Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा भजन लिरिक्स (Naam Hai Tera Taranhara Kab Tera Darshan Hoga Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan

श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध भजन 'नाम है तेरा तारणहारा' के हिंदी लिरिक्स और भावार्थ यहाँ पढ़ें। प्रभु दर्शन की व्याकुलता और भक्ति से भरा यह भजन मन को शांति प्रदान करता है।

नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा भजन | Naam Hai Tera Taranhara Kab Tera Darshan Hoga Bhajan

"नाम है तेरा तारणहारा कब तेरा दर्शन होगा" एक अत्यंत ही पावन, भक्ति रस से परिपूर्ण और शरणागति के भाव से ओत-प्रोत कृष्ण भजन है। यह भजन साधक के अंतर्मन की उस गहरी प्यास को व्यक्त करता है, जो जीवात्मा को अपने आराध्य प्रभु श्रीकृष्ण के दिव्य दर्शन के बिना कभी तृप्त नहीं होने देती। इस भजन में भक्त अपने प्रभु से यह प्रश्न करता है कि हे प्रभु! आपका नाम तो मेरा उद्धार करने वाला है, मैंने आपका नाम जपते-जपते अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया, फिर भी आपके दर्शन कब होंगे? यह भजन भक्ति की उस पराकाष्ठा को दर्शाता है जहाँ भक्त केवल नाम जप से संतुष्ट नहीं होता, बल्कि उसे अपने इष्ट के साक्षात दर्शन की लालसा होती है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। यह भजन उसी सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है, जहाँ नाम की महिमा और दर्शन की अभिलाषा एक साथ गुंफित है। भक्ति भाव से गाए जाने पर यह भजन श्रोता और गायक दोनों के हृदय को झंकृत कर देता है। यह भजन विशेष रूप से एकादशी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और नित्य संध्या आरती के समय गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

तरस रही हैं ये पलकें,
देखूँ तुझे मैं कब होगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

भटक रहा हूँ दर-दर मैं,
तू ही मेरा सहारा होगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

तेरे बिना ये जीवन सूना,
कब मुझ पर दया करेगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

जपता रहा मैं तेरा नाम,
अब तो दीदार करा दे।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

मैं तो तेरा दास हूँ प्रभु,
चरणों में जगह दे दे।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

राधा-कृष्ण की जोड़ी है,
बरसाने में वास करे।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

युग-युग से मैं पुकारूँ,
अब तो मुझे अपना ले।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।
नाम है तेरा तारणहारा, कब तेरा दर्शन होगा।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भक्त अपने आराध्य प्रभु श्रीकृष्ण से उनके दर्शन की प्रार्थना कर रहा है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! आपका नाम ही मेरा तारणहारा है, अर्थात आपका नाम ही मुझे इस संसार सागर से पार लगाने वाला है। लेकिन भक्त केवल नाम जप से संतुष्ट नहीं है, वह अपने प्रभु के साक्षात दर्शन की लालसा रखता है। यह भक्ति की उस अवस्था को दर्शाता है जिसे 'मिलन की बेकरारी' कहा जाता है।

भजन की पहली पंक्ति में भक्त अपनी आँखों की तड़प को व्यक्त करता है। वह कहता है कि उसकी पलकें प्रभु के दर्शन के लिए तरस रही हैं। यह भाव उस भक्त का है जो संसार के सभी सुखों को त्यागकर केवल अपने इष्ट के दर्शन की कामना करता है। दूसरी पंक्ति में भक्त अपनी दशा का वर्णन करता है कि वह दर-दर भटक रहा है और प्रभु ही उसका एकमात्र सहारा है। यह भाव शरणागति का है, जहाँ भक्त स्वयं को पूर्ण रूप से प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है।

भजन में भक्त कहता है कि प्रभु के बिना उसका जीवन सूना है। वह प्रभु से दया की प्रार्थना करता है। यह भाव उस आत्मा का है जो भौतिक संसार में रहते हुए भी आध्यात्मिक शून्यता को अनुभव करती है। भक्त जपता रहा प्रभु का नाम, लेकिन अब वह दीदार की प्रार्थना करता है। यह भक्ति की उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ नाम जप भी अपूर्ण लगता है और भक्त को साक्षात दर्शन की आवश्यकता होती है।

भजन में भक्त स्वयं को प्रभु का दास बताता है और उनके चरणों में जगह मांगता है। यह भाव वैष्णव भक्ति परंपरा का मूल है, जहाँ भक्त स्वयं को भगवान का सेवक मानता है। भजन में राधा-कृष्ण की जोड़ी का वर्णन है और बरसाने में उनके वास का उल्लेख है। यह भक्ति की उस परंपरा को दर्शाता है जहाँ राधा और कृष्ण की युगल जोड़ी की उपासना की जाती है। अंत में भक्त युग-युग से प्रभु को पुकारता है और उनसे अपना लेने की प्रार्थना करता है। यह भाव उस आत्मा का है जो जन्म-जन्मांतर से प्रभु के दर्शन की लालसा रखती है।

