Durga Bhajan Lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

अंबे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics in Hindi) - Ambe Maa Aarti Durga Aarti

अंबे तू है जगदम्बे काली आरती हिंदी लिरिक्स, अर्थ एवं महिमा पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण दुर्गा भजन पाठ।

दुर्गा आरती एवं भजन

Ambe Maa Aarti Durga Aarti - Bhaktilok

अपडेटेड: अक्टूबर 2026 श्रेणी: durga bhajan, aarti, stotram पढ़ने का समय: 12 मिनट

सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयुक्त स्वरूप संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार माना गया है। जगत जननी की कृपा, महिमा और उनके करुणामयी रूप का गान करने वाला अत्यंत लोकप्रिय एवं ऊर्जावान भजन "अंबे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)" है। यह पवित्र स्तोत्र और आरती भक्तों के बीच समान रूप से अत्यंत आदरणीय है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतःकरण में अदम्य साहस, संयम, भक्ति और सकारात्मकता का संचार करता है। नवरात्रि के पावन पर्वों, मंदिरों की संध्या आरती, गृह प्रवेश, और दैनिक पूजन अनुष्ठानों में इस आरती का संकीर्तन करने से घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और दैवी ऊर्जा का वास होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर गहराई से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन एवं आरती लिरिक्स | Complete Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics

॥ मुखड़ा ॥

अंबे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।

तेरे गुण गाए संसार, मैया तू ही है मनहारी॥

॥ प्रथम अंतरा ॥

सब पे दया करने वाली, मैया सबकी भारी।

बिन मांगे सब को देती, मैया भरती झोली खाली॥

अंबे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...॥

॥ द्वितीय अंतरा ॥

मां बेटा का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।

पूत कपूत सुने है पर न माता सुनी कुमाता॥

सब पे दया करने वाली...॥

॥ तृतीय अंतरा ॥

सब नर नारी मिल कर गाएं, मां का जयकारा।

धाम तेरे जो कोई आए, पाए जग से छुटकारा॥

अंबे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...॥

॥ चतुर्थ अंतरा ॥

जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर, तूने है आके संभाला।

असुर संहारक रूप तेरा, देख कांपे जग सारा॥

सब पे दया करने वाली...॥

॥ पंचम अंतरा ॥

चरण शरण में तेरी आए, शीश झुकाएं हम सारे।

कृपा दृष्टि रखना मैया, चरण कमल बलिहारी॥

अंबे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे गुण गाए संसार...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि एक भक्त और जगत जननी के बीच के अगाध प्रेम और समर्पण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसके विभिन्न चरणों का दार्शनिक और सरल अर्थ नीचे प्रस्तुत है:

प्रथम पद का भाव

भक्त माता को 'अंबे', 'जगदम्बे' और 'काली' के रूपों में संबोधित करता है जो संपूर्ण जगत का पालन और दुष्टों का संहार करती हैं। माता का खप्पर धारण करने वाला रूप बुराइयों का नाश करने का प्रतीक है। संपूर्ण संसार माता की महिमा का गुणगान करता है क्योंकि वही मनुष्य के मन को शांति और आनंद प्रदान करने वाली (मनहारी) हैं।

द्वितीय पद का भाव

इस पद में ममता और करुणा का अद्वितीय चित्रण है। कहा गया है कि संसार में पुत्र बुरा (कपूत) हो सकता है, परंतु माता कभी कुमाता नहीं होती। वह अपने हर बच्चे की त्रुटियों को क्षमा कर बिना मांगे उसकी सूनी झोली को अपनी असीम कृपा से भर देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Significance

यह भजन सनातन संस्कृति की शक्तिोपासना की रीढ़ माना जाता है। देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, आदिशक्ति की आराधना से मनुष्य को न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग भी प्रशस्त होते हैं। इस आरती का नियमित गान या श्रवण करने से निम्नलिखित आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर और मन में व्याप्त भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है।
  • साहस और तेज की वृद्धि: मां काली और दुर्गा के इस स्मरण से साधक के भीतर आत्मबल और धार्मिक साहस बढ़ता है।
  • पारिवारिक सुख-शांति: संध्या के समय परिवार सहित इस आरती के गायन से घर में सौहार्द और सकारात्मकता बनी रहती है।
  • नवरात्रि अनुष्ठान: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का विशेष रूप से संकीर्तन किया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत में भाव और नियम दोनों का विशेष महत्व होता है। 'अंबे तू है जगदम्बे काली' भजन को गाने और सुनने के लिए कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करना लाभकारी होता है:

उत्तम समय

ब्रह्ममुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे) या संध्या वंदन के समय (सूर्यास्त के पश्चात) दीपक प्रज्वलित कर गाना सर्वाधिक फलदायी है।

पूजन सामग्री

माता के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक, धूप, लाल चंदन, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित कर आरती आरंभ करें।

मानसिक स्थिति

गायन या श्रवण के दौरान मन शांत, एकाग्र और पूरी तरह माता के चरणों में समर्पित होना चाहिए।

कठिन शब्दों के अर्थ | Word Meanings

शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ / भाव
अंबे माता / अंबा जगत की उत्पत्ति करने वाली आदि शक्ति।
खप्पर वाली खप्पर (पात्र) धारण करने वाली दुष्टों का संहार करने वाला रुद्र रूप।
मनहारी मन को हरने वाली / आनंद देने वाली भक्तों के अशांत मन को शांति देने वाली मां।
कुमाता बुरी माता संसार में मां कभी अपने बच्चे के प्रति क्रूर नहीं होती।
असुर संहारक राक्षसों का नाश करने वाली धर्म की रक्षा हेतु अधर्म का नाश करने वाली शक्ति।

एक नजर में भजन की जानकारी | Quick Information

भजन का नाम अंबे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)
समर्पित देवता मां दुर्गा, महाकाली, आदिशक्ति
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित लोकभाषा
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, विनय, और शक्तिोपासना
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार/शुक्रवार की संध्या, दैनिक आरती
संबंधित पावन पाठ श्री दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा, महाकाली और जगत जननी के समस्त स्वरूपों को समर्पित है। इसमें माता के करुणामयी और दुष्टनाशिनी दोनों रूपों का सुंदर वर्णन मिलता है।

इस भजन और आरती को प्रातःकाल पूजा के समय, विशेषकर संध्या आरती के वक्त, और नवरात्रि के नौ दिनों में गाना या सुनना अत्यंत फलदायी और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला माना गया है।

हाँ, घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर प्रतिदिन इस आरती का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है।

इस भजन के निरंतर गायन और श्रवण से साधक के भीतर भय दूर होता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और माता के प्रति अटूट श्रद्धा एवं समर्पण का भाव जागृत होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन परंपरा, शाक्त ग्रंथों और लोक में प्रचलित भजनों की प्रामाणिक परंपरा के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक शब्द, अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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