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श्री राम चरित मानस लिरिक्स (Shri Ram Charit Manas Lyrics in Hindi) - Ram Charit Manas - Bhaktilok

285 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के पावन चरित्र पर आधारित 'श्री रामचरितमानस' सनातन धर्म का एक अत्यंत पूजनीय और अनुपम महाकाव्य है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह ग्रंथ न केवल प्रभु श्री राम की पावन गाथा है, बल्कि मानव जीवन को धर्म, मर्यादा, भक्ति और समर्पण के मार्ग पर ले जाने वाला एक जीवंत प्रकाश स्तंभ है। इस लेख में हम श्री रामचरितमानस की सबसे लोकप्रिय स्तुति, मंगलाचरण और आरती के पावन लिरिक्स (Shri Ram Charit Manas Lyrics in Hindi) प्रस्तुत कर रहे हैं। राम नाम का संकीर्तन और मानस की चौपाइयों का गायन अंतःकरण को शुद्ध करता है, मानसिक क्लेशों का शमन करता है और साधक को सीधे साकेत धाम की दिव्य चेतना से जोड़ता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में आपको शुद्ध पाठ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, दार्शनिक महत्व और गायन विधि की संपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ श्री रामचरितमानस मंगलाचरण एवं स्तुति ॥

वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥१॥
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥२॥
वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शङ्कररूपिणम्।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते॥३॥

॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन ॥
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्॥१॥
कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुंदरम्।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि, नौमि जनक सुतावरम्॥२॥
भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ नंदनम्॥३॥
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज सर चाप धर, संग्राम जित खर दूषणम्॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥५॥

॥ आरती श्री रामायण जी की ॥
आरती श्रीरामायन जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥
गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद॥
सुक सनकादि सेष अरु सारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥१॥
गावत बेद पुरान अष्टदस। छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस॥
मुनि जन धन संतन को सरबस। सार अंस संमत सब ही की॥२॥
गावत संतत संभु भवानी। अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी। कागभुसुंडि गरुड़ के ही की॥३॥
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की॥
हरन रोग भव भूरि अमी की। तात मात सब बिधि तुलसी की॥४॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

श्री रामचरितमानस की यह पावन स्तुति और आरती प्रभु श्री राम के दिव्य स्वरूप और उनकी लीलाओं का अद्भुत वर्णन करती है। 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' स्तुति में गोस्वामी तुलसीदास जी अपने मन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मन! तू कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर, जो संसार के जन्म-मरण रूपी भीषण भय को दूर करने वाले हैं। प्रभु के नेत्र, मुख, हाथ और चरण सभी नवीन कमल के समान सुंदर और लालिमायुक्त हैं। उनका सौंदर्य करोड़ों कामदेवों को लजाने वाला है। उनके शरीर का रंग नवीन जल से भरे मेघ के समान श्याम और अत्यंत सुंदर है। उनके शरीर पर पीतांबर इस प्रकार सुशोभित हो रहा है मानो बिजली चमक रही हो।

आरती के माध्यम से तुलसीदास जी कहते हैं कि यह पावन रामायण जी की आरती है, जो माता सीता के प्रियतम प्रभु श्री राम की सुंदर कीर्ति का गान करती है। इसका गान ब्रह्मा, नारद, वाल्मीकि, शुकदेव, सनकादि ऋषि और स्वयं पवनपुत्र हनुमान जी अत्यंत श्रद्धा के साथ करते हैं। यह ग्रंथ चारों वेदों, अठारह पुराणों और छहों शास्त्रों का निचोड़ है। यह संतों का सर्वस्व और कलयुग के पापों को नष्ट करने वाली संजीवनी बूटी के समान है। इसका निरंतर पाठ करने से मनुष्य के हृदय में भक्ति का उदय होता है और वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शरणागति का संदेश: यह भजन जीव को अहंकार त्यागकर भगवान की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।
  • त्रिगुणमयी महिमा: इसमें भगवान राम को दीनबंधु, दुष्टों का संहार करने वाला और भक्तों को आनंद देने वाला बताया गया है।
  • कलिकाल से मुक्ति: गोस्वामी जी के अनुसार, कलयुग में राम नाम और रामचरितमानस का पाठ ही मोक्ष का सबसे सुलभ साधन है।
  • अद्भुत काव्य सौंदर्य: उपमा, रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर समन्वय इस स्तुति को साहित्यिक दृष्टि से भी उत्कृष्ट बनाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

