Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ओ मैया जी कृपा करो भजन लिरिक्स (O Maiya Ji Kirpa Karo Lyrics in Hindi) - IshwarBhakti Devi Bhajan

ओ मइया जी कृपा करो भजन माता की अनुकम्पा और संकट से मुक्ति के लिए समर्पित है, प्यार और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।

प्रस्तावना एवं परिचय

देवी भक्ति का अनमोल गीत: ओ मइया जी कृपा करो

इस भजन में माता की कृपा और आशीर्वाद की प्रभावशीलता का गुणगान किया गया है।

ओ मइयां जी किरपा करो मेरे अवगुण चित न धरो ओ मइया जी विनती सुनो मेरी विपदाये दूर करो हाथो में पतवार धरो बीच भवर से पार करो ओ मइयां जी किरपा करो ...|| इक तेरा ही आसार है तू करदे एक इशारा जो तू चाहे पलट जाये समय की बहती धारा उल्जी लड़ियाँ खोल दे बिखरी कड़ियाँ खोल दे मुझपे माँ उपकार करो मेरी अर्ज पे ध्यान धरो ओ मइया जी किरपा करो...|| शरण तेरी अर्ज मेरी हास की ज्योत जली है किरपा तेरी हुई जब भी तो हर मुश्किल टली है ये साथ न छुटे आये संकट शन में हरो अंधेरो को दूर करो ओ मैया जी विनती सुनो...
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल संदेश माँ देवी की कृपा की याचना करना है। पहले श्लोक में भक्ति से भरे भाव के साथ देवी से प्रार्थना की जा रही है कि उनके अवगुणों को न देखें और विपत्तियों को दूर करें। यह भजन उन विश्वासियों के लिए है जो जीवन के भवर में फंसे हुए हैं और माँ से मार्गदर्शन की कामना करते हैं। जब कहते हैं, 'हाथो में पतवार धरो', तो इसका आशय है कि देवी ही जीवन की भक्ति-नौका को सही दिशा में चलाने का कार्य करती हैं। भक्त माँ से विनती करते हैं कि जैसे वे समय की धारा को पलट सकती हैं, उसी तरह उनकी कृपा से उनकी कठिनाइयों को दूर किया जाए।

आध्यात्मिक दृष्टि से, इस भजन में एक गहरे भावार्थ का समावेश है। भक्त अपनी सभी समस्याओं के लिए देवी की ओर देखता है और उनकी अनुकम्पा की आशा करता है। 'शरण तेरी अर्ज मेरी' पंक्ति में भक्त अपनी समर्पण भाव को स्पष्ट करता है, जिससे उसकी मानसिक शांति और विश्वास बढ़ता है। यह दिखाता है कि जब भक्त माता की कृपा प्राप्त करता है, तो उसके जीवन से सभी मुश्किलें टल जाती हैं। भक्त का यह विश्वास उसके आंतरिक आध्यात्मिक बल को जागृत करता है और उसे कठिनाइयों का सामना करने का साहस देता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अनोखा स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। यह हमें यह सिखाता है कि संकट से निकलने का एकमात्र मार्ग देवी की शरण में जाना है। भक्ति प्रक्रिया में, भक्त अपनी समस्याओं को देवी के सामने रखता है और विश्वास करता है कि उनकी कृपा से सभी बाधाएँ समाप्त हो जाएँगी। यह दर्शाता है कि भक्ति केवल शारीरिक आराधना नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों से सच्चे प्रेम और भक्ति के साथ मां से जुड़ने का मार्ग है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सदियों से देवी पूजक परंपरा में विशेष स्थान है और यह माँ दुर्गा की उपासना में गाया जाता है। पौराणिक ग्रंथों, जैसे देवी भागवतम और दुर्गा सप्तशती में देवी की कृपा को बखाना गया है। यहाँ भक्ति के द्वारा भक्त का आंतरिक संतुलन प्राप्त करने की एक प्रभावी विधि प्रस्तुत की गई है। महाभारत और रामायण के संदर्भ में, देवी की कृपा से ही भक्तों ने कठिनाइयों को पार किया है। यह भजन जीवन के सभी संकटों को सुलझाने के लिए देवी की कृपा का आवाहन करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का लगातार ध्यान करने से मानसिक शांति, संतुलन और देवी की कृपा का अनुभव होता है। भक्ति के इस मार्ग से आत्मबल बढ़ता है और मुश्किल समय में भी स्थिरता मिलती है। यह भजन मन को सकारात्मकता से भरता है और अनुशासन में रहने का प्रेरणा देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या रात्रि में किया जा सकता है, जब मन शांति से भरा होता है। पूजा स्थल पर दीया जलाकर और देवी के चरणों में फूल चढ़ाकर इस भजन का गाया जा सकता है। सच्चे मन से इस भजन को गाने से भक्त को आंतरिक शांति और दिव्य अनुभव होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन केवल संकट में गाना चाहिए?

यह भजन संकट के समय विशेषतः लाभकारी है, लेकिन इसे हमेशा सुनना और गाना चाहिए ताकि जीवन में सकारात्मकता बनी रहे।

क्या इस भजन का पाठ करने से तुरंत फल मिलता है?

इस भजन का नियमित पाठ करने से धीरे-धीरे मानसिक शक्ति और शांति प्राप्त होती है, जो संकट के समय में काम आती है।

क्या इस भजन में विशेष विधि है?

इस भजन का पाठ करने के लिए साधक को स्वच्छता के साथ, सच्चे मन से और श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए, ताकि देवी की कृपा अधिकतम प्राप्त हो सके।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!