Papmochani Ekadashi Vrat Katha मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी (Ran Chali Re Bhawani Lyrics in Hindi) - Chhappan Indori Navratra Special

लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी भजन माँ भवानी की महिमा और शक्ति का अति प्रेरणादायक पाठ है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ भवानी का दिव्य रण पर्व

भक्ति भाव से गाएँ, माँ भवानी का यह भजन आपकी सारी इच्छाएँ पूर्ण करेगा।

लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी ध्याऊँ तो मैय्या ने ध्याऊँ, और न ध्याऊँ कोय। सौ दुश्मन में चला जाऊ, तो मेरा बाल न बांका होय।। कर के अखियाँ लाल माँ निकल रण में ज्वाला धधक रही है माँ तेरे नैनन में तो कहते है लप लप लप लप लप लप अरे लप लप जीभ निकली रण चली भवानी लप लप जीभ निकली रण चली भवानी चली रे भवानी रण चली रे भवानी ×2 नी माँ मुण्डल माला धारी हो रण चली रे भवानी लप लप जीभ निकली रण चली भवानी माथे पे मुकुट कान में बाली..2 नी माँ मुंडुल मालाधारी रण चली रे भवानी लप लप जीब निकली रण चली रे भवानी.. दानव मारन चली रे भवानी..2 लेकर फरसाधारी रण चली रे भवानी लप लप जीब निकली रण चली रे भवानी.. बड़ी बड़ी मैया ने आँखे निकाली..2 प्यारी प्यारी मैया ने आँखे निकाली आज भई मतवाली रण चली रे भवानी लप लप जीब निकली रण चली रे भवानी.. लाल तुमारा अर्जी लगाये चरणों मे तेरे शीश झुकाए माँ रक्षा करो हमारी रण चली रे भवानी लप लप जीब निकली रण चली रे भवानी
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ भवानी की महिमा का बखान किया गया है। 'लप लप जीभ निकाली रण चली भवानी' का अर्थ है कि माँ भवानी अपनी शक्ति और तेज़ी के साथ युद्ध के लिए निकल रही हैं। भजन में 'ध्यान करूँ तो मैय्या ने ध्यान करूँ' जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि श्रद्धालु माँ का ध्यान करने से सभी संकटों से सुरक्षित रह सकता है। सौ दुश्मनों की बीच में जाने का आत्मविश्वास मनुष्य को हासिल होता है जब वह देवी की शरण में होता है। इनके नेत्रों में ज्वाला धधक रही है, जो माँ के असीम आत्म बल और क्रोधित स्वरूप को दर्शाता है। देवी का यह स्वरूप हमें प्रेरित करता है कि हमें अपनी बाधाओं का सामना धैर्य और विश्वास के साथ करना चाहिए।

भजन की भावार्थ में यह भी कहा गया है कि माँ भवानी की शक्ति अद्वितीय है। 'बड़ी बड़ी मैया ने आँखें निकाली' में माँ भवानी की प्रखरता और उनकी दृष्टि की महिमा दर्शाई गई है। माँ का 'मुण्डल माला धारी' स्वरूप न केवल सौंदर्य, बल्कि शक्ति का प्रतीक भी है। यह भक्तों को यकीन दिलाता है कि माँ का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है। 'लाल तुमारा अर्जी लगाये, चरणों में तेरे शीश झुकाए' जैसे भाव माँ की कृपा पाने के लिए प्रार्थना का आदान-प्रदान करते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमारी श्रद्धा और भक्ति से माँ का आशीर्वाद हमारे जीवन को सुरक्षित और सफलता से भर सकती है।

यह भजन भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का एक आदर्श उदाहरण है जहाँ श्रद्धालु अपने हृदय से भगवान से जुड़ता है। देवी की शक्ति और मां की मार्मिकता का एकत्रित दर्शन भक्तों को संबोधित करता है। भक्ति में यह विश्वास होता है कि सिद्धियाँ केवल श्रम से नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों के मार्गदर्शन से भी प्राप्त होती हैं, और माँ भवानी की शक्ति से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। इस भजन में, माँ भवानी के निमंत्रण का भाव भक्तों को प्रेरित करता है कि वे जीवन की कठिनाइयों से लड़ने के लिए तैयार रहें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हमारे शास्त्रों और पुराणों में छिपा है। देवी दुर्गा या भवानी के स्वरूप को रक्षात्मक और विनाशात्मक शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। इन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में पूजा जाता है। देवी भागवत पुराण में माँ भगवती के शक्तिशाली रूपों का वर्णन किया गया है। यह भजन नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों पर विशेष महत्व रखता है, जब भक्त माँ की आराधना करके अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रयास करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन के जाप से मानसिक तनाव में कमी आती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह भक्ति भाव से मन को स्थिर करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। देवी की आराधना से भक्त अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का अनुभव करते हैं। आत्मिक विकास और आत्म-साक्षात्कार की ओर भी यह भजन मार्ग प्रशस्त करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह सूर्योदय के समय और रात को देवी की पूजा के समय करना उपयुक्त होता है। श्रद्धालु को चाहिए कि पूजा के स्थान को स्वच्छ बनाए, दीप जलाए और देवी को फूलों और मिठाईयों का भोग अर्पित करें। सही मुद्रा में बैठकर मन को एकाग्र करके भजन का जाप करें, जिससे संकल्प का ध्यान माता पर केंद्रित रहे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लप लप जीभ निकाली का क्या अर्थ है?

यह वाक्यांश माँ भवानी की शक्ति और उनके युद्ध में जाने की तत्परता को व्यक्त करता है। जब वह रण में निकलती हैं, तब उनके साथ बुरी शक्तियाँ भी बिखेर जाती हैं।

क्या इस भजन का पाठ करना अनिवार्य है?

भजन का पाठ अनिवार्य नहीं है, लेकिन भक्त इसे श्रद्धा और भक्ति से गाकर माँ भवानी से कृपा और सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

क्या नवरात्रि में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है?

जी हाँ, नवरात्रि में माँ दुर्गा की आराधना का समय होता है और यह भजन भक्तों में उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Sep 2026

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