Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बांस की बांसुरिया पे घणो इतरावे भजन लिरिक्स (Baans Ki Bansuriya Pe Ghano Itrave Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Radha Bhajan

यह भजन कन्हैया के प्रति प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, बांसुरी की धुन में छिपा आनंद भक्त को आत्मिक शांति प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कन्हैया के प्रेम में बसी बांसुरी की धुन

सच्ची भक्ति और प्रेम का अनुभव कराने वाला यह भजन सुनिए, मन और आत्मा को तरोताजा करने के लिए।

बांस की बांसुरिया पे घणो इतरावे, काँसी की कंठी मुरली की धुन गावे। कुंज बगिया में काजल की नजर से, धन की वृंदावन बस महकावे। पल पल मोहन, मोहन मोरा, प्यारा नंदलाला। नंदनंदन कन्हैया, राधा के संग सुहाला। पिय प्यारे की सुनते जयजयकार, छेड़े बंसी धुन, मन करे बेकरार। खेल क्रीड़ा में बेसुध भये, कन्हैया के संग राधा नचावे। भक्ति से भरा मन महकता पुराना, बांसुरी की धुन में बसी प्रेम भिराना। बांस की बांसुरिया पे घणो इतरावे, काँसी की कंठी मुरली की धुन गावे।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में कृष्ण की प्रेममय बाल्यावस्था और उनकी बांसुरी का विशेष महत्व दर्शाया गया है। बांसुरी, जो कि कृष्ण के हाथ में होती है, उनके प्रेम और आकर्षण का प्रतीक है। गीत में कहा गया है कि बांसुरी की धुन से प्रसन्न होकर नंदलाल (कृष्ण) अपनी लीला में मग्न होते हैं। यह बांसुरी की मधुर धुन पूरे वातावरण को प्रेम और आनंद से भर देती है। कृष्ण की इस बांसुरी की आवाज़ से भक्तों के मन में प्रेम और भक्ति जागृत होती है। बांसुरी का यह विमोहक गुण भक्तों को मोहित कर देता है।

भजन की दूसरी पंक्ति में ध्यान केंद्रित किया गया है कि कैसे कृष्ण की छवि उनके खेलों और क्रीड़ाओं में जीवंत होती है। 'खेल क्रीड़ा में बेसुध भये' पंक्ति दिखाती है कि कृष्णा और राधा का नृत्य, प्रेम और आनंद का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि वास्तविक भक्ति में अज्ञान और दुनियादारी की चिंता में लिपटा मन जब कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम में लीन होता है, तो वह सब भुलाई जाती है। राधा-कृष्ण की प्रेमालाप से हमारे दिलों में उनके प्रति एक विशेष अनुग्रह उठता है।

यह भजन भक्ति मार्ग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त भावनाओं से प्रेरित होकर कृष्ण की दिव्यता और प्रेम को प्रणाम करता है। 'बांस की बांसुरिया पे घणो इतरावे' का अर्थ है कि जब भक्त कृष्ण के प्रति सच्चे प्रेम से बांसुरी की धुन सुनते हैं, तो वे उन दिव्य क्षणों की पराकाष्ठा को अनुभव करते हैं। भक्ति से ही भक्त अपने मन को शुद्ध करता है और ईश्वर के साथ जोडता है। यही भक्ति मार्ग है, जो भक्त को अपने भीतर के भगवान से मिलने और उनके साथ एकाकार होने में मदद करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कृष्ण की बांसुरी को विशेष स्थान दिया गया है, क्योंकि यह उनके समर्पण और प्रेम का प्रतीक है। पुराणों में बांसुरी का उल्लेख इस रूप में किया गया है कि किस प्रकार यह मोहिनी धुन भक्तों को मोहित करती है तथा विबाधनों से मुक्त करती है। श्री भागवत पुराण में राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते समय बांसुरी अविनाशी प्रेम का प्रतीक है। यह भजन भक्तों को बांसुरी की मधुर धुन में लिपटा कर भगवान श्री कृष्ण की ओर आकर्षित करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मन को शांति और सुकून मिलता है। यह भक्ति संगीतमय अनुग्रह से भरा हुआ है, जिससे भक्त का हृदय और आत्मा दोनों ही प्रेम में डूब जाते हैं। मानसिक तनाव को दूर करने और ऊर्जा को बढ़ाने में सहायता मिलती है। नियमित रूप से भजन गाने से जीवन में प्रेम और भक्ति का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का श्रवण सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है। पूजा के दौरान एक दीप जलाएं और भगवान कृष्ण की तस्वीर के समक्ष रखें। सादगी से बैठकर ध्यान लगाएं और मन में प्रेम भाव से भजन गाएँ। सही मनोबल रखने से भक्ति की अनुभूति होने लगती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कन्हैया के किस भाव को प्रकट करता है?

यह भजन कन्हैया की बाल्यावस्था और उनके खेल क्रीड़ा के क्षेत्र में प्रेम और राधा के प्रति उनकी ममता को दर्शाता है।

क्या बांसुरी का विशेष महत्व है?

बांसुरी, कृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है, जिसके द्वारा वे भक्तों के दिलों में प्रेम और भक्ति को जागृत करते हैं।

इस भजन का गायन करते समय क्या ध्यान देना चाहिए?

इस भजन का गायन करते वक्त प्रेम भावना और श्रद्धा से गाना चाहिए, ताकि भक्ति की अनुभूति गहरी हो सके।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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