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श्री विष्णु अमृतवाणी (Shree Vishnu Amritvani Lyrics in Hindi) - Vishnu Amritvani

भजन "श्री विष्णु अमृतवाणी (Shree Vishnu Amritvani Lyrics in Hindi) - Vishnu Amritvani" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। श्री विष्णु अमृतवाणी भजन विष्णु की परमेश्वरीय महिमा और उनकी सर्वव्यापी शक्ति का गुणगान करत

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्री विष्णु अमृतवाण�
आदि देव परमेश्वर तुम

ब्रह्मांड के निर्माता हो
सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्वव्याप�
तुम्हारे चरणों में शरण हूँ मैं
त्रिलोकी के पालनहार

देवताओं के देव महान
अनंत कल्याण के भंडार
हे विष्णु! सुनो मेरी प्रार्थना
मोह माया के बंधन से

मुक्त करो प्रभु मुझे
सत्य धर्म का मार्ग दिखा�
अंधकार से प्रकाश की ओर ले जा�
आपके दिव्य स्वरूप का ध्यान करूँ

आपके नाम का जप करूँ
आपकी भक्ति में मन लगाऊँ
जन्म-मरण से मुक्त हो जाऊँ
सुदर्शन चक्र धार�

पद्मासन पर विराजमान
चतुर्भुज रूप अलौकिक
हे नारायण! तुम अमर अविनाशी हो
लक्ष्मी देवी के पति

कमल नयन वाले प्रभु
शंख और गदा के धारक
तुम्हारा नाम अमृत है
दस अवतार ने दिखलाई

ईश्वर की महिमा भरपूर
राम कृष्ण का रूप धारण
दुष्टों का संहार किया
हे विष्णु! हे नारायण!

हे माधव! हे गोविंद!
तुम्हारी कृपा से मिले मोक्ष
तुम्हारी भक्ति से मिले आनंद
आदि अनंत अव्यय

ब्रह्मा, विष्णु, महेश
त्रिमूर्ति के मध्य विष्णु
पालनकर्ता सर्वदा
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

श्री विष्णु अमृतवाण�
आपको नमन करता हूँ
आपकी शरण में हूँ सदा
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ श्री विष्णु अमृतवाणी भजन विष्णु की परमेश्वरीय महिमा और उनकी सर्वव्यापी शक्ति का गुणगान करता है। 'अमृतवाणी' शब्द का अर्थ है अमर और कल्याणकारी वाणी, जो विष्णु के दिव्य नामों और गुणों को व्यक्त करती है। भजन में विष्णु को ब्रह्मांड के निर्माता, त्रिलोकी के पालनहार और सर्वशक्तिमान के रूप में वर्णित किया गया है। यह भजन भक्त को मोह माया के बंधन से मुक्ति पाने और सत्य धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। विष्णु के दिव्य स्वरूप, उनके चार भुजाओं में सुदर्शन चक्र, शंख और गदा धारण करने का वर्णन भजन में किया गया है। यह भजन भक्त के मन में विष्णु के प्रति समर्पण और आत्मसमर्पण की भावना जागृत करता है।
इस भजन का भावार्थ भक्ति के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचना है जहाँ भक्त और भगवान एक हो जाते हैं। 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए भक्त अपने अहंकार को समर्पित करता है और विष्णु की शरण में जाता है। भजन में भक्त की आंतरिक पीड़ा और मुक्ति की अभिलाषा स्पष्ट दिखाई देती है - अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की इच्छा, जन्म-मरण के चक्र से बाहर निकलने की कामना। विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख करते हुए भजन यह संदेश देता है कि ईश्वर सदा अपनी सृष्टि की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। भक्त का मन प्रतिपल विष्णु के नाम, रूप और लीला का ध्यान करता है, जिससे उसका हृदय विष्णु-भक्ति से पूरित हो जाता है।
श्री विष्णु अमृतवाणी का दार्शनिक सार यह है कि विष्णु ब्रह्मांड के सर्वोपरि सत्य हैं जो समस्त अस्तित्व को धारण और पालन करते हैं। वेदांत के अद्वैत दर्शन के अनुसार, विष्णु ही ब्रह्म हैं और सभी जीव उनका अंश हैं। भक्ति मार्ग के अनुसार, विष्णु की भक्ति ही मुक्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन है। इस भजन में भक्ति की तीन मुख्य प्रणालियाँ दिखाई देती हैं - ध्यान, जप और प्रपत्ति (आत्मसमर्पण)। विष्णु की महिमा को समझकर, उनके नामों का जाप करके और उनकी सेवा में अपने मन को लगाकर भक्त आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर होता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ श्री विष्णु अमृतवाणी की महत्ता हिंदू धर्मशास्त्र और पुराणों में गहराई से निहित है। विष्णु सहस्रनाम, जो महाभारत का एक प्रसिद्ध खंड है, विष्णु के हजार नामों का उल्लेख करता है जो उनकी अनंत शक्तियों और गुणों को प्रकट करते हैं। विष्णु पुराण में विष्णु के दस अवतारों - मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का विस्तृत वर्णन है। रामायण और महाभारत में विष्णु के राम और कृष्ण अवतारों की लीलाओं का वर्णन मिलता है जो धर्म और नैतिकता की स्थापना करते हैं। वैष्णव परंपरा में यह माना जाता है कि विष्णु की भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। श्री विष्णु अमृतवाणी का जाप और ध्यान अनेक आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है। मानसिक स्तर पर, यह भजन चिंता, भय और नकारात्मकता को दूर करता है और मन को शांति प्रदान करता है। शारीरिक स्तर पर, नियमित जाप से श्वसन और हृदय गति नियंत्रित होती है। आध्यात्मिक स्तर पर, विष्णु के नामों का जाप कर्म को शुद्ध करता है, भक्ति को गहरा करता है और आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि श्री विष्णु अमृतवाणी का जाप प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में सर्वोत्तम है। आसन सिद्धासन या पद्मासन में बैठकर, दीप प्रज्ज्वलित करके, पवित्र जल से अपने को शुद्ध करके यह भजन गाया जाए। मन को विष्णु के दिव्य स्वरूप पर एकाग्र करते हुए, श्रद्धा और भक्ति के साथ जाप करना चाहिए। संध्या काल में भी इसका जाप लाभकारी है। 108 बार 'नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) श्री विष्णु अमृतवाणी में 'अमृतवाणी' शब्द का क्या अर्थ है?'अमृतवाणी' का अर्थ है अमर और जीवन रक्षक वाणी। यह विष्णु के दिव्य नामों और गुणों को व्यक्त करती है जो भक्त को आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति का मार्ग दिखाती हैं। इसे पीने से भक्त की आत्मा अमर हो जाती है।
विष्णु के दस अवतार कौन-कौन से हैं और इनका महत्व क्या है?विष्णु के दस अवतार हैं - मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि। प्रत्येक अवतार में विष्णु दुष्टों का संहार करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। ये अवतार मनुष्यता को विभिन्न आध्यात्मिक और नैतिक पाठ सिखाते हैं।

क्या विष्णु की भक्ति से सभी प्रकार के दुःखों से मुक्ति मिल सकती है?हाँ, विष्णु की सच्ची भक्ति से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति, मोह माया के बंधन से मुक्ति और सभी प्रकार के दुःखों से छुटकारा मिलता है। भागवत गीता में कहा गया है कि जो व्यक्ति विष्णु को पूरी निष्ठा से पूजता है, वह मुक्ति प्राप्त करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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