श्री रामचरितमानस की चौपाइयों, स्तुति और आरती का गायन किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है। विशेष रूप से:

  • दैनिक पूजा: प्रतिदिन सुबह और शाम की आरती के समय इस स्तुति का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • विशेष पर्व: रामनवमी, दीपावली, हनुमान जयंती और सुंदरकांड के पाठ के समय इसका सस्वर गायन किया जाता है।
  • गायन विधि: शांत चित्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल लेकर संकल्प करें और फिर पूर्ण श्रद्धा एवं शुद्ध उच्चारण के साथ गायन करें। गायन के समय हृदय में प्रभु श्री राम और माता सीता की छवि का ध्यान अवश्य करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह पावन स्तुति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम को समर्पित है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं। इसके रचयिता महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी हैं, जो रामभक्ति शाखा के सर्वोपरि कवि माने जाते हैं। तुलसीदास जी ने भगवान शिव की प्रेरणा से काशी और अयोध्या में रहकर इस अद्भुत ग्रंथ की रचना की थी। इस स्तुति में भगवान राम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण जी, भरत जी, शत्रुघ्न जी और परम भक्त हनुमान जी की भी परोक्ष वंदना समाहित है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

गोस्वामी तुलसीदास जी ने संवत १६३१ (1631) में अयोध्या में रामचरितमानस की रचना प्रारंभ की थी। उस समय समाज में सांस्कृतिक और धार्मिक संक्रमण का काल था। तुलसीदास जी ने लोकभाषा अवधी में इस महाकाव्य की रचना की ताकि जन-जन तक भगवान राम का आदर्श चरित्र पहुंच सके। 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' स्तुति विनय पत्रिका से ली गई है, लेकिन यह रामचरितमानस के पाठ के अंत में और प्रभु की आरती के समय अनिवार्य रूप से गाई जाती है। यह स्तुति भक्त के हृदय की व्याकुलता और भगवान के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस स्तुति की भाषा संस्कृतनिष्ठ अवधी और ब्रजभाषा का सुंदर मिश्रण है। इसमें प्रयुक्त छंद 'हरिगीतिका' है, जो अपनी गेयता और लयबद्धता के लिए प्रसिद्ध है। तुलसीदास जी ने इसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों का अत्यंत कोमलता से प्रयोग किया है। 'नवकंज लोचन' और 'कंज मुख' जैसे शब्दों में रूपक अलंकार का प्रयोग प्रभु के अलौकिक सौंदर्य को सजीव कर देता है। इसकी लय इतनी मधुर है कि इसे सुनते ही मन में शांति और भक्ति का संचार होने लगता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • मर्यादा और धर्म का पालन: प्रभु राम का जीवन हमें सिखाता है कि विषम परिस्थितियों में भी अपने धर्म और मर्यादा का त्याग नहीं करना चाहिए।
  • दीन-दुखियों की सेवा: भगवान को 'दीनबंधु' कहा गया है, जो हमें समाज के वंचित और कमजोर वर्ग की सहायता करने की प्रेरणा देता है।
  • अहंकार का नाश: खर-दूषण और रावण जैसे बलशाली राक्षसों का संहार यह दर्शाता है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है।
  • समर्पण भाव: जब तक जीव ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित नहीं होता, तब तक उसे वास्तविक शांति नहीं मिल सकती।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ एवं महत्व
भवभय दारुणम् संसार का भयानक डर जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने वाला।
कंज लोचन कमल के समान नेत्र प्रभु के नेत्रों की कोमलता और दिव्यता का प्रतीक।
कंदर्प अगणित असंख्य कामदेव प्रभु का सौंदर्य अनंत कामदेवों से भी बढ़कर है।
जनकसुतावरम् माता सीता के पति जनक नंदिनी सीता जी के वर अर्थात श्री राम।
खल दल गंजनम् दुष्टों के समूह का नाश करने वाले बुराइयों और नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने वाले।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन...: हे मेरे मन! तू कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर, जो इस संसार के जन्म-मरण रूपी भयानक दुखों को दूर करने वाले हैं। उनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण लाल कमल के समान सुंदर हैं।

