Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

घर जोत जगी महारानी की लिरिक्स (Ghar Jot Jagi Maharani Ki Lyrics in Hindi) - NARENDRA CHANCHAL Devi Bhajan

नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाए प्रसिद्ध देवी भजन 'घर जोत जगी महारानी की' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। नवरात्रि और जागरण के लिए विशेष भजन, संदर्भ सहित।

NARENDRA CHANCHAL Devi Bhajan

आदिशक्ति जगत जननी मां दुर्गा की महिमा का गुणगान करते हुए, अमर पार्श्व गायक नरेंद्र चंचल जी द्वारा स्वरबद्ध यह भजन "घर जोत जगी महारानी की लिरिक्स" सनातन भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है। नवरात्रि के पावन अवसरों, माता के जागरण और चौकी के दौरान जब यह भजन गूंज उठता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय, ऊर्जावान और दिव्य हो जाता है। सनातन परंपरा में 'जोत' या अखंड दीप को साक्षात् मां जगदम्बा का तेज और प्रकाश माना गया है। जिस घर में श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की जोत जगती है, वहां नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है और सुख-शांति, समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि तथा आरोग्य का वास होता है। नरेंद्र चंचल जी की अनूठी और ओजस्वी शैली में गाया गया यह देवी भजन साधक के भीतर समर्पण, प्रेम, करुणा और असीम शक्ति का संचार करता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, गायन का महत्व, आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और दैनिक जीवन में इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

घर जोत जगी महारानी की, महामाई की, शेरावाली की...

उंचे पहाड़ों वाली माता, मेहरां वाली माता,
चरणों में झुकके शीश झुकाएं, अर्जी अपनी पहुंचाएं,
सारे संकट हरने वाली, बिगड़ी बनाने वाली,
घर जोत जगी महारानी की, महामाई की, शेरावाली की...

लाल चुनरिया सोहे तन पर, हाथों में त्रिशूल विराजे,
सिंह सवारी माता रानी, तीनों लोक में डंका बाजे,
जो कोई सच्चे मन से ध्यावे, मनचाहा वरदान वो पावे,
भक्तों के दुःख हरने वाली, मैया शेरावाली...
घर जोत जगी महारानी की, महामाई की, शेरावाली की...

घर-घर गूंजे जयकारा मैया, दूर अँधियारा भागा,
भक्ति का दीप जला है मन में, नया सवेरा जागा,
माता के दरबार से कोई, खाली हाथ न जाता,
सबकी झोली भरने वाली, मेरी अम्बे माता...
घर जोत जगी महारानी की, महामाई की, शेरावाली की...

नरेंद्र चंचल गुण गावे, मैया का यश फैलावे,
जो जन शरण तिहारी आवे, भवसागर तर जावे,
चरणों की धूल जो माथे लावे, जन्म-मरण का दुःख मिटावे,
जय माता दी, बोलो जय माता दी!
घर जोत जगी महारानी की, महामाई की, शेरावाली की...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आदिशक्ति मां दुर्गा के बीच के अनन्य प्रेम और अटूट विश्वास को प्रकट करता है। भजन की मुख्य पंक्ति "घर जोत जगी महारानी की" इस बात का प्रतीक है कि जब मनुष्य अपने अंतःकरण में भक्ति और पवित्रता रूपी ज्योति प्रज्वलित करता है, तो उसके भीतर का अज्ञान और अंधकार स्वतः समाप्त हो जाता है।

