Parvati Stotram

सुबह सुबह तू उठ के निस दिन शिव के मंदिर जाया कर लिरिक्स (SUBAH TU UTHA KE NIS DIN Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

196 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

शिव की आराधना: भक्ति की गंगा में गोते लगाएं

इस भजन के माध्यम से शिव की कृपा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करें और सुबह-सुबह शिव के मंदिर जाएँ।

सुबह सुबह तू उठ के निस दिन शिव के मंदिर जाया कर लिरिक्स (SUBAH TU UTHA KE NIS DIN Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilokसुबह सुबह तू उठ के निस दिन शिव के मंदिर जाया करलिरिक्स (SUBAH TU UTHA KE NIS DIN Lyrics in Hindi) - शिव भजन - सुबह सुबह निस दिन जाया कर शिव के मंदिरसुबह सुबह तू उठ के निस दिन शिव के मंदिर जाया करजब जपेगा शिव का नाम तेरे बनेंगे बिगड़े कामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामशिव भजनामृत पीने वाला जग में अमर हो जाएँमहाकाल के भक्तों को तो काल का भय ना सताएँशिव भक्ति की गंगा में तू लगा ले गोते सुबह शामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामशिव सुमिरण बिन मुक्त ना होगा जनमों के बंधन सेमोक्ष तुझे दे देंगे शम्भु ध्यान लगा ले मन सेकाम करेंगे शिव अपना तू किये जा बंदे अपना कामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामदास पवन के जैसा जिस दिन तू शिव का हो जाएगामिल जायेंगे शिव तुझको जब तू शोव में खो जाएगातू शिव में खो जाएगातेरी आत्मा बन जायेगी अविनाशी का पावन धामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामसुबह सुबह निस दिन जाया कर शिव के मंदिरसुबह सुबह तू उठ के निस दिन शिव के मंदिर जाया करजब जपेगा शिव का नाम तेरे बनेंगे बिगड़े कामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े कामजब जपेगा शिव का नामतेरे बन जायेगे सब बिगड़े काम 
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य उद्देश्य शिव की आराधना और भक्ति के महत्व को दर्शाना है। भजन की शुरुआत में भक्त को सुबह-सुबह उठकर शिव के मंदिर जाने का निर्देश दिया गया है, जिसका अर्थ है कि शिव की आराधना दिन की सकारात्मक शुरुआत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 'जब जपेगा शिव का नाम, तेरे बनेंगे बिगड़े काम' इस पंक्ति में यह संदेश है कि शिव का नाम जपने से जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयाँ समाप्त हो सकती हैं और भक्त को सच्चा मार्गदर्शन प्राप्त होता है। शिव को जपने का यह क्रिया जनमों के बंधनों से मुक्ति पाने का मार्ग प्रदान करती है। इस प्रकार, भजन का अर्थ न केवल श्रद्धा का बल्कि एकात्मता और मुक्ति का भी है।

भजन में भावनाएँ और श्रद्धा अपने चरम पर हैं। 'शिव भजनामृत पीने वाला जग में अमर हो जाएँ' का भावार्थ यह है कि शिव की आराधना से भक्त अमर हो जाते हैं, क्योंकि शिव को पुनर्जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म का शासक माना जाता है। भक्त जब ध्यान करते हैं और शिव के नाम का स्मरण करते हैं, तो उन्हें काल का भय नहीं सताता। इसमें यह प्रेरणा भी दी गई है कि शिव भक्ति की गंगा में गोतें लगाने से भक्त अपने जीवन को तरोताजा कर सकते हैं। यह ध्यान और भक्ति की गहराई में उतरने का संकेत है, जो जीवन के आध्यात्मिक पक्ष को मजबूत बनाता है।

भक्ति मार्ग में, यह भजन एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भक्त को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि शिव के नाम का जाप करना उनके अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करता है। शिव का ध्यान करने पर व्यक्ति की आत्मा हृदय में बसे अद्रष्ट को देख सकती है। 'दास पवन के जैसा' पंक्ति का अर्थ है कि जैसे पवन बिना किसी शाखा या छांव के बहता है, वैसे ही भक्त को भी अपने अज्ञान और बंधनों से मुक्त होकर शिव की तरफ बढ़ना चाहिए। यह भक्ति का मार्ग भक्त को अंततः आत्मिक मुक्ति की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का अर्थ केवल भक्ति में नहीं, बल्कि यह युगों से उपासना का एक त्रिवेणी है। शैवमत के अनुसार शिव को सृष्टि का मूल माना गया है, जो ब्रह्मा और विष्णु से भी आगे हैं। पौराणिक कथाएँ जैसे महाभारत और पुराणों में भी शिव की आराधना का महत्व बताया गया है, जहाँ उनसे संबंधित कथाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि कैसे शिव भक्तों को संकटों से निकालते हैं। एक ओर जहां यह भजन शिव की कृपा का संकेत है, वहीं यह भी दर्शाता है कि शिव भक्ति से व्यक्ति दुःखों और बंधनों से मुक्त हो सकता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है, जिससे तनाव और चिंता दूर होती है। नियमित रूप से शिव का सुमिरन करने से व्यक्ति को आत्मिक शक्ति और साहस प्राप्त होता है। यह भजन न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलन स्थापित करता है और सकारात्मक विचारों को उत्तेजित करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय सुबह-सुबह है, क्योंकि इस समय वातावरण शुद्ध और शान्त होता है। शिव मंदिर में जाकर दीप जलाना और फल या फूलों की भेंट चढ़ाना अति शुभ रहता है। चिंतन की अवस्था में बैठकर भजन का पाठ करना चाहिए, जिससे मन एकाग्रता और भक्ति के उच्चतम स्तर पर पहुँच सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सुबह सुबह क्यों शिव के मंदिर जाना चाहिए?

सुबह का समय विशेष रूप से शिव की आराधना के लिए उत्तम माना गया है। इस समय वातावरण से नकारात्मकता दूर होती है और मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।

शिव का नाम जपने का क्या महत्व है?

शिव का नाम जपने से मन और आत्मा को शांति मिलती है। यह न केवल मानसिक तनाव को कम करता है, बल्कि जीवन के कठिनाइयों का सामना करने में भी सहायता करता है।

भजन का जाप करने से क्या लाभ होता है?

भजन का नियमित जाप मानसिक संतुलन, आत्मिक शक्ति, और सकारात्मक विचारों को जागृत करता है, जिससे व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से विकसित होता है और जीवन में मुक्ति का अनुभव कर सकता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!