्योत की शक्ति देख 

झुके आकरअभिमानी

हुआ था मंडप चूर अभी 

भी है छत्तर निशानी,


^माँ की ज्योति के गुण गाएं 

ध्यानु भक्त अमर कहलाएँ

अब बदलेंगे हालात, 


मईया के जगराते में

ज्योत जगे सारी रात 

मईया के जगराते में,


ज्योति रूप ज्वाला 

करे सब की सुनवाई

बाँटे दया का खज़ाना, 


जग जननी महाँमाई

^कोई बड़ा न कोई छोटा 

देखे सरल ख़रा न खोटा,


मिले मुँह माँगी सौगात 

मईया के जगराते में

ज्योत जगे सारी रात, 


मईया के जगराते में

जगराते में ज्योत जगे 

|| मईया जी की ज्योत जगे ||



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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "ज्योत जगे सारी रात मईया के जगराते में (Jyot jage sari raat Maiya Ke Jagrate Main Lyrics in Hindi) - Narendra Chanchal Devi Bhajan - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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