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आज मंगलवार है महावीर का वार है (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer Ka Vaar Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

67 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


आज मंगलवार है महावीर का वार है (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer Ka Vaar Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

आज मंगलवार है महावीर का वार है (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer Ka Vaar Hai Lyrics in Hindi) - 

आज मंगलवार है महावीर का वार है (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer Ka Vaar Hai Lyrics in Hindi) - 

आज मंगलवार है

महावीर का वार है

ये सच्चा दरबार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

चैत्र सुदी पूनम मंगल का

जनम वीर ने पाया है

जनम वीर ने पाया है

लाल लंगोट गदा हाथ में

सर पर मुकुट सजाया है

सर पर मुकुट सजाया है

शंकर का अवतार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

आज मंगलवार है

महावीर का वार है

ये सच्चा दरबार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

ब्रह्मा जी के ब्रम्ह ज्ञान का

बल भी तुमने पाया है

बल भी तुमने पाया है

राम काज शिव शंकर ने

वानर का रूप धारिया है

वानर का रूप धारिया है

लीला अपरमपार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

आज मंगलवार है

महावीर का वार है

ये सच्चा दरबार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

बालापन में महावीर ने

हरदम ध्यान लगाया है

हरदम ध्यान लगाया है

श्रम दिया ऋषिओं ने तुमको

ब्रम्ह ध्यान लगाया है

ब्रम्ह ध्यान लगाया है

राम रामाधार है

महावीर का वार ह

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

राम जनम हुआ अयोध्या में

कैसा नाच नचाया है

कैसा नाच नचाया है

कहा राम ने लक्ष्मण से ये

वानर मन को भाया है

वानर मन को भाया है

राम चरण से प्यार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्यावे

उसका बेड़ा पार है

पंचवटी से माता को जब

रावण लेकर आया है

रावण लेकर आया है

लंका में जाकर तुमने

माता का पता लगाया है

माता का पता लगाया है

अक्छाय को मार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्याने

उसका बेड़ा पार है

मेघनाथ ने ब्रह्मपास में

तुमको आन फैसला है

तुमको आन फैसला है

ब्रह्मपाश में फास करके

ब्रह्म का मान बड़ा है

ब्रह्म का मान बड़ा है

बजरंगी वाकी मार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्याने

उसका बेड़ा पार है

लंका जलयी आपने

जब रावण भी घबराया है

जब रावण भी घबराया है

श्री राम लखन को अंकुर

माँ का संदेश सुना है

माँ का संदेश सुना है

सीता शोक अपार है

महावीर का वार है

सच्चे मन से जो कोई ध्याने

उसका बेड़ा पार है



सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "आज मंगलवार है महावीर का वार है (Aaj Mangalwar Hai Mahaveer Ka Vaar Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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