Ram Bhajan

जग के मालिक प्रभु राम है लिरिक्स (Jag ke malik prabhu raam hai Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan Avinash Karn - Bhaktilok

58 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जग के मालिक प्रभु राम है लिरिक्स (Jag ke malik prabhu raam hai Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan Avinash Karn - Bhaktilok

भगवान श्री राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान जी की महिमा को समर्पित यह अत्यंत ही भावपूर्ण भजन "जग के मालिक प्रभु राम है" (Jag ke malik prabhu raam hai) प्रसिद्ध गायक अविनाश कर्ण जी की मधुर वाणी में गाया गया है। यह भजन सनातन संस्कृति में श्री राम और संकटमोचन हनुमान के अगाध प्रेम, सेवा भाव और अटूट संबंध को अत्यंत सहज एवं सुंदर शब्दों में परिभाषित करता है। रामनवमी, हनुमान જયંતि, मंगलवार के विशेष पूजन, तथा दैनिक सत्संग के अवसरों पर इस भजन का स्मरण करने से हृदय में भक्ति रस का संचार होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), शब्दार्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे साधक को पूर्ण भक्ति भाव और मानसिक शांति की प्राप्ति हो सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


जग के मालिक प्रभु राम है,
सब से प्यारा यही नाम है।
सुनो भगतो श्री राम को,
सब से प्यारा हनुमान है ||

आया लंका पति सिया हर ले गया,
अपने ही मात को अपने घर ले गया।
राम लक्ष्मण दुखी ढूंडते फिर रहे,
कौन आकर सिया को इधर ले गया?
आये लंका जला कर के तू तोडा रावन का अभिमान है,
सुनो भगतो श्री राम को सब से प्यारा हनुमान है ||

तीर दिल पर लगा जब लखन लाल को,
तुमने वापसी किया वीर के लाल को।
लाकर भुट्टी उसे दान जीवन दिया,
नही जुकने दिया राम के भाल को!
तेरे दम से ही पूरा हुआ राम सीता का मान है,
सुनो भगतो श्री राम को सब से प्यारा हनुमान है ||

याद जिसने किया नाम जिस ने लिया,
पार भव से उसे तूने पल में किया।
मीठी आवाज दी तूने अविनाश को,
जो बिसरियां लिखे तेरी बंधन है वो!
तेरी भगती दिलो में रहे मांगू इतना सवर दान है,
सुनो भगतो श्री राम को सब से प्यारा हनुमान है ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री राम की सर्वव्यापकता और उनके परम भक्त हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा को गहराई से उजागर करता है। भजन की पहली पंक्तियों में यह स्पष्ट किया जाता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड और सृष्टि के स्वामी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं, जिनका पावन नाम इस संसार का सबसे प्रिय और पावन मंत्र है। इसके साथ ही, इस बात का भी गान किया जाता है कि ऐसे प्रभु राम को अपने प्राणों से भी प्रिय उनके भक्त हनुमान जी हैं।

आगे की पंक्तियों में रावण द्वारा माता सीता के हरण और उसके उपरांत भगवान राम तथा लक्ष्मण द्वारा उनके अन्वेषण की कथा का मार्मिक वर्णन है। जब रावण माता सीता को ले गया, तब संकट के उस क्षण में पवनपुत्र हनुमान ने लंका में प्रवेश कर लंका दहन किया और अहंकारी रावण के घमंड को चकनाचूर कर दिया। यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि अहंकार का नाश निश्चित है और प्रभु के भक्त धर्म की स्थापना के लिए किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।

भजन का अगला चरण लक्ष्मण जी को शक्ति लगने के प्रसंग से जुड़ा है। युद्ध के दौरान जब मेघनाद के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए और इस प्रकार भगवान श्रीराम के कुल के मान और भाल (मस्तक) को झुकने नहीं दिया। अंत में, गायक अविनाश कर्ण जी अपनी प्रार्थना के माध्यम से यह कामना करते हैं कि हनुमान जी की भक्ति प्रत्येक भक्त के हृदय में सदा बनी रहे, क्योंकि हनुमान की कृपा के बिना राम की प्राप्ति असंभव है। इस प्रकार यह भजन भक्ति, शक्ति और समर्पण का त्रिवेणी संगम है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की रचना पारंपरिक लोक शैली और शास्त्रीय भक्ति भाव के अनूठे मिश्रण पर आधारित है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इष्ट देव: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं संकटमोचन पवनसुत हनुमान।
  • भक्ति भाव: अनन्य समर्पण, दास्य भक्ति और अटूट विश्वास।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन रामायण के प्रमुख प्रसंगों (सीता हरण, लंका दहन, लक्ष्मण मूर्छा और संजीवनी बूटी) को एक सूत्र में पिरोता है।
  • गायन शैली: सरल, कर्णप्रिय और जन-जन की जुबान पर आसानी से चढ़ जाने वाली शब्दावली।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन को पूर्ण पवित्रता और सनातनी परंपरा के अनुसार निम्नलिखित अवसरों पर गाया और सुना जा सकता है:

