श्री सत्यनारायण नारायण नारायण लिरिक्स हिंदी (Satyanarayan Narayan Narayan Lakshmi Narayan Lyrics in Hindi) - HARIHARAN - Bhaktilok
श्री सत्यनारायण भगवान की असीम कृपा, करुणा और माधुरी से परिपूर्ण यह पावन भजन 'श्री सत्यनारायण नारायण नारायण, लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण' भारतीय संगीत जगत के प्रख्यात एवं दिग्गज पार्श्व गायक पद्म श्री हरिहरन (Hariharan) की सुमधुर और अलौकिक वाणी में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति गीत है। भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप को समर्पित यह भजन साधक के अंतःकरण को पावन करने, मानसिक अशांति को दूर करने और चित्त को भगवद चरणकमलों में लीन करने की अद्भुत क्षमता रखता है। सनातन धर्म में सत्यनारायण व्रत और कथा का विशेष महत्व है, जहाँ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के इस सत्य स्वरूप का पूजन किया जाता है। हरिहरन जी की शास्त्रीय संगीत शैली और भक्ति-भाव से ओत-प्रोत गायन शैली इस भजन को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करती है। जब कोई भक्त इस भजन का श्रवण या गायन करता है, तो उसके आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा, पवित्रता और भक्ति रस से सराबोर हो जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे, ताकि आप इस दिव्य स्तोत्र का पूर्ण लाभ उठा सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण, लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण
श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण,
भज मन नारायण-नारायण-नारायण।
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण,
लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण..
सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही आधार है,
सत्य बिना इस जग में किसका प्यार है।
नारायण नाम ले ले प्राणी भव से तर जा,
चरणों में विष्णु भगवान के जीवन को कर जा..
श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण,
भज मन नारायण-नारायण-नारायण।
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण,
लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण..
पाप और संताप को हरने वाले हरि हैं,
भक्तों के संकट सब टालने वाले हरि हैं।
जो कोई ध्यावे मन से नारायण का नाम,
पाए बैकुंठ धाम और पावे विश्राम..
श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण,
भज मन नारायण-नारायण-नारायण।
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण,
लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण..
माता लक्ष्मी संग विराजे विष्णु भगवान,
दोनों की कृपा से मिलता सकल जहान।
सत्यनारायण व्रत जो विधि विधान से ध्यावे,
उसके घर में सुख-संपत्ति और वैभव आवे..
श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण,
भज मन नारायण-नारायण-नारायण।
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण,
लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण..
हरिहरन गावे गुण श्री सत्यनारायण के,
मिटाए सब बंधन यह आवागमन के।
जो जन नितप्रति यह धुन गावे और सुनेगा,
वह भवसागर से सहज ही तर जाएगा..
श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण,
भज मन नारायण-नारायण-नारायण।
श्री सत्यनारायण नारायण नारायण,
लक्ष्मी नारायण भजमन नारायण..
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का मूल भाव भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की महिमा का गुणगान करना और जीव को भगवद भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करना है। 'नारायण' शब्द का अर्थ है 'जल में शयन करने वाले' अथवा 'समस्त मानव जातियों के आश्रय स्थल'। भजन की शुरुआत 'श्रीमन्नारायण' महामंत्र से होती है, जिसके निरंतर स्मरण से मन के समस्त विकार और पाप नष्ट हो जाते हैं। गायक हरिहरन जी अपनी सुरीली आवाज में यह संदेश देते हैं कि सत्य ही इस ब्रह्मांड का अंतिम और शाश्वत सत्य है। जो मनुष्य अपने जीवन में सत्य का आचरण करता है और भगवान नारायण का स्मरण करता है, वह इस भवसागर से आसानी से पार हो जाता है।
