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श्याम सम्भालो मुझे भजन लिरिक्स ( Shyam Sambhalo Mujhe Lyrics in Hindi ) - Sad Shyam Bhajan Komal Tiwari - Bhaktilok

98 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"श्याम सम्भालो मुझे" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है, जो भक्त की दीनता और भगवान श्री कृष्ण के प्रति उसकी अनन्य शरणागति को समर्पित है। कोमल तिवारी द्वारा स्वरबद्ध यह भजन उन भक्तों के लिए एक संबल है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों, सांसारिक दुखों और मानसिक द्वंद्व से जूझ रहे हैं। इस भजन का मुख्य भाव 'दैन्य' और 'आत्म-समर्पण' है, जहाँ भक्त अपने आराध्य बांके बिहारी से करुण पुकार करता है कि अब उसके पास कोई अन्य मार्ग नहीं बचा है। यह भजन न केवल सांत्वना प्रदान करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि जब संसार के सभी द्वार बंद हो जाते हैं, तब प्रभु का द्वार ही एकमात्र आश्रय होता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने हृदय की पीड़ा को प्रभु के चरणों में अर्पित कर देता है और पूर्ण विश्वास के साथ उनके संरक्षण की कामना करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

झोली में अब सांवरे डाल दया की भीख,
तेरे सिवा कोई नहीं अब मेरे नज़दीक।
आया हूँ मैं दरबार तुम्हारे, सारे जग से हार,
श्याम सम्भालो मुझे।
गिर जाऊं ना सरकार, पकड़ लो हाथ मेरा एक बार,
श्याम सम्भालो मुझे॥

तुम भी कहीं बाबा मुझे छोड़ ना देना,
मुझे आस है तुमसे, इसे तोड़ ना देना।
मुझे तेरी है दरकार, शरण में लेलो लखदातार,
श्याम सम्भालो मुझे॥

दुनिया मदद करके मेरी हंसी उड़ाती है,
मैं उठना चाहती हूँ, ये मुझे गिराती है।
झूठा सारा संसार, एक तू ही है सच्चा यार,
श्याम सम्भालो मुझे॥

हारे का सहारा तुम ही कहलाते हो बाबा,
दुखियों के संकट को तुम ही मिटाते हो बाबा।
कर दो अब उपकार, लगा दो नैया मेरी पार,
श्याम सम्भालो मुझे॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव 'शरणागति' (Surrender) और 'दैन्य' (Humility) है। वैष्णव भक्ति मार्ग में शरणागति के छह अंग बताए गए हैं, जिनमें भगवान के प्रति पूर्ण विश्वास और अपनी असमर्थता को स्वीकार करना सबसे महत्वपूर्ण है। इस भजन में भक्त अपनी सांसारिक और मानसिक लाचारी को स्वीकार करते हुए भगवान श्री कृष्ण (श्याम बाबा) को अपना एकमात्र रक्षक चुनता है।

भक्त कहता है कि हे सांवरे! अब मेरी झोली खाली है और मैं आपके द्वार पर दया की भीख मांगने आया हूँ। इस संसार में मेरा कोई अपना नहीं है, जो मुझे इस संकट से निकाल सके। जब मनुष्य चारों ओर से निराश हो जाता है, तब उसे केवल ईश्वर का ही सहारा दिखाई देता है। भजन की पंक्तियों में यह स्पष्ट झलकता है कि संसार की सहायता केवल दिखावा है, जो अंततः उपहास और पीड़ा का कारण बनती है। लेकिन प्रभु की शरण में जाने पर भक्त को सच्चा संबल और शांति प्राप्त होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तब वे हमारा हाथ थाम लेते हैं और हमें गिरने नहीं देते।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • करुण और शांत रस का संगम: यह भजन भक्त के हृदय की करुणा और प्रभु के प्रति अगाध श्रद्धा को दर्शाता है, जिससे मन को असीम शांति मिलती है।
  • दैन्य भाव की पराकाष्ठा: भजन में भक्त स्वयं को अत्यंत दीन-हीन मानकर प्रभु से प्रार्थना करता है, जो कि भक्ति मार्ग की सर्वोच्च अवस्था मानी जाती है।
  • मानसिक संबल: जीवन के कठिन दौर में जब व्यक्ति अकेला महसूस करता है, तब यह भजन उसे यह विश्वास दिलाता है कि 'हारे का सहारा' श्याम बाबा हमेशा उसके साथ हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान की भक्ति के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी जाती है:

