Parvati Stotram गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

श्री नृसिंह मंत्र (Shri Narasimha Mantra Lyrics in Hindi)

श्री नृसिंह मंत्र (Shri Narasimha Mantra) पढ़ें हिंदी अर्थ, जाप विधि और लाभ सहित। भगवान नरसिंह के इस शक्तिशाली मंत्र से दूर करें सभी भय और संकट।

श्री नृसिंह मंत्र (Shri Narasimha Mantra) सनातन धर्म में भगवान विष्णु के अत्यंत उग्र, रक्षक और न्यायप्रिय चतुर्थ अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित एक बेहद शक्तिशाली और सिद्ध वैदिक मंत्र है। यह मंत्र न केवल भक्तों की रक्षा करता है, बल्कि उनके जीवन में आने वाले सभी प्रकार के भय, संकट, बाधाओं, शत्रुओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है। कलयुग में भगवान नरसिंह की उपासना को अमोघ और तुरंत फलदायी माना गया है। जब भी भक्त किसी विकट परिस्थिति, संकट या मानसिक अशांति से घिर जाते हैं, तब श्री नृसिंह मंत्र का जाप उन्हें असीम आंतरिक शक्ति, साहस और सुरक्षा प्रदान करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम भगवान नरसिंह के इस पावन मंत्र के शब्दार्थ, उच्चारण विधि, जाप के नियम, शास्त्रीय संदर्भ और उसके आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो सिंहः प्रचोदयात्।

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

मंत्र उच्चारण एवं पद-विच्छेद | Mantra Pronunciation

वैदिक और पौराणिक मंत्रों की ऊर्जा उनके शुद्ध उच्चारण पर निर्भर करती है। 'श्री नृसिंह गायत्री मंत्र' और 'नृसिंह करमाला मंत्र' का सही उच्चारण इस प्रकार है:

  • पद-विच्छेद (गायत्री मंत्र): ॐ नृ-सिंह-आय विद्-महे वज्र-नख-आय धी-महि तत्-नः सिंहः प्र-चोद-यात्।
  • पद-विच्छेद (प्रणाम मंत्र): उग्रम् वीरम् महा-विष्णुम् ज्वलन्तम् सर्वतः-मुखम्। नृसिंहम् भीषणम् भद्रम् मृत्यु-मृत्युम् नमामि-अहम्॥

इन मंत्रों का उच्चारण करते समय प्रत्येक स्वर और व्यंजन पर स्पष्ट बल देना चाहिए ताकि ध्वनि कंपन (Sound Vibration) से सूक्ष्म शरीर और चक्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े। भगवान नरसिंह के विभिन्न मंत्रों के जाप से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप श्री नृसिंह कवच मंत्र का भी पाठ कर सकते हैं, जो सुरक्षा का एक अद्भुत आवरण तैयार करता है।

विस्तृत शब्दार्थ एवं पद-विच्छेद | Word-by-word Meaning

संस्कृत शब्द (Sanskrit Word) पद-विच्छेद सरल Hindi Meaning Contextual Meaning (आध्यात्मिक संदर्भ)
नृसिंहाय नृसिंह + आय नरसिंह भगवान के लिए समस्त दुष्टों का संहारक और भक्तों के रक्षक भगवान नृसिंह को समर्पण
वज्रनखाय वज्र + नख + आय वज्र के समान तीखे नखों वाले जो अज्ञान और अधर्म के पर्वतों को भेदने में समर्थ हैं
उग्रम् वीरम् उग्रम् + वीरम् अत्यंत प्रखर और पराक्रमी अधर्म के नाश के लिए क्रोधित और वीरता के प्रतीक
ज्वलन्तम् ज्वलन्तम् प्रज्वलित या अग्नि के समान तेजोमय दिव्य प्रकाश और ज्ञान से जगमगाने वाले
मृत्युमृत्युम् मृत्यु + मृत्युम् मृत्यु के भी मृत्यु (नाशक) भक्तों को भवसागर और मृत्यु के भय से मुक्त करने वाले

सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Hindi Meaning & Bhavarth

श्री नृसिंह मंत्र का सरल हिंदी अर्थ साधक के हृदय में भगवान की महानता और उनकी शरण में जाने के भाव को जागृत करता है। भगवान नरसिंह का रूप यद्यपि अत्यंत भयानक और उग्र प्रतीत होता है, परंतु वह अपने सच्चे भक्तों के लिए अत्यंत कोमल, वत्सल और रक्षक हैं। जैसे उन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभे को चीरकर अवतार लिया था, ठीक वैसे ही यह मंत्र साधक के जीवन के समस्त संकट रूपी खंभों और बाधाओं को चीरकर प्रकाश का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस मंत्र के माध्यम से साधक यह प्रार्थना करता है कि हे वज्रनखधारी महाविष्णु! आप हमारे भीतर की समस्त बुराइयों, अज्ञान, भय और शत्रुओं का नाश करें। जिस प्रकार आपने हिरण्यकशिपु का वध कर धर्म की स्थापना की थी, उसी प्रकार हमारे जीवन में धर्म, शांति और संयम की स्थापना कीजिए। इस मंत्र का नियमित स्मरण करने से व्यक्ति के भीतर किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता और वह जीवन की हर चुनौती का सामना डटकर करने में सक्षम होता है। संध्याकाल या संकट के समय इस मंत्र का स्मरण अत्यंत चमत्कारी परिणाम देता है। भगवान विष्णु के अन्य रूपों की कृपा प्राप्त करने के लिए आप ओम जय जगदीश आरती का भी नित्य गायन कर सकते हैं।

मंत्र का भाव एवं आध्यात्मिक संदेश | Spiritual Message

नरसिंह अवतार का मूल संदेश यह है कि जब-जब अधर्म, अहंकार और अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचते हैं, तब-तब परमात्मा किसी न किसी रूप में अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। भौतिक जगत में मनुष्य अक्सर भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है। श्री नृसिंह मंत्र साधक को यह संदेश देता है कि ईश्वर हर जगह व्याप्त हैं (कण-कण में भगवान)। आवश्यकता केवल प्रह्लाद जैसी अटल श्रद्धा और विश्वास की है। जब आपकी भक्ति सच्ची होती है, तो भगवान हर बाधा को पार करा देते हैं। यह मंत्र व्यक्ति के अहंकार का दमन कर उसे विनम्रता और ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति का मार्ग दिखाता है।

शास्त्रीय संदर्भ, ऋषि, छंद एवं देवता | Scriptural Origin

श्री नृसिंह मंत्र का उल्लेख विभिन्न पुराणों जैसे 'श्री नृसिंह पुराण', 'विष्णु पुराण', तथा विभिन्न तांत्रिक एवं वैदिक ग्रंथों में मिलता है।

  • देवता: भगवान श्री नरसिंह (भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार)
  • ऋषि: विश्वामित्र अथवा विभिन्न वैदिक ऋषि (परंपरागत रूप से पूजित)
  • छंद: गायत्री एवं अनुष्टुप छंद
  • प्रमुख स्रोत: नृसिंह तापनीय उपनिषद एवं पौराणिक स्तोत्र संग्रह

श्रीमद्भागवत महापुराण में भी प्रह्लाद द्वारा की गई नरसिंह स्तुति का अत्यंत सुंदर और भवपूर्ण वर्णन मिलता है, जो साधकों को भक्ति का मार्ग दिखाता है। इस प्रकार की अन्य पौराणिक कथाओं के लिए आप पार्वती स्तोत्रम् का भी अध्ययन कर सकते हैं।

मंत्र जप विधि, नियम एवं शुभ मुहूर्त | Chanting Method, Rules & Vidhi

किसी भी मंत्र की सिद्धि और पूर्ण फल प्राप्ति के लिए उसकी विधि और नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:

  • शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे) अथवा प्रदोष काल (संध्या के समय) नरसिंह मंत्र के जप के लिए सर्वोत्तम माने गए हैं।
  • माला: तुलसी की माला या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • संख्या: न्यूनतम 108 बार (एक माला) या अपनी श्रद्धा अनुसार 3, 5 या 11 माला का जाप करें।
  • नियम: जप के समय शुद्ध आसन (कुशा या ऊनी आसन) पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मन को शांत रखें और सात्विक आहार का पालन करें।

मंत्र का दार्शनिक एवं आध्यात्मिक महत्व | Philosophical Significance

वेदांत दर्शन और भक्ति मार्ग में भगवान नरसिंह का रूप जीव के भीतर छिपे अज्ञान और अहंकार के विनाश का प्रतीक है। सिंह और मनुष्य का यह मिला-जुला रूप (नृ + सिंह) यह दर्शाता है कि परमात्मा प्रकृति और जीव दोनों में एकरूप हैं। जब साधक इस मंत्र का जाप करता है, तो उसके भीतर का 'हिरण्यकशिपु' यानी अहंकार, वासना और द्वेष समाप्त होने लगता है और 'प्रह्लाद' यानी निर्मल भक्ति और ज्ञान का उदय होता है। यह मंत्र आंतरिक शुद्धि और आत्मसाक्षात्कार का एक शक्तिशाली माध्यम है।