भजन की अगली पंक्तियों में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु (लक्ष्मी नारायण) के संयुक्त स्वरूप का स्मरण किया गया है। सनातन संस्कृति में माता लक्ष्मी ऐश्वर्य, वैभव और धन की देवी हैं, जबकि भगवान विष्णु पालनहार हैं। दोनों की संयुक्त उपासना से भक्त के जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। सत्यनारायण व्रत कथा का स्मरण कराते हुए भजन यह बताता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन, विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान सत्यनारायण का पूजन और इस भजन का गान करता है, उसके घर में कभी भी दुःख, दरिद्रता और क्लेश का वास नहीं होता। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का एक अचूक साधन है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन कई मायनों में अद्वितीय है। सबसे पहले, इसमें स्वर देने वाले पद्म श्री हरिहरन भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के ऐसे स्तंभ हैं जिनकी गायकी में गजब की गहराई और दिव्यता है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- दिव्य नाम जप: 'नारायण' और 'सत्यनारायण' जैसे महामंत्रों की पुनरावृत्ति मन को तुरंत शांत करती है और ध्यान (Meditation) में सहायता करती है।
- शास्त्रीय सुसंगति: हरिहरन जी की गायकी में शास्त्रीय रागों की हल्की सी झलक मिलती है जो श्रोता के मन में भक्ति और समर्पण का भाव जगाती है।
- सत्य और धर्म का संदेश: भजन यह स्थापित करता है कि सत्य ही जीवन का आधार है और भगवान विष्णु ही सत्य के संरक्षक हैं।
- लक्ष्मी-नारायण कृपा: यह भजन ऐश्वर्य और मुक्ति दोनों का संदेश एक साथ देता है।
यदि आप भगवान विष्णु की अन्य स्तुतियों का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आप श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं, जो इसी परंपरा का एक अत्यंत शक्तिशाली स्रोत है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को गाने और सुनने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं है, किंतु पवित्रता और श्रद्धा का होना अनिवार्य है। इसे निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से गाया जा सकता है:
- सत्यनारायण व्रत कथा के दिन: पूर्णिमा के दिन जब घरों में सत्यनारायण की कथा होती है, तब इस भजन का गान माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
- संध्याकालीन आरती के समय: रोज सुबह और शाम की पूजा के दौरान दीप प्रज्वलित करते समय इस भजन का श्रवण मानसिक शांति प्रदान करता है।
- सत्संग और धार्मिक आयोजन: परिवार के साथ मिलकर या मंदिर में भजन संध्या के दौरान इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
- तनावमुक्ति के समय: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कठिनाइयां आ रही हों, तब इस भजन को सुनने से आंतरिक बल प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु के दो पावन रूप हैं—पहला 'सत्यनारायण' और दूसरा 'लक्ष्मी नारायण'। भगवान विष्णु त्रिमूर्ति में पालनहार की भूमिका निभाते हैं। स्कंद पुराण के रेवा खंड में सत्यनारायण व्रत का विस्तृत वर्णन मिलता है, जहाँ भगवान नारद के पूछने पर स्वयं भगवान विष्णु ने सत्यनारायण व्रत का महात्म्य बताया था। इस भजन को अपनी अद्वितीया गायकी से जीवंत करने वाले गायक हरिहरन हैं, जिनका संगीत जगत में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अतुलनीय योगदान रहा है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
सत्यनारायण भगवान की कथा और उनके भजन सदियों से भारतीय जनमानस की संस्कृति का अभिन्न अंग रहे हैं। पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय बंदिशों के आधार पर आधुनिक संगीतकारों ने समय-समय पर इन्हें नए सिरे से गढ़ा है। हरिहरन जी द्वारा गाया गया यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए तैयार किया गया है जो आधुनिक जीवनशैली में भी अपनी धार्मिक जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं। इसकी सहज शब्दावली और सरल लय इसे हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाती है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और ग्राह्य हिंदी एवं ब्रज-अवधि मिश्रित बोलचाल की है, जिसे हर कोई आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'नारायण-नारायण' की आवृत्ति से भजन में एक विशेष प्रकार का संगीत और नाद उत्पन्न होता है, जो श्रोता के मन मस्तिष्क पर एक गहरा सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है। काव्य शैली के दृष्टिकोण से यह एक भक्ति गीत (Bhajan/Dhunya) है जिसे ताल और लय के साथ आसानी से गाया जा सकता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाता है:
- सत्य के मार्ग पर चलना: भजन स्पष्ट रूप से कहता है कि "सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही आधार है।" जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।
- अहंकार का त्याग: भगवान नारायण के चरणों में शरण लेने से मनुष्य का अहंकार समाप्त होता है और विनम्रता आती है।
- नियमित स्मरण: ईश्वर का नाम केवल संकट के समय नहीं, बल्कि निरंतर जपना चाहिए ताकि मन में शांति बनी रहे।
- संतोष और संयम: माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान की आराधना हमें यह सिखाती है कि भौतिक सुखों का उपभोग करते हुए भी हमें आध्यात्मिक उन्नति के प्रति सजग रहना चाहिए।
यदि आप भगवान राम के चरित्र और आदर्शों के माध्यम से सत्य और धर्म की राह समझना चाहते हैं, तो श्री रामचरितमानस की चौपाइयां पढ़ना भी अत्यंत लाभदायक रहेगा।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| श्रीमन्नारायण | श्री (लक्ष्मी जी) सहित नारायण | भगवान विष्णु का सर्वव्यापक और कल्याणकारी स्वरूप |
| सत्यनारायण | सत्य ही जिनका स्वरूप है ऐसे नारायण | शाश्वत सत्य और धर्म के प्रतीक भगवान विष्णु |
| भवसागर | जन्म-मृत्यु का संसार रूपी समुद्र | संसार के दुखों और बंधनों का चक्र |
| बैकुंठ धाम | भगवान विष्णु का परम लोक | मोक्ष और eternal peace का स्थान |
| संताप | मानसिक और शारीरिक कष्ट | जीवन के दुख, चिंताएं और क्लेश |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"श्रीमन्नारायण-नारायण-नारायण, भज मन नारायण-नारायण-नारायण।"
भावार्थ: हे मेरे मन! तू निरंतर समस्त ऐश्वर्यों के स्वामी भगवान श्री नारायण के नामों का जाप कर। इस पावन नाम के स्मरण मात्र से तेरे जन्म-जन्म के पाप और संताप नष्ट हो जाएंगे।
"सत्य ही ईश्वर है, सत्य ही आधार है, सत्य बिना इस जग में किसका प्यार है।"
भावार्थ: इस संपूर्ण ब्रह्मांड में केवल 'सत्य' ही परमेश्वर है और यही इस सृष्टि का एकमात्र आधार है। बिना सत्य और सच्चाई के इस संसार में किसी भी प्रेम या रिश्ते का कोई शाश्वत मूल्य नहीं है।
"पाप और संताप को हरने वाले हरि हैं, भक्तों के संकट सब टालने वाले हरि हैं।"
भावार्थ: भगवान हरि (विष्णु) ही एकमात्र ऐसे शक्ति हैं जो अपने भक्तों के सभी पापों और मानसिक संतापों का हरण करते हैं और उनके जीवन में आने वाले संकटों को दूर करते हैं।
"माता लक्ष्मी संग विराजे विष्णु भगवान, दोनों की कृपा से मिलता सकल जहान।"
भावार्थ: जहाँ भगवान विष्णु पालनहार हैं, वहीं माता लक्ष्मी धन और वैभव की दात्री हैं। इन दोनों की संयुक्त कृपा से ही मनुष्य को इस संसार में सभी प्रकार के सुख और वैभव की प्राप्ति होती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
भगवान सत्यनारायण की उपासना के समय निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
"सत्यं व्रतंसत्यपरं त्रिसत्यंसत्यस्य योनिं निहितंच सत्ये।
सत्यस्य सत्यमृतसत्यनेत्रंसत्यात्मकंतं शरणं प्रपन्नाः।।"
इस श्लोक का अर्थ है कि हम उन भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं जो सत्य व्रत वाले, सत्य के पारायण, त्रिकाल सत्य, सत्य के उद्गम और सत्य में ही स्थित हैं। इसके अतिरिक्त आप माता लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जाप करके भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | श्री सत्यनारायण नारायण नारायण (Satyanarayan Narayan Narayan) |
| गायक | पद्म श्री हरिहरन (Hariharan) |
| आराध्य देव | भगवान श्री सत्यनारायण एवं माता लक्ष्मी |
| भाषा | हिंदी / ब्रज मिश्रित |
| संगीत शैली | भक्ति गीत / भजन / धुन |
| उपयुक्त अवसर | सत्यनारायण व्रत, पूर्णिमा, दैनिक पूजा, सत्संग |
| मुख्य संदेश | सत्य का पालन, नाम स्मरण और मोक्ष प्राप्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
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स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- स्कंद पुराण - रेवा खंड (सत्यनारायण व्रत कथा संदर्भ)
- पारंपरिक भारतीय भजन संकलन एवं शास्त्रीय संगीत परंपरा
- श्री हरिहरन जी द्वारा प्रस्तुत भक्ति संगीत संग्रह
- सनातन धर्म के पौराणिक ग्रंथ एवं विष्णु स्तुति साहित्य
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