भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी (Angna padharo maharani mori sharda bhawani lyrics in Hindi) - Bhagwat Suthar

अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी भजन माँ शारदा की कृपा की याचना करता है, जिससे भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

प्रस्तावना एवं परिचय

शारदा माता की कृपा का सदाबहार गीत

यह भजन मातृ शक्ति की महिमा का बखान करता है, भक्ति से भरा हर शब्द शारदा भवानी की अनुकंपा की प्रार्थना करता है।

अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी (Angna padharo maharani mori sharda bhawani lyrics in Hindi) - अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानीशारदा भवानी मोरी शारदा भवानीकरदो कृपा महारानी मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो..............ऊँची पहाड़िया पे मंदिर बनो हैमंदिर में मैया को आसान लगो हैसान पे बैठी महारानी मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो..............रोगी को काया दे निर्धन को मायाबांझन पे किरपा ललन घर आयामैया बड़ी वरदानी मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो..............मैहर में ढूंढी डोंगरगढ़ में ढूंढीकलकत्ता कटरा जालंधर में ढूंढीविजरघवगध में दिखानी मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो..............मैहर को देखो या विजयराघवगढ़ कोएकै दिखे मोरी मैया के मढ़ कोमहिमा तुम्हारी नहीं जानी मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो..............महिमा तुम्हारी भगत जो भी गाएमोनी भी मैया में दर्शन को आएकरदो मधुर मोरी वाणी हो मोरी शारदा भवानीअंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवान
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की प्रधान थीम माँ शारदा की कृपा और उनके अद्वितीय गुणों का गुणगान करना है। 'अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी' इस पंक्ति में माँ की आगवानी की जा रही है, जो भक्तों के दिलों में गहरी श्रद्धा उत्पन्न करती है। इसके बाद कहा गया है कि 'ऊँची पहाड़िया पे मंदिर बनो है', जहाँ भक्तों का विश्वास और श्रद्धा, यह संकेत करता है कि माता शारदा का स्थान केवल भौतिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी है। इसी क्रम में, भजन में माँ की कृपा की याचना की गई है, जैसे 'रोगी को काया दे' एवं 'निर्धन को माया', यहाँ केवल भौतिक संतोष की नहीं, अपितु आत्मिक उद्यम की भी आवश्यकता दर्शाई गई है। इससे स्पष्ट होता है कि शारदा भवानी केवल भौतिक जरूरतें पूरी ही नहीं करती, अपितु आत्मिक और मानसिक शांति भी प्रदान करती हैं।

भावार्थ के दृष्टिकोण से, यह भजन माता की अनंत शक्ति और करुणा को दर्शाता है। 'बांझन पे किरपा ललन घर आय' में यह दर्शाया गया है कि माता अपने भक्तों की संकट में सदा रक्षा करती हैं। यहाँ 'किरपा' का अर्थ है माँ की दिव्य सहायता, जो किसी भी परिस्थिति में समर्पण को पहचानती है। साथ ही कहा गया है कि 'महिमा तुम्हारी भगत जो भी गाए', यह बताता है कि माँ की महिमा का गुणगान करने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं। इसके परिणामस्वरूप, भक्तों में सच्ची भक्ति का भाव जागृत होता है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं।

सिद्धांतिक दृष्टि से, यह भजन 'भक्ति मार्ग' का प्रतीक है, जहाँ भक्त शारदा साक्षात्कार के माध्यम से परमात्मा से संबंध स्थापित करते हैं। भक्ति श्रवण और ध्यान के रूप में होती है, और इसी दौरान भक्त माँ से जुड़ता और उनके प्रति अपनी भक्ति प्रकट करता है। इस भजन में हर पहलू माता और कृषक के परस्पर संबंध को दर्शाता है,ों शारदा माता का स्थान समाज में एक मातृत्व का प्रतीक है। यह केवल व्यक्ति की भक्ति का आधार नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन शारदा भवानी की विशेषताओं की ओर इशारा करता है, जो संसार की सभी कठिनाइयों से निपटने का सामर्थ्य रखती हैं। शारदा माता का संबंध वेदों और उपनिषदों से भी है, जहाँ विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी माना जाता है। भारतीय पुराणों में माँ की भक्ति का महत्व भी दर्ज है, जहाँ यह कहा गया है कि जो भी भक्ति पूर्वक माँ का स्मरण करता है, उसका जीवन संपन्न होता है। इसलिए, यह भजन माँ शारदा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का माध्यम माना जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभदायक है। इसे गाने से मन में सुकून मिलता है और भक्त के भीतर दीर्घकालिक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक रोगों से उबरने और आशा की किरण दर्शाने में यह भजन सहायक है। नियमित रूप से chant करने से आंतरिक सद्भावना बढ़ती है और व्यक्ति की आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही पाठ प्रात:काल या संध्या वेला में किया जाना चाहिए। पूजा स्थल को साफ करके वहाँ एक दीया जलाना चाहिए। साथ ही, माँ शारदा की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष बैठकर भजन गाना चाहिए। मन को एकाग्र करते हुए, श्रद्धा और प्रेम से भजन का जाप करना चाहिए, जिससे भक्ति की अनुभूति बढ़ती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन को गाने से ज्ञान की प्राप्ति होती है?

हाँ, इस भजन का जाप करने से भक्तों में जिज्ञासा और ज्ञान की प्राप्ति होती है। माँ शारदा को ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है, उनका स्मरण करने से विद्या वर्धन होता है।

क्या यह भजन विशेष अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन विशेष अवसरों जैसे ज्ञान के उत्सव, विद्या की दीक्षा या मातृ पूजन के अवसर पर गाया जा सकता है, जिससे माँ की कृपा प्राप्त की जा सके।

क्या कोई विशेष सामग्री भजन गाने के लिए आवश्यक है?

भजन गाने के लिए विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, परंतु अगर कोई कुमकुम, फूल, और मीठा नैवेद्य अर्पित किया जाए तो यह भक्तिपूर्वक श्रवण और गान को और भी महत्व देता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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