भजन के भावार्थ के अनुसार, जब भक्त पहाड़ों पर विराजमान शेर पर सवार माता रानी के दरबार में अपने शीश को झुकाता है, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता का लाल चुनरी और त्रिशूल धारण किए हुए स्वरूप इस बात का संदेश देता है कि वह न केवल करुणामयी मां हैं, बल्कि दुष्टों और नकारात्मक शक्तियों का संहार करने वाली महाशक्ति भी हैं। नरेंद्र चंचल जी ने अपनी सुरीली आवाज के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जो भी मनुष्य सच्चे भाव से माता का स्मरण करता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती और उसे भवसागर से मुक्ति मिलती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह देवी भजन भारतीय लोक संस्कृति और भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • दिव्य ऊर्जा का संचार: इस भजन के श्रवण मात्र से मन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
  • माता रानी के स्वरूप का चित्रण: भजन में मां के शेरावाली, त्रिशूलधारिणी और संकटमोचनी स्वरूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: नवरात्रि जागरण, माता की चौकी और सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाने पर विशेष आनंद की प्राप्ति होती है।
  • अधिक जानकारी के लिए आप दुर्गा सप्तशती पाठ महत्व और नवरात्रि पूजा विधि के लेखों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण करने के लिए निम्नलिखित नियमों और अवसरों को उत्तम माना गया है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त में, प्रातः कालीन पूजा के समय या संध्याकाल में दीप प्रज्वलित करते समय।
  • विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि, अष्टमी-नवमी पूजन, माता का जागरण, कन्या पूजन और मंगलवार या शुक्रवार के विशेष व्रत के दिन।
  • विधि: माता रानी की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर, लाल फूल अर्पित करें और श्रद्धा भाव के साथ इस भजन का पाठ या श्रवण करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी मां दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का सम्मिलित रूप 'महारानी शेरावाली' हैं। इस भजन को अमर और ऊर्जावान स्वर देने वाले प्रख्यात भजन गायक श्री नरेंद्र चंचल जी हैं, जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में मां भगवती के भजनों के माध्यम से करोड़ों लोगों के दिलों में भक्ति की अलख जगाई। उनकी आवाज में एक ऐसा जादू और गूंज थी, जो श्रोताओं को सीधा मां के दरबार से जोड़ देती थी.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाए गए यह पारंपरिक देवी भजन उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में अत्यधिक लोकप्रिय हैं। माता वैष्णो देवी के दरबार से जुड़ा उनका संगीत और भेंटें आज भी हर घर में श्रद्धा के साथ सुनी जाती हैं। यह भजन माता के जागरण की संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम जनमानस की समझ में आने वाली हिंदी-पंजाबी मिश्रित लोक भाषा (भक्ति शब्दावली) है। इसमें अनुप्रास और गयता (Rhythm) का सुंदर समन्वय है, जिससे श्रोता स्वतः ही झूमने और गुनगुनाने पर विवश हो जाते हैं। इसके साथ ही जय अम्बे गौरी आरती का पाठ भी साधकों द्वारा इसी भक्ति भाव से किया जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: माता के चरणों में झुकने से अहंकार का नाश होता है और विनम्रता आती है।
  • अंधकार से प्रकाश की ओर: घर में जोत जगाना केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि भीतर के ज्ञान को जाग्रत करना है।
  • संकटों में धैर्य: मां के प्रति अटूट विश्वास मनुष्य को हर विकट परिस्थिति से लड़ने की शक्ति देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
जोत अखंड दीप / प्रकाश माता के समक्ष जलने वाला पवित्र दीपक
महारानी जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा देवी का सर्वोच्च स्वरूप
शेरावाली सिंह पर सवारी करने वाली माता का प्रसिद्ध संबोधन
अर्जी प्रार्थना / निवेदन भक्त द्वारा मां के चरणों में रखा गया आग्रह
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मरण का चक्र

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"उंचे पहाड़ों वाली माता, मेहरां वाली माता..."
इस पंक्ति में मां के निवास स्थान त्रिकूट पर्वत (वैष्णो देवी) और उनकी असीम कृपा (मेहरां वाली) का स्मरण किया गया है। भक्त कहता है कि हम आपके चरणों में शीश झुकाकर अपनी प्रार्थना प्रस्तुत करते हैं.

"लाल चुनरिया सोहे तन पर, हाथों में त्रिशूल विराजे..."
यह पंक्ति माता के सौंदर्य और उनके शक्ति स्वरूप का वर्णन करती है। लाल वस्त्र प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक हैं, जबकि त्रिशूल दुष्टों का नाश करने वाला आयुध है.

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम घर जोत जगी महारानी की (Ghar Jot Jagi Maharani Ki)
आराध्य देवी मां दुर्गा / शेरावाली महामाई
गायक श्री नरेंद्र चंचल
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य विषय देवी भक्ति, जागरण और समर्पण
उचित अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"घर जोत जगी महारानी की" भजन के गायक कौन हैं?

इस प्रसिद्ध देवी भजन के लोकप्रिय गायक अमर श्री नरेंद्र चंचल जी हैं, जिन्होंने अपनी अनूठी शैली में इसे गाया है।

यह भजन किस अवसर पर सबसे अधिक गाया जाता है?

यह भजन नवरात्रि, माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन और मंगलवार या शुक्रवार की पूजा के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है।

घर में जोत जलाने का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

घर में जोत (दीपक) जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, सकारात्मकता का संचार होता है और इसे देवी शक्ति का प्रकाश माना गया है।

क्या इस भजन का पाठ नियमित रूप से किया जा सकता है?

हाँ, माता के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त प्रतिदिन पूजा के समय इस भजन का पाठ या श्रवण कर सकते हैं।

मां दुर्गा की उपासना से भक्तों को क्या फल मिलता है?

माता की उपासना से आयु, यश, बल, बुद्धि, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा सभी संकट दूर होते हैं।

क्या इस भजन को घर की चौकी या जागरण में गा सकते हैं?

निश्चित रूप से, यह भजन जागरण और चौकी की शुरुआत या मुख्य आकर्षण के रूप में सबसे अधिक गाया जाने वाला भजन है।

माता रानी के स्वरूप का वर्णन भजन में कैसे किया गया है?

भजन में माता को लाल चुनरी पहने, हाथों में त्रिशूल और सिंह की सवारी करने वाली करुणामयी महाशक्ति के रूप में दर्शाया गया है।

इस भजन से साधक को क्या प्रेरणा मिलती है?

यह भजन साधक को अहंकार त्यागकर माता के चरणों में पूर्ण समर्पण करने और जीवन के हर अंधकार में भक्ति का दीपक जलाने की प्रेरणा देता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख सनातन धर्म की परंपराओं, लोक संस्कृति और देवी भक्ति के ग्रंथों के आधार पर पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने के लिए प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक भक्ति संगीत परंपरा एवं भजन संकलन
  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • श्री नरेंद्र चंचल जी के प्रसिद्ध देवी भजन संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!