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करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं - माँ संतोषी भजन (Karti Hu Tumhara Vrat Main Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

112 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ संतोषी की कृपा से दु:खों का निवारण

इस भजन के माध्यम से माँ संतोषी से आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करें।

करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो माँ मझधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ बेडा पार करो माँ हे माँ संतोषी माँ संतोषी ॥ बैठी हूँ बड़ी आशा से तुम्हारे दरबार में क्यों रोये तुम्हारी बेटी इस निर्दयी संसार में पलटा दो मेरी भी किस्मत पलटा दो मेरी भी किस्मत चमत्कार करो माँ ॥ मझधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ बेडा पार करो माँ हे माँ संतोषी माँ संतोषी ॥ मेरे लिए तो बंद है दुनिया की सब राहें कल्याण मेरा हो सकता है माँ आप जो चाहें चिंता की आग से मेरा चिंता की आग से मेरा उद्धार करो माँ ॥ मझधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ बेडा पार करो माँ हे माँ संतोषी माँ संतोषी ॥ दुर्बाग्य की दीवार को तुम आज हटा दो मातेश्वरी वापिस मेरे सौभाग्य को ला दो इस अभागिनी नारी से इस अभागिनी नारी से कुछ प्यार करो माँ ॥ मझधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ बेडा पार करो माँ हे माँ संतोषी माँ संतोषी ॥ करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो माँ मझधार में मैं अटकी बेडा पार करो माँ बेडा पार करो माँ हे माँ संतोषी माँ संतोषी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'करती हूँ तुम्हारा व्रत मैं' माँ संतोषी की आराधना और उनकी कृपा की याचना करता है। इसमें भक्त अपनी कठिनाइयों और बाधाओं के बारे में माँ से प्रार्थना करते हुए अनुरोध करते हैं कि वह उन्हें संकट से मुक्त करें। भजन की शुरुआत में, भक्त कहता है 'मझधार में मैं अटकी', जो दर्शाता है कि वह जीवन की समस्याओं में उलझा हुआ है और उसे माँ की मदद की आवश्यकता है। 'बेडा पार करो माँ' की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि भक्त को माँ पर अपार विश्वास है कि वे उसे सुरक्षित पार कराएंगी। यह श्लोक जीवन के संघर्षों में संतोष व आस्था की महत्ता को उजागर करता है।

प्रभु की आराधना में भावनाएँ गहरी होती हैं, भजन में भक्त की पीड़ा और माँ से अपेक्षित कृपा का संकेत मिलता है। 'क्यों रोये तुम्हारी बेटी' से भक्त अपनी निर्बलता और इस निर्दयी संसार की कठोरताएँ बताएँता है। यह एक प्रकार का विनम्र निवेदन है, जहाँ भक्त माँ से अपना दुख साझा करते हैं। आगे 'चिंता की आग से मेरा उद्धार करो' कहते हुए वो माँ से मनोबल प्राप्त करने की प्रार्थना करता है, जो दार्शनिक रूप से जीवन में आस्था का परिचायक है। संक्षेप में, यह भजन भावनात्मक राहत और आशीर्वाद की खोज का प्रतीक है।

धार्मिक दृष्टिकोण से यह भजन भक्ति मार्ग के एक पहलू को प्रस्तुत करता है, जहाँ भक्त संतोषी माँ को अपने जीवन की कठिनाइयों के साक्षी के रूप में देखता है। माँ संतोषी का स्वरूप संतोष, सुख और शांति का प्रतीक है। यह भजन समर्पण और आस्था में दृढ़ रहने का महत्त्व सिखाता है। भक्त अपनी समस्याओं को माँ के सामने रखते हुए यह संदेश भेजता है कि जब जीवन सभी दिशाओं में बंद हो जाता है, तब भी ईश्वर की कृपा प्राप्त होने की संभावना हमेशा रहती है। यह भजन जीवन की अनिश्चितताओं में एक सकारात्मक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन माँ संतोषी की उपासना में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देवी संतोषी का गुण सदैव संतोष और समर्पण को बढ़ावा देना है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जो व्यक्ति भक्ति और श्रद्धा से माँ संतोषी की पूजा करता है, उसे समस्त बाधाएँ दूर होती हैं। विशेषकर यह पूजा शुक्रवार को की जाती है, जो कि देवी संतोषी का दिन माना जाता है। उपासक जब इस भजन का जाप करते हैं, तो वे सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने या जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है, और एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्तों का विश्वास है कि इससे माँ संतोषी की कृपा से समस्त दु:ख समाप्त होते हैं, और जीवन में सुख, शांति और संतोष की पूर्ति होती है। नियमित इस भजन का जाप करने से मन की शांति और आत्मा में संतोष का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के जाप का सबसे उचित समय शुभ दिन जैसे शुक्रवार को प्रात: काल या संध्या समय है। पूजा के दौरान एक दीप जलाना तथा माँ को फूल और मिठाई का भोग अर्पित करना उत्तम रहता है। भक्त को ध्यान लगाकर, मन को एकाग्र करके भजन का जाप करना चाहिए, जिससे आस्था में बढ़ोतरी हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

माँ संतोषी की उपासना कैसे करें?

माँ संतोषी की उपासना विशेषकर शुक्रवार के दिन करें, जहां एक हल्की पूजा और भजन का जाप करना चाहिए। साथ ही माँ को गुड़ और चना का भोग अर्पित करना चाहिए।

क्या इस भजन का जाप करने से तुरंत फल मिलते हैं?

इस भजन का सतत जाप करने से धीरे-धीरे संतोषी माँ की कृपा से जीवन में सुधार और सुख की प्राप्ति होती है। हालांकि, भक्त को धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।

क्या इस भजन को परिवार के सभी सदस्य मिलकर गा सकते हैं?

जी हाँ, यह भजन परिवार के सभी सदस्यों के साथ मिलकर गाना अत्यंत शुभ है, इससे एकता और शांति का अनुभव होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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