  • दैनिक पूजा: प्रातःकालीन या संध्याकालीन वंदना के समय दीप प्रज्वलित करने के पश्चात।
  • विशेष पर्व: रामनवमी, हनुमान जयन्ती, दीपावली तथा विजयादशमी के पावन पर्व पर।
  • सत्संग और अनुष्ठान: सुंदरकांड पाठ, रामायण पाठ या हनुमान चालीसा के पाठ के उपरांत सामूहिक संकीर्तन में।
  • मंगलवार व्रत: विशेष रूप से मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में या घर पर संध्या के समय।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में त्रेतायुग के आराध्य भगवान श्री रामचंद्र और उनके परम सेवक भगवान हनुमान हैं। सनातन धर्म में यह मान्यता है कि जहाँ-जहाँ राम कथा होती है, वहाँ अदृश्य रूप से हनुमान जी अवश्य विराजमान होते हैं। इस भजन के माध्यम से गायक अविनाश कर्ण ने आधुनिक संगीत के साथ पारंपरिक लोक भक्ति को जीवंत किया है, जिससे आज की युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन की रचना लोक कथाओं और वाल्मीकि रामायण तथा तुलसीदासकृत रामचरितमानस के उपकथाओं पर आधारित है। इसे लोकप्रिय गायक अविनाश कर्ण की मधुर आवाज में रिकॉर्ड किया गया है। इसकी पृष्ठभूमि विशुद्ध रूप से रामभक्ति और हनुमान आराधना पर आधारित है, जिसका उद्देश्य श्रोताओं के मन में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक निष्ठा का संचार करना है। अधिक जानकारी के लिए आप श्री हनुमान चालीसा पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल हिंदी और अवधी-ब्रज के मिश्रित शब्दों से सुसज्जित है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। पंक्तियों की लयबद्धता इसे संगीत प्रेमियों और भक्तों दोनों के लिए समान रूप से आकर्षक बनाती है। शब्दों का चयन ऐसा है कि आम से आम व्यक्ति भी इसके भाव को आसानी से समझ सके।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • शरणागत की रक्षा: जो भी सच्चे मन से भगवान की शरण में आता है, प्रभु उसकी रक्षा स्वयं करते हैं।
  • संकट में धैर्य: लक्ष्मण मूर्छा और सीता हरण जैसे कठिन प्रसंग यह सिखाते हैं कि विपत्ति के समय भी धैर्य नहीं खोना चाहिए।
  • निस्वार्थ सेवा: हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि बिना किसी फल की इच्छा के अपने गुरु और ईश्वर की सेवा करनी चाहिए।
  • अभिमान का अंत: रावण का प्रसंग यह याद दिलाता है कि अहंकार का नाश निश्चित है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
जग के मालिक संपूर्ण संसार के स्वामी भगवान श्री राम के संदर्भ में
सिया हर ले गया माता सीता का हरण कर लिया रावण द्वारा सीता अपहरण की घटना
लखन लाल लक्ष्मण जी श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण
भुट्टी संजीवनी बूटी लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली जड़ी-बूटी
भाल मस्तक / ललाट वंश या कुल की मान-मर्यादा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति का अपना विशेष दार्शनिक अर्थ है। जब हम कहते हैं कि "जग के मालिक प्रभु राम है", तो इसका अर्थ है कि इस भौतिक जगत का नियंत्रणकर्ता केवल परमेश्वर है। "सब से प्यारा हनुमान है" यह पंक्ति इस बात को दर्शाती है कि भगवान को चापलूसी या दिखावा पसंद नहीं, बल्कि हनुमान जैसा निस्वार्थ प्रेम और समर्पण प्रिय है। लंका दहन और संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग भक्त की असीम शक्ति और भगवान के प्रति उसकी अटूट निष्ठा के प्रतीक हैं। इसी प्रकार शिव तांडव स्तोत्र की तरह ही यह स्तुति मन को ऊर्जावान बनाती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के पाठ के साथ निम्नलिखित पावन मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

"ॐ रामय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥"

"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम शरणं प्रपद्ये॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जग के मालिक प्रभु राम है (Jag ke malik prabhu raam hai)
इष्ट देव भगवान श्री राम एवं हनुमान जी
गायक / कलाकार अविनाश कर्ण (Avinash Karn)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव समर्पण, श्रद्धा, प्रेम और सेवा
उपयुक्त अवसर रामनवमी, मंगलवार व्रत, दैनिक पूजा, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध गायक अविनाश कर्ण जी की मधुर आवाज में गाया गया है।

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री राम की सर्वोच्चता और उनके प्रति भक्त हनुमान के अगाध प्रेम एवं सेवा भाव का वर्णन है।

इस भजन को मंगलवार, शनिवार, रामनवमी, और हनुमान जयंती के दिन गाना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसके अलावा इसे दैनिक पूजा में भी गाया जा सकता है।

हाँ, इसकी सरल लय और शब्दावली के कारण यह बच्चों को रामायण के प्रसंग सिखाने और भजन से जोड़ने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

भजन में यह दर्शाया गया है कि कैसे हनुमान जी ने लंका जलाकर रावण का अहंकार तोड़ा और लक्ष्मण जी को संजीवनी लाकर नया जीवनदान दिया।

निश्चित रूप से, इस भजन को सामूहिक संकीर्तन और घर पर होने वाले सत्संग में हारमोनियम और ढोलक के साथ आसानी से गाया जा सकता है।

इसे सुनने से मन को शांति मिलती है, मानसिक तनाव दूर होता है और भगवान श्री राम तथा हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

मुख्य रूप से यह भजन देवनागरी (हिंदी) लिपि में गाया और पढ़ा जाता है, जिसे भक्तगण अपनी सुविधा के लिए अंग्रेजी या अन्य क्षेत्रीय लिपियों में भी लिख सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और व्याख्या को पारंपरिक स्रोतों, रामायण के उपकथाओं और सनातन भक्ति परंपरा के अनुसार सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली धार्मिक सामग्री प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • वाल्मीकि रामायण - लंका कांड एवं सुंदरकांड प्रसंग
  • श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं संकीर्तन परंपरा
  • भक्ति संगीत संग्रह - अविनाश कर्ण प्रस्तुत

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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