२. कंदर्प अगणित अमित छवि...: प्रभु का सौंदर्य ऐसा है मानो करोड़ों कामदेव भी उनके सामने फीके हों। उनका श्याम वर्ण नवीन जल से भरे बादलों के समान सुंदर है। उनके शरीर पर पीला वस्त्र बिजली की चमक के समान सुशोभित हो रहा है। ऐसे सीतापति श्री राम को मैं प्रणाम करता हूँ।

३. भजु दीनबंधु दिनेश दानव...: हे मन! तू उन श्री राम का भजन कर जो दिनों के बंधु हैं, सूर्य के समान तेजस्वी हैं और दानवों व दैत्यों के वंश का समूल नाश करने वाले हैं। वे दशरथ के पुत्र और कौशल देश के आनंद के स्रोत हैं।

४. सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु...: जिनके मस्तक पर सुंदर मुकुट, कानों में कुंडल और ललाट पर सुंदर तिलक सुशोभित है। जिनकी भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं और जो हाथ में धनुष-बाण धारण किए हुए हैं, जिन्होंने युद्ध में खर और दूषण जैसे भयानक राक्षसों को पराजित किया।

५. इति वदति तुलसीदास शंकर...: तुलसीदास जी कहते हैं कि जो भगवान शिव, शेषनाग और मुनियों के मन को आनंदित करने वाले हैं, वे प्रभु श्री राम मेरे हृदय कमल में निवास करें और मेरे भीतर के काम, क्रोध, लोभ आदि शत्रुओं का नाश करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री रामचरितमानस के पाठ से पूर्व इस महामंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥

अर्थ: भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि राम-राम इस प्रकार मधुर नाम का जप करने से मैं राम नाम में ही रमण करता हूँ। राम का एक नाम विष्णु के हजार नामों के समान फल देने वाला है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम श्री राम चरित मानस लिरिक्स (Shri Ram Charit Manas Lyrics)
मुख्य आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
रचयिता / कवि गोस्वामी तुलसीदास जी
मूल ग्रंथ रामचरितमानस / विनय पत्रिका
भाषा संस्कृतनिष्ठ अवधी एवं ब्रजभाषा
मुख्य रस / भाव भक्ति रस, शांत रस, शरणागति भाव
गायन का उत्तम समय प्रातःकाल एवं संध्या आरती के समय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

श्री रामचरितमानस की रचना १६वीं शताब्दी में महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने लोकभाषा अवधी में की थी।

इस स्तुति का मुख्य संदेश भगवान श्री राम के प्रति पूर्ण शरणागति, उनके दिव्य स्वरूप का ध्यान और काम-क्रोध आदि आंतरिक बुराइयों से मुक्ति पाना है।

'आरती श्री रामायन जी की' का गान करने से संपूर्ण रामायण के पाठ का फल प्राप्त होता है। यह कलयुग के पापों का नाश करने वाली और संतों का सर्वस्व मानी गई है।

हाँ, गृहस्थ जीवन में प्रतिदिन रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों या सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ और परिवार में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राम नाम का जप करने से मानसिक तनाव दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस लेख में प्रस्तुत श्री रामचरितमानस की स्तुति, आरती और श्लोकों के पाठ को प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म के पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन जानकारी पहुंचाना है ताकि वे भक्ति मार्ग पर अग्रसर हो सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदास रचित: रामचरितमानस (गीता प्रेस, गोरखपुर)।
  • विनय पत्रिका: गोस्वामी तुलसीदास (संपादित संस्करण)।
  • वैदिक संकीर्तन परंपरा: अयोध्या और काशी के पूज्य संतों के प्रवचन एवं पारंपरिक आरती संग्रह।

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समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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