इस भजन का कुल भाव यह है कि भक्ति का अंतिम लक्ष्य प्रभु के दर्शन और उनके चरणों में स्थान पाना है। नाम जप इसका साधन है, लेकिन लक्ष्य प्रभु के सान्निध्य का अनुभव है। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि निरंतर प्रभु का नाम जपते रहें और उनके दर्शन की लालसा बनाए रखें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। भजन में राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी और बरसाने का उल्लेख है, जो इसे राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा से जोड़ता है। भजन का मुख्य भाव शरणागति, दास्य भक्ति और मिलन की लालसा है। यह भजन भक्ति के उस भाव को व्यक्त करता है जिसे 'विरह' कहा जाता है, जहाँ भक्त प्रभु के वियोग में तड़पता है।

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भक्त के हृदय की गहरी भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करता है। भजन में कोई कठिन शब्दावली नहीं है, जिससे यह सामान्य भक्तों के लिए भी सुलभ है। भजन का संगीत और लय इसे और भी मधुर बनाती है। भजन को गाते समय भक्त स्वयं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है।

इस भजन को सुनने और गाने से भक्त के मन में प्रभु के प्रति प्रेम और शरणागति का भाव जागृत होता है। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि संसार के सभी सुख अस्थायी हैं, केवल प्रभु के चरणों में ही सच्चा सुख है। भजन का नियमित श्रवण और गायन मन को शांति प्रदान करता है और भक्ति भाव को प्रबल बनाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ समय पर गाया और सुना जा सकता है। विशेष रूप से प्रातःकाल स्नान के बाद, संध्या आरती के समय, और रात्रि में सोने से पूर्व इस भजन का गायन शुभ माना जाता है। एकादशी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और अन्य कृष्ण भक्ति से जुड़े पर्वों पर इस भजन का विशेष महत्व है।

भजन गाने के लिए सर्वप्रथम एक शांत स्थान चुनें। प्रभु श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठें। दीपक और धूप प्रज्वलित करें। फिर भक्ति भाव से इस भजन का गायन करें। भजन गाते समय मन को प्रभु के चरणों में केंद्रित रखें। भजन के साथ ताली या मृदंग की ताल का प्रयोग करें। भजन के बाद प्रभु की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

भजन सुनते समय भी मन को एकाग्र रखें। भजन के शब्दों के अर्थ पर ध्यान दें और उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। नियमित रूप से इस भजन का गायन और श्रवण करने से भक्ति भाव प्रबल होता है और मन को शांति मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: यह भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। भजन में राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी और बरसाने का उल्लेख है, जो इसे राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा से जोड़ता है।

प्रश्न 2: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्ति का अंतिम लक्ष्य प्रभु के दर्शन और उनके चरणों में स्थान पाना है। नाम जप इसका साधन है, लेकिन लक्ष्य प्रभु के सान्निध्य का अनुभव है।

प्रश्न 3: इस भजन को कब गाना चाहिए?

इस भजन को किसी भी शुभ समय पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से प्रातःकाल, संध्या आरती के समय, और कृष्ण भक्ति से जुड़े पर्वों पर इस भजन का विशेष महत्व है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन का नियमित गायन करने से कोई लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का नियमित गायन और श्रवण करने से मन को शांति मिलती है, भक्ति भाव प्रबल होता है, और प्रभु के प्रति प्रेम और शरणागति का भाव जागृत होता है।

प्रश्न 5: इस भजन में 'तारणहारा' शब्द का क्या अर्थ है?

'तारणहारा' शब्द का अर्थ है 'तारने वाला' या 'उद्धार करने वाला'। भजन में भक्त कहता है कि प्रभु का नाम ही उसका तारणहारा है, अर्थात प्रभु का नाम ही उसे इस संसार सागर से पार लगाने वाला है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन किसी विशेष संत या कवि द्वारा रचित है?

यह भजन पारंपरिक भक्ति गीतों की श्रेणी में आता है और इसके रचयिता के बारे में कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भजन पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के बीच प्रचलित है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, वैष्णव साहित्य और कृष्ण भक्ति गीतों के संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इनका उद्देश्य भक्तों के बीच भक्ति भाव को जागृत करना है। भजन के अर्थ और भावार्थ को सरल हिंदी में समझाया गया है ताकि सामान्य भक्त भी इसके गूढ़ अर्थ को समझ सकें।

इस सामग्री में दी गई जानकारी भक्ति साहित्य, संत वाणी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस भजन को भक्ति भाव से गाएं और इसके संदेश को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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