Papmochani Ekadashi Vrat Katha मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी कृपा से मैया हर काम हो गया लिरिक्स भजन इन हिंदी

तेरी कृपा से मैया हर काम हो गया भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। माता रानी की भक्ति से परिपूर्ण इस लोकप्रिय भजन का पाठ और भावार्थ जानें।

"तेरी कृपा से मैया हर काम हो गया" यह भजन माता रानी के प्रति अटूट विश्वास, पूर्ण शरणागति और अनन्य भक्ति का एक अत्यंत भावपूर्ण प्रतीक है। सनातन धर्म की समृद्ध परंपरा में भगवती की उपासना को 'शक्ति साधना' के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, जहाँ भक्त अपने समस्त अहंकार, चिंताओं और कर्मों को माँ के पावन चरणों में समर्पित कर निश्चिंत हो जाता है। यह भजन विशेष रूप से शारदीय व चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और दैनिक संध्या आरती के समय भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा और अश्रुपूर्ण नेत्रों से गाया जाता है। इसमें निहित मूल भाव 'समर्पण' (शरणागति) का है, जो साधक को यह सिखाता है कि जब मनुष्य अपने कर्तापन के भाव को त्यागकर सर्वशक्तिमान आदिशक्ति को अपना सर्वस्व मान लेता है, तब उसके जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। इस भजन का नियमित श्रवण और कीर्तन साधक के अंतःकरण में सकारात्मक ऊर्जा, असीम शांति, धैर्य और दिव्य चेतना का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ श्री दुर्गा शरणम् ॥

(मुखड़ा)
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया,
करती हो तुम दया माँ, मेरा नाम हो गया।
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया...॥

(अंतरा 1)
मैं तो नहीं था काबिल, तेरा ही ये करम है,
मुझ पर जो छाया मैया, खुशियों का ये भरम है।
तेरे दर पे जो आया, वो मालामाल हो गया,
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया...॥

(अंतरा 2)
दुनिया की इस भीड़ में, मैं खो गया था कहीं,
तूने ही राह दिखाई, अब डर मुझे है नहीं।
तेरी शरण में आकर, जीवन संवर गया,
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया...॥

(अंतरा 3)
पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है,
हैरान है जमाना मंजिल भी मिल रही है।
तुम साथ हो जो मैया, हर काम हो गया,
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया...॥

(अंतरा 4)
लाखों पुकारते हैं, तुमको सुबह-ओ-शाम,
मैया तुम्हारी चौखट, है मुक्ति का मुकाम।
जिसने भी तुमको ध्याया, वो निहाल हो गया,
तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस अलौकिक संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने जीवन की हर सफलता का श्रेय स्वयं न लेकर अपनी आराध्य देवी माँ जगदम्बा को देता है।

समर्पण और कृतज्ञता का भाव: भजन की शुरुआत में ही भक्त स्वीकार करता है कि उसके जीवन में जो कुछ भी शुभ और मंगलमय घटित हो रहा है, वह सब माँ की असीम अनुकंपा का ही परिणाम है। "मेरा नाम हो गया" पंक्ति दर्शाती है कि समाज में जो मान-सम्मान और यश भक्त को प्राप्त हुआ है, वह उसकी अपनी योग्यता के कारण नहीं, बल्कि माँ की असीम दयालुता के कारण है।

अहंकार का विसर्जन: प्रथम अंतरे में भक्त अपनी अयोग्यता को स्वीकार करते हुए कहता है कि वह इस कृपा के योग्य नहीं था। यह आध्यात्मिक मार्ग की सबसे बड़ी सीढ़ी है, जहाँ साधक का अहंकार पूरी तरह विलीन हो जाता है। जब तक मनुष्य के भीतर 'मैं' का भाव रहता है, तब तक वह ईश्वर की पूर्ण कृपा का अनुभव नहीं कर सकता। जैसे ही वह कहता है कि "मैं तो नहीं था काबिल", वैसे ही माँ की करुणा का द्वार उसके लिए खुल जाता है।

भवसागर से मुक्ति और सुरक्षा: दूसरे और तीसरे अंतरे में संसार रूपी महासागर (भवसागर) की विषमताओं का वर्णन है। इस मतलबी और विशाल दुनिया की भीड़ में मनुष्य अक्सर दिशाहीन हो जाता है। लेकिन जब माँ का वरदहस्त सिर पर होता है, तो बिना पतवार के भी जीवन रूपी नैया सुरक्षित किनारे लग जाती है। यह अटूट विश्वास ही इस भजन की आत्मा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसे गाने और सुनने से साधक के जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन आते हैं:

