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आज रविवार है सूर्य देव का वार है (Aaj ravivaar hai suraye dev ka var hai inse jag ujyaar hai Lyrics in Hindi) - Surya Bhajan Avinash Karn

आज रविवार है सूर्य देव का वार है भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। सूर्य देव की महिमा और रविवार के दिन जल अर्पण का महत्व जानें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

सूर्य देव की आराधना: रविवार का महत्वपूर्ण भक्ति गीत

इस भजन के माध्यम से सूर्य देव की महिमा का गायन करें और अपने जीवन में उजाला लेकर आएं।

 आज रविवार है सूर्य देव का वार है (Aaj ravivaar hai suraye dev ka var hai inse jag ujyaar hai Lyrics in Hindi) -आज रविवार है सुरये देव का वार हैइन से जग उजयार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार हैनव ग्रहो में सूर्ये देव ही सब से पहले आते हैबाकी सारे ग्रह तो इनकी परिकर्मा लगाते हैतेज तो अपार है सूर्ये देव का वार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार हैरवि वार को सूर्ये देव को जल जो अर्पित करते हैपाप ताप से मुक्त होते खाली झोली बारते हैभव से होते पार है सूर्ये देव का वार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार हैयम यमुना शनि देव जी इनका तो परिवार हैजिनकी तेज से तीनो लोक में हो जाता उजयार हैमिट जाता अंधियार है सूर्ये देव का वार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार हैमाँ गायत्री मंतर है प्यारा सूर्य देव को भाता हैरविवार को एक माला मंत्र जो ये जप जाता हैहो जाता उधार हिअ सूर्ये देव का वार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार हैनव ग्रहो में शक्तिशाली महिमा अप्रम पार है
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'आज रविवार है सूर्य देव का वार है' का मुख्य विषय सूर्य देव की महिमा पर केंद्रित है। भजन के आरंभ में यह कहा जाता है कि रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है, जो कि इस जगत को उज्ज्वलता प्रदान करते हैं। 'नव ग्रहों में शक्तिशाली महिमा अप्रतिम पार है' यह दर्शाता है कि सूर्य देव, ग्रहों में से सबसे प्रमुख और शक्तिशाली हैं। अन्य ग्रह उनकी परिक्रमा करते हैं, जो उनकी महानता को और बढ़ाता है। इसके पश्चात, भजन में इस तथ्य का उल्लेख किया गया है कि रविवार को सूर्य देव को जल अर्पित करने से भक्त पाप और ताप से मुक्त हो जाते हैं, और अविश्वसनीय रूप से सुखी जीवन प्राप्त करते हैं। यह सामाजिक और आध्यात्मिक सुरक्षा का एक संकेत है। अंत में, गायत्री मंत्र का जिक्र करके इसे और अधिक श्रद्धापूर्वक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जो सूर्य को समर्पित है।

इस भजन के भावार्थ में एक गहरी आध्यात्मिकता है, जहां भक्त की भावना सूर्य देव के प्रति उसकी निष्ठा और भक्ति को दर्शाती है। अंधकार मिटाने और उजाला लाने का प्रतीक सूर्य देव हैं। 'माँ गायत्री मंत्र है प्यारा सूर्य देव को भाता है' इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि गायत्री मंत्र का जप करने के लिए रविवार का विशेष महत्व है। यह भाव भक्तों को प्रेरित करता है कि वे इस दिन सूरज की ऊर्जा का लाभ उठाएं, और अपनी आत्मा को शुद्ध करें। भाव की गहराई हमें दिखाती है कि सूर्य देव केवल एक आत्मीय देवता नहीं, बल्कि समस्त संसार की चेतना का स्रोत हैं। उनका स्मरण भक्त को आत्मिक संतुलन, शांति और शक्ति प्रदान करता है।

इस भजन के थियोलॉजिकल अर्थ में भक्ति मार्ग का स्पष्ट संकेत है। भक्त की आस्था और श्रद्धा के माध्यम से सूर्य देव की कृपा प्राप्त करना मुख्य उद्देश्य है। इसके द्वारा भक्त एक अदृश्य संबंध स्थापित करता है, जिसमें सूर्य देव का तेज और प्रकाश भक्त के जीवन में समाहित होता है। सूर्य देव को ध्यान में रखते हुए 'भव से होते पार है' जैसे शब्द उस आध्यात्मिक धारणा को व्यक्त करते हैं कि सूर्य देव की कृपा से भक्त सभी प्रकार के कष्टों और संकटों से बाहर आ सकता है। यह भक्ति को एक कर्म की तरह प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नियमित अभ्यास और ध्यान के माध्यम से सूर्य देव का स्मरण करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सूर्य देव की आराधना का महत्व भारतीय धार्मिक परंपरा में उल्लेखनीय है, जिन्हें वेद और पुराणों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। सूर्य देव का उल्लेख ज्यादातर ऋग्वेद, अथर्ववेद, रामायण और महाभारत में किया गया है। वेदों में सूर्य को 'आदित्य', 'सविता' और 'भास्कर' जैसे नामों से संबोधित किया गया है। सूर्य देव के प्रति भक्ति और समर्पण का विशेष महत्व है, खासकर रविवार के दिन, जो विशेष रूप से उन्हें समर्पित होता है। 'आदित्य' के रूप में, सूर्य देव पूर्णता, ज्ञान और रहस्य का प्रतीक माने जाते हैं, और उनकी उपासना से जीवन में निरंतरता और ऊर्जा की वृद्धि होती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। सूर्य देव की आराधना, विशेषकर रविवार को, मानसिक स्पष्टता और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाने का कार्य करती है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने, ध्यान केंद्रित करने, और मानसिक – आध्यात्मिक विकास के लिए लाभकारी है। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से न केवल व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि यह आत्मविश्वास और भक्ति का भी संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह सूर्योदय के समय करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से रविवार को, स्नान करने के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठकर एक दीया जलाना चाहिए। अपने मन में सूर्य देव का ध्यान करते हुए, श्रद्धा पूर्वक जल अर्पित करें और भजन को गाएं। जप करते समय ध्यान लगाना और भक्ति भाव को बनाए रखना आवश्यक है। इस सत्र के दौरान अपने मन की शांति के लिए आसन में स्थित होना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में सूर्य देव की पूजा का क्या महत्व है?

इस भजन में सूर्य देव की पूजा का महत्व इस तथ्य में है कि रविवार विशेष रूप से उन्हीं के लिए समर्पित है, जो जीवन में सुख और स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। यह भजन सच्ची भक्ति को प्रकट करता है।

क्यों कहा गया है कि सूर्य देव शेष ग्रहों का पालन करते हैं?

यह दर्शाता है कि सूर्य देव सभी ग्रहों के राजा हैं। वे सबसे पहले आते हैं, और अन्य ग्रह उनकी परिक्रमा करते हैं, जो उनकी महानता को दर्शाते हैं।

सूर्य देव को जल अर्पित करने के क्या लाभ हैं?

जल अर्पित करने से पाप और ताप का नाश होता है। इससे भक्त की झोली भक्ति और समर्पण से भर जाती है तथा यह जीवन के सारे दुखों से पार जाने का एक मार्ग दर्शाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 03 Nov 2026

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