  • संध्या काल (Evening Prayer): दिनभर की थकान और मानसिक तनाव के बाद शाम के समय इस भजन को सुनने से मन शांत होता है।
  • एकांत साधना: अपने घर के मंदिर में या किसी शांत स्थान पर बैठकर, खाटू श्याम जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन का पाठ या श्रवण करें।
  • भावपूर्ण गायन: इस भजन को गाते समय शब्दों के अर्थ को महसूस करना और आंखों को बंद करके प्रभु के स्वरूप का ध्यान करना आवश्यक है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है, जिन्हें कलियुग में भगवान श्री कृष्ण का ही साक्षात स्वरूप माना जाता है। महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरीक ने जब अपना शीश दान किया, तब श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कलियुग में उनके 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे और जो भी भक्त सच्चे मन से उनके द्वार पर आएगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"श्याम सम्भालो मुझे" भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रृंखला में एक अत्यंत लोकप्रिय कृति है। इसे सुप्रसिद्ध भजन गायिका कोमल तिवारी ने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज में गाया है। इस भजन की पृष्ठभूमि उन अनगिनत भक्तों के अनुभवों पर आधारित है जो जीवन के संघर्षों से थककर खाटू धाम पहुंचते हैं और बाबा श्याम के दर्शन मात्र से अपने सारे दुख भूल जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोकभाषा (खड़ी बोली और ब्रज का प्रभाव) के निकट है। इसमें किसी भी प्रकार के कठिन या क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे यह सीधे आम जनमानस के हृदय को छूती है। इसकी काव्य शैली गेय है, जिसमें लय और ताल का ऐसा सुंदर समन्वय है कि सुनते ही भक्त मंत्रमुग्ध हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. सच्चा मित्र केवल ईश्वर है: संसार के रिश्ते स्वार्थ पर आधारित हो सकते हैं, लेकिन भगवान का भक्त के साथ संबंध निस्वार्थ और शाश्वत होता है।
  2. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य को अपनी शक्ति पर घमंड रहता है, तब तक वह ईश्वर की पूर्ण कृपा का अनुभव नहीं कर पाता। समर्पण ही कृपा का द्वार खोलता है।
  3. धैर्य और विश्वास: कठिन समय में विचलित न होकर प्रभु पर अटूट विश्वास रखना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ एवं महत्व
सांवरे श्री कृष्ण / श्याम बाबा भक्तों द्वारा प्यार से पुकारा जाने वाला नाम।
दरकार आवश्यकता / जरूरत भक्त को केवल प्रभु के सहारे की आवश्यकता है।
लखदातार लाखों का दान देने वाले श्याम बाबा की उदारता और दानी स्वभाव को दर्शाता है।
नैया जीवन रूपी नाव संसार रूपी सागर से पार लगाने की प्रार्थना।
सरकार प्रभु / स्वामी भगवान को अपना सर्वस्व और राजा मानना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "झोली में अब सांवरे डाल दया की भीख..."
भक्त कहता है कि हे प्रभु, मैं आपके द्वार पर एक याचक बनकर आया हूँ। मेरी झोली खाली है, इसमें अपनी दया और कृपा की भीख डाल दीजिए। आपके अतिरिक्त मेरा कोई रक्षक नहीं है।

2. "तुम भी कहीं बाबा मुझे छोड़ ना देना..."
भक्त को भय है कि कहीं उसके पापों या कमियों के कारण प्रभु भी उसे त्याग न दें। वह करुण पुकार करता है कि मेरी इस अंतिम आशा को मत तोड़ना, क्योंकि मुझे केवल आपका ही सहारा है।

3. "दुनिया मदद करके मेरी हंसी उड़ाती है..."
यह पंक्ति सांसारिक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। संसार के लोग मदद करने का नाटक तो करते हैं, लेकिन बाद में पीठ पीछे उपहास उड़ाते हैं। इसलिए भक्त कहता है कि यह संसार झूठा है, केवल आप ही मेरे सच्चे मित्र हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान श्री कृष्ण और खाटू श्याम जी के निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

"ॐ श्री श्याम देवाय नमः"

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्याम सम्भालो मुझे (Shyam Sambhalo Mujhe)
आराध्य देव भगवान श्री खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण)
मुख्य स्वर कोमल तिवारी (Komal Tiwari)
मुख्य भाव दैन्य भाव, करुणा, आत्म-समर्पण (Surrender)
भाषा सरल हिंदी (Hindi)
उपयुक्त अवसर एकादशी, संध्या आरती, श्याम संकीर्तन, मानसिक शांति हेतु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका कोमल तिवारी ने अपने मधुर और भावपूर्ण स्वर में गाया है।

यह भजन भगवान श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्री कृष्ण के कलियुगी स्वरूप) को समर्पित है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि सांसारिक सहारे झूठे और क्षणभंगुर हैं, केवल भगवान की शरण ही शाश्वत और सच्ची है।

महाभारत काल में बर्बरीक को श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि जो भी जीवन से हारकर या निराश होकर उनके पास आएगा, वे उसका सहारा बनेंगे। इसी कारण उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है।

इस भजन को संध्या काल की आरती के समय या जब भी मन अशांत और चिंतित हो, तब सुनना अत्यंत शांतिदायक होता है।

हाँ, इस भजन का नित्य पाठ या श्रवण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव दूर होता है।

'लखदातार' का अर्थ है लाखों का दान देने वाला या अत्यंत उदार दानी। यह श्याम बाबा की महिमा को दर्शाता है।

पूजा के दौरान "ॐ श्री श्याम देवाय नमः" मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और भावार्थ को प्रामाणिक स्रोतों और पारंपरिक श्याम भजनों के संकलन से सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और त्रुटिहीन जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (शरणागति योग संदर्भ)
  • श्री खाटू श्याम महात्म्य एवं पौराणिक कथाएं
  • पारंपरिक वैष्णव भजन संग्रह एवं संकीर्तन पद्धतियां

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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