  • मानसिक शांति की प्राप्ति: जब हम अपनी चिंताओं को माँ के चरणों में सौंप देते हैं, तो हमारा मन तनावमुक्त और शांत हो जाता है।
  • शरणागति का विकास: यह भजन श्रीमद्भगवद्गीता के 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' के सिद्धांत को चरितार्थ करता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इसके मधुर स्वर और सकारात्मक शब्द अवसाद और निराशा को दूर कर जीवन के प्रति नया दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
  • भक्ति मार्ग का सुदृढ़ीकरण: यह भजन नवधा भक्ति के अंतर्गत 'आत्मनिवेदन' की श्रेणी में आता है, जो भक्ति की सर्वोच्च अवस्था मानी जाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना के लिए हर क्षण पवित्र है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां शास्त्रों के अनुकूल मानी गई हैं:

  • सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में अथवा संध्या आरती के समय करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में, माता की चौकी, जगराता, और प्रत्येक शुक्ल पक्ष की अष्टमी व नवमी तिथि को इसका सामूहिक कीर्तन करना चाहिए।
  • गायन की विधि: शांत चित्त होकर, माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। लाल पुष्प अर्पित करने के उपरांत पूर्ण श्रद्धा और ताली बजाकर (करताल ध्वनि के साथ) सामूहिक रूप से इसका गायन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात् सर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते स्वरूपिणी माँ दुर्गा को समर्पित है। सनातन दर्शन में माँ दुर्गा को आदिशक्ति, महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का एकीकृत रूप माना गया है।

इस भजन की शैली और भाव मध्यकालीन संत परंपरा के संतों जैसे सूरदास, तुलसीदास और मीराबाई के आत्मनिवेदन के पदों से अत्यधिक प्रभावित है। आधुनिक युग में, यह भजन विभिन्न लोक कलाकारों और संतों द्वारा जन-जन तक पहुँचाया गया है, जिससे यह प्रत्येक गृहस्थ के दैनिक पूजा-पाठ का अभिन्न अंग बन गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि अत्यंत रोचक है। मूल रूप से यह भजन भगवान श्रीकृष्ण (कन्हैया) को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय पद "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है" का देवी स्वरूप रूपांतरण है। भारत की समृद्ध लोक संस्कृति में यह परंपरा रही है कि जब कोई भजन जनमानस के हृदय को गहराई से छू लेता है, तो भक्त अपनी-अपनी आराध्य शक्तियों (जैसे माँ दुर्गा, शिवजी या हनुमानजी) के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए उसमें आंशिक परिवर्तन कर लेते हैं।

यह रूपांतरण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सनातन धर्म में ईश्वर के सभी रूप एक ही परम चेतना के विभिन्न प्रकटीकरण हैं। चाहे हम कन्हैया कहें या मैया, दोनों ही भक्तों के कष्टों को हरने वाले और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा और लोक-शब्दावली का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है।

  • काव्य रूप: यह एक गेय पद (गीत) है जिसे सुगमता से किसी भी शास्त्रीय या सुगम संगीत की धुन पर गाया जा सकता है।
  • अलंकार और बिम्ब: इसमें "पतवार के बिना नाव चलना" एक अत्यंत सुंदर रूपक अलंकार है, जो ईश्वर की अदृश्य शक्ति और सहायता को दर्शाता है।
  • रस योजना: इस भजन में मुख्य रूप से 'भक्ति रस' और 'शांत रस' की प्रधानता है, जो श्रोता के मन में करुणा और श्रद्धा का भाव जाग्रत करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की अमूल्य कला सिखाता है:

  1. अहंकार से मुक्ति: जीवन में मिलने वाली हर सफलता को अपनी मेहनत का परिणाम मानने के बजाय ईश्वर का आशीर्वाद मानना ही वास्तविक विनम्रता है।
  2. कठिन समय में धैर्य: जब परिस्थितियां हमारे अनुकूल न हों, तब यह विश्वास रखना चाहिए कि माँ की अदृश्य पतवार हमारी जीवन-नैया को संभाल रही है।
  3. सच्चा धन क्या है?: भौतिक सुख-सुविधाएं क्षणभंगुर हैं, वास्तविक धन तो माँ के चरणों की भक्ति और आत्मिक संतोष है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
करम (करम) कृपा, दया, अनुग्रह ईश्वर का वह अनुग्रह जो बिना किसी स्वार्थ के भक्त पर होता है।
काबिल योग्य, सामर्थ्यवान साधक की यह स्वीकारोक्ति कि वह अपनी साधना के बल पर नहीं, बल्कि माँ की दया से तर रहा है।
भरम (भ्रम) आभास, माया संसार के क्षणभंगुर सुखों को सत्य मान लेना।
मालामाल समृद्ध, धनवान भौतिक धन नहीं, अपितु भक्ति और शांति रूपी परम धन की प्राप्ति।
पतवार नाव चलाने का साधन मानव के अपने प्रयास; जब ये विफल होते हैं, तब ईश्वरीय शक्ति कार्य करती है।
निहाल कृतकृत्य, धन्य होना जीवन के परम लक्ष्य (मोक्ष और भगवद-प्रेम) को प्राप्त कर लेना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरी कृपा से मैया, हर काम हो गया..."
हे जगतजननी! मेरे जीवन के जितने भी कठिन कार्य थे, वे सब आपकी असीम अनुकंपा से अत्यंत सुगमता से पूर्ण हो गए हैं। मुझे अब किसी भी विघ्न का भय नहीं है।

