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बाबा लागी लगन लिरिक्स (Baba Laagi Lagan Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan Shivratri Song Shekhar Jaiswal

भजन 'बाबा लागी लगन' शिव भक्तों के लिए परम श्रद्धा का प्रतीक है, जिसमें भगवान शिव के प्रति प्रेम और समर्पण का व्यक्तित्व उभरता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

बाबा भोलेनाथ की भक्ति में समर्पण गीत

इस भजन में भक्त ने बाबा शिव के प्रति अपार प्रेम और भक्ति को व्यक्त किया है।

बाबा लागी लगन लिरिक्स (Baba Laagi Lagan Lyrics in Hindi) - Bholenath Bhajan Shivratri Song Shekhar Jaiswal - ऐसी लागी लगन है तेरे नाम की बाबा लागी लगन है तेरे नाम की कोई पागल बुलाए तो मैं क्या करूँ ऐसी लागी लगन है तेरे नाम की बाबा लागी लगन है तेरे नाम की…. तेरे चेहरे का तेज शंकर जी निराला है शीश के चांद में तेरे नूर का उजाला है तेरी जाटो से बहती जो गंगा की धारा है उसी के पवन जल ने सारे जग को तारा है जबसे बाबा मेरे दिल को तू भा गया कोई मुझको न भये तो मैं करूँ ऐसी लागी लगन है तेरे नाम की कोई पागल बुलाए तो मुझे क्या करूँ बाबा लागी लगन है तेरे नाम की....... तेरी जटाओं का छोटा सा मैं एक बाल हूँ साथ तेरे होने भोलेनाथ बेमिसाल हूँ हाथ महाकाल तेरा थाम लिया दर कैसा तेरा ही भक्त तेरा चेला तेरा लाल हूँ देखकर तुझको मुझको हाँ चैन आ गया कोई बेचन रहता है तो क्या करूँ ऐसी लागी लगन है तेरे नाम की बाबा लागी लगन है तेरे नाम की बाबा लागी लगन है तेरे नाम की कोई पागल बुलाए तो मैं क्या करूँ बाबा लागी लगन है तेरे नाम की……
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त ने भोलेनाथ की महिमा को प्रदर्शित करते हुए कहा है कि उनके प्रति यह प्रेम और लगन अनंत है। 'बाबा लागी लगन है तेरे नाम की' इस पंक्ति द्वारा भक्त का त्याग और समर्पण दर्शाया गया है। यहाँ यह बताता है कि जब भक्त की आत्मा शिव के प्रति प्रेम में लिपटी होती है, तो संसार के अन्य सभी विषय उसे अर्थहीन लगते हैं। इसे एक भक्ति का अनूठा स्वरूप माना जाता है, जिसमें भक्त की मन की शांति और संतोष की कामना का प्रतिफल होता है। इसके साथ ही, 'तेरे चेहरे का तेज शंकर जी निराला है' इस पंक्ति में भगवान शिव के दिव्य रूप और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है, जिससे भक्त को भक्ति के माध्यम से अद्भुत अनुभव प्राप्त होता है।

भजन में आगे कहा गया है कि 'जबसे बाबा मेरे दिल को तू भा गया' का भाव दर्शाता है कि शिव के प्रति लगाव ने भक्त के जीवन को एक नई दिशा दी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान की कृपा से भक्त को न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एक स्थायी संबंध भी स्थापित होता है। जब भक्त की आस्था शिव की स्तुति में होती है तो संसार की परेशानियों का उसका असर कम हो जाता है। भूमि से उठते 'गंगा की धारा' के संदर्भ में बताता है कि शिव की महानता और उनके तत्व से सभी जीवन को पोषण मिलता है। इसके द्वारा भक्त को अपार ऊर्जा और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

यह भजन भक्तियोग का सर्वोत्तम उदाहरण है, जिसमें शुद्ध प्रेम और भक्ति का प्रतिपादन किया गया है। भक्त का व्यक्ति विशेष होते हुए भी भगवान शिव के प्रति इसका समर्पण बृहद् और अनंत प्रतीत होता है। यहाँ 'महाकाल तेरा हाथ थाम लिया' कहकर भक्त ने भक्ति मार्ग के अनुकूलता का संकेत दिया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जब भक्त अपने आपको शिव में समर्पित कर देता है, तब वह अपनी सभी समस्याओं से मुक्त हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग केवल प्रेम और समर्पण से ही खुलता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में भगवान शिव की पूजा की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। शिव की महिमा के संदर्भ में 'स्मृति' और 'पौराणिक कथाएँ' निरंतर धर्मशास्त्रों में दृष्टिगोचर होते हैं। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव संहार और निर्माण दोनों के देवता हैं। इस भजन में भक्त का समाज में अपने जीवन को शिव की भक्ति में समर्पित करने का आवाहन है, जो दर्शाता है कि भगवान शिव सब कुछ जानते हैं और भक्त की सच्ची भक्ति स्वीकार करते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जप करने से भक्त को मानसिक शांति, आत्मिक संतोष, और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से भक्त की आस्था बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात या संध्या के समय किया जाना अधिक फलदायी रहता है। पूजा के समय एक दीया जलाएँ और भगवान शिव के प्रति पुष्प अर्पित करें। ध्यान रखें कि आपका मन एकाग्र होना चाहिए और श्रद्धा के साथ जप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन में 'बाबा लागी लगन' का क्या अर्थ है?

यहाँ 'बाबा लागी लगन' का अभिप्राय भगवान शिव के प्रति भक्त की समर्पण भावनाओं से है। इसका अर्थ है कि भगवान शिव के प्रति भक्त का प्रेम इतना गहरा है कि वह किसी और चीज़ की परवाह नहीं करता।

क्या इस भजन का नियमित पाठ करना चाहिए?

जी हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्त की भक्ति में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भक्त को मानसिक शांति और साहस प्रदान करता है।

यह भजन किस समय गाना उचित है?

इस भजन का पाठ प्रात:काल या संध्या के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। यह समय पूजा के लिए विशेष होता है, जिससे भक्त को भगवान के साथ गहरा संबंध स्थापित करने का अवसर मिलता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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