मंत्र के आध्यात्मिक लाभ | Spiritual Benefits

  • अज्ञात भय, मानसिक तनाव, चिंता और फोबिया से मुक्ति मिलती है।
  • शत्रुओं, विरोधियों और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • साधक के भीतर असीम साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम का संचार होता है।
  • कुंडलिनी शक्ति के जागरण और चक्र शुद्धि में सहायक माना गया है।
  • घर और परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।

मंत्र का दैनिक जीवन में महत्व | Daily Life Relevance

आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जीवनशैली में व्यक्ति को कदम-कदम पर अनिश्चितता और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। पेशेवर जीवन की प्रतिस्पर्धा और पारिवारिक उत्तरदायित्वों के बीच मानसिक शांति बनाए रखना कठिन हो जाता है। ऐसे में प्रतिदिन सुबह या रात को सोने से पहले श्री नृसिंह मंत्र का 11 बार स्मरण करने से मन शांत होता है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और किसी भी प्रकार की घबराहट दूर होती है। यह आधुनिक युग के तनाव से निपटने के लिए एक आध्यात्मिक औषधि के समान कार्य करता है।

Quick Information Table

विवरण (Attribute) विवरण विवरण (Detail)
मंत्र का नाम श्री नृसिंह मंत्र (Shri Narasimha Mantra)
अधिष्ठाता देवता भगवान श्री नरसिंह (विष्णु अवतार)
मुख्य उद्देश्य भयनाश, शत्रुपराजय, रक्षा और मानसिक शक्ति
अनुशंसित जाप संख्या 108 बार (प्रतिदिन कम से कम एक माला)
उपयुक्त माला तुलसी या रुद्राक्ष माला
श्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रदोष काल
प्रमुख स्रोत नृसिंह पुराण एवं उपनिषद

मुख्य आध्यात्मिक संदेश | Key Takeaways

  • भगवान नरसिंह अपने भक्तों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में प्रकट होते हैं।
  • शुद्ध उच्चारण और सच्ची श्रद्धा के साथ किया गया मंत्र जाप कभी निष्फल नहीं होता।
  • यह मंत्र भय और नकारात्मकता को दूर कर साधक को निर्भय बनाता है।
  • नियमित साधना से आंतरिक ऊर्जा और आत्मबल में वृद्धि होती है।
  • अहंकार का त्याग कर ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही सच्ची भक्ति है।

संबंधित मंत्र, श्लोक, स्तोत्र एवं प्रार्थनाएं

भगवान नरसिंह और विष्णु की आराधना को पूर्ण करने के लिए आप निम्नलिखित पावन पाठों का भी अध्ययन कर सकते हैं:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

श्री नृसिंह मंत्र का जाप करने से समस्त प्रकार के भय, शत्रु बाधा, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह साधक को असीम साहस, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

इस मंत्र का जाप प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में (4 से 6 बजे के बीच) अथवा संध्याकाल (प्रदोष काल) में करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

हाँ, कोई भी श्रद्धालु व्यक्ति शुद्धता, पवित्रता और सच्चे भक्ति भाव के साथ इस मंत्र का नियमित जाप कर सकता है।

भगवान नरसिंह विष्णु के अवतार हैं, इसलिए तुलसी की माला अथवा रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जाप करना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

कम से कम 108 बार (एक माला) इस मंत्र का प्रतिदिन जाप करना चाहिए। यदि समय कम हो तो 28 या 54 बार भी जाप कर सकते हैं।

हाँ, भगवान नरसिंह भय और दुःस्वप्नों के निवारक माने जाते हैं। सोने से पहले इस मंत्र का स्मरण करने से मन शांत रहता है और बुरे सपनों से मुक्ति मिलती है।

निसंदेह, भक्ति और मंत्र जाप पर सबका समान अधिकार है। महिलाएँ भी पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ इस मंत्र का पाठ कर सकती हैं।

उच्चारण की शुद्धता, शारीरिक एवं मानसिक स्वच्छता, सात्विक आचरण और भगवान के प्रति अटूट विश्वास इस मंत्र के जाप के मुख्य नियम हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन परंपरा, पौराणिक ग्रंथों और वैदिक साहित्यों में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को श्री नृसिंह मंत्र के शुद्ध पाठ, अर्थ, विधि और आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराना है ताकि वे अपनी साधना को और अधिक प्रभावी बना सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (प्रह्लाद स्तुति प्रसंग)
  • नृसिंह पुराण एवं उपनिषद ग्रंथ
  • सनातन वैदिक मंत्र संग्रह एवं परंपराएं

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

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