"करती हो तुम दया माँ, मेरा नाम हो गया..."
हे माँ! इस संसार में जो भी मेरा मान-सम्मान, यश और कीर्ति है, वह सब आपकी ही दया का फल है। लोग मुझे आदर देते हैं क्योंकि मैं आपका भक्त हूँ।

"मैं तो नहीं था काबिल, तेरा ही ये करम है..."
मुझमें ऐसी कोई योग्यता या पात्रता नहीं थी कि मुझे इतनी खुशियां और शांति मिले। यह केवल और केवल आपका अकारण करुणा-भाव है जो मुझ पर बरस रहा है।

"पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है..."
संसार रूपी इस भयानक समुद्र में, जहाँ बड़ी-बड़ी नावें डूब जाती हैं, मेरी जीवन-नैया बिना किसी मानवीय सहारे (पतवार) के भी आपकी कृपा रूपी पवन के सहारे सुरक्षित आगे बढ़ रही है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात निम्नलिखित दिव्य मंत्रों का जाप करने से भजन का प्रभाव अनंत गुना बढ़ जाता है:

सर्वमंगल मांगल्ये श्लोक:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

यह श्लोक माँ दुर्गा के शरणागतवत्सल स्वरूप को प्रकट करता है, जो इस भजन के मूल भाव "तेरी शरण में आकर जीवन संवर गया" से पूर्णतः मेल खाता है। इसके साथ ही, माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए लक्ष्मी गायत्री मंत्र और बुद्धि व ज्ञान के लिए गायत्री मंत्र का जाप भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरी कृपा से मैया हर काम हो गया (Teri Kripa Se Maiya Har Kaam Ho Gaya)
समर्पित देवी/देवता माँ दुर्गा, आदिशक्ति, भगवती जगदम्बा
मूल भाव (Bhava) पूर्ण शरणागति, कृतज्ञता, आत्मनिवेदन (Surrender & Gratitude)
भाषा (Language) सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, दैनिक संध्या आरती
मुख्य संदेश अहंकार का त्याग कर ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखना ही जीवन की सफलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश 'पूर्ण शरणागति' (Surrender) और 'कृतज्ञता' है। यह हमें सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार और कर्तापन के भाव को छोड़कर ईश्वर की शरण में जाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति माँ दुर्गा (मैया रानी) को समर्पित है, जो संपूर्ण जगत की जननी और शक्ति का स्रोत हैं।

हाँ, यह भजन मूल रूप से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित प्रसिद्ध भजन "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है" का देवी स्वरूप में रूपांतरित और बेहद लोकप्रिय संस्करण है।

इस भजन को गाने या सुनने का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल पूजा के समय या संध्या आरती के दौरान होता है। इसके अतिरिक्त नवरात्रि और माता के जागरण में इसका विशेष महत्व है।

इसका अर्थ है कि जब मनुष्य के पास जीवन की कठिनाइयों से लड़ने के भौतिक साधन (पतवार) नहीं होते, तब भी ईश्वर की अदृश्य और असीम शक्ति (कृपा) उसे हर संकट से सुरक्षित बाहर निकाल लेती है।

नवरात्रि माँ दुर्गा की साधना का महापर्व है। इस दौरान इस भजन का गायन करने से भक्त के भीतर श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है और माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण दीनता, कृतज्ञता और माँ के प्रति अनन्य प्रेम का भाव होना चाहिए। अपने सभी कर्मों को माँ के चरणों में समर्पित कर देने की भावना रखनी चाहिए।

हाँ, इस भजन के शब्द और मधुर संगीत मन को अत्यंत शांति प्रदान करते हैं। यह साधक को यह भरोसा दिलाता है कि वह अकेला नहीं है, जिससे मानसिक तनाव और चिंताएं दूर होती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की भजन परंपरा और शास्त्रीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस भजन में व्यक्त भाव श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति योग और देवी भागवत पुराण के शक्ति दर्शन से प्रेरित हैं। हमारी संपादकीय टीम द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि भजन के लिरिक्स पूरी तरह से शुद्ध और प्रामाणिक हों ताकि साधकों को साधना और कीर्तन के समय सही मार्गदर्शन मिल सके। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" भक्तों की आध्यात्मिक प्रगति और मानसिक शांति के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: भगवती की महिमा और शरणागति के शास्त्रीय प्रसंग।
  • सनातन भजन संग्रह: पारंपरिक लोक भजनों का संकलन और मौखिक परंपरा।
  • भक्ति योग (गीता): भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और निष्काम कर्म का सिद्धांत।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आप माँ दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की भक्ति से ओतप्रोत और भी पावन रचनाओं का आनंद लेना चाहते हैं, तो हमारे निम्नलिखित लेख अवश्य पढ़ें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!