Holi Bhajan

भर दे रे श्याम झोली भर दे लिरिक्स (Bhar De Re Shyam Jholi bhar De Lyrics in hindi)

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"भर दे रे श्याम झोली भर दे" (Bhar De Re Shyam Jholi Bhar De) कलयुग के साक्षात् अवतारी भगवान श्री खाटू श्याम जी को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन अनन्य भक्ति, पूर्ण आत्मसमर्पण और आर्त भाव (विनय, करुणा और प्रेम) की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है। खाटू नरेश, जिन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है, के चरणों में अपनी झोली फैलाने का यह भाव प्रत्येक भक्त के हृदय को झंकृत कर देता है। इस भजन का गायन विशेष रूप से फाल्गुन मास के सुप्रसिद्ध खाटू श्याम मेले, होली उत्सव, मासिक एकादशी (ग्यारस) और दैनिक सत्संगों में किया जाता है। इस दिव्य गीत में भक्त और भगवान के बीच का वह मधुर संवाद है, जहाँ भक्त अपने अधिकार और निश्छल प्रेम से अपने आराध्य को रिझाता है और उनसे अपनी झोली भरने की मनुहार करता है। यह केवल भौतिक वस्तुओं की याचना नहीं, अपितु भक्ति, ज्ञान और मोक्ष रूपी परम धन की प्राप्ति का आध्यात्मिक निवेदन है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भर दे रे श्याम झोली भर दे लिरिक्स

(स्थायी)
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...

(अंतरा - 1)
दिन बीते बीती रातें, अपनी कितनी हुई रे मुलाक़ातें।
तुझे जाना पहचाना, तेरे झूठे हुए रे सारे वादे।
भूले रे श्याम तुम तो भूले, भूले क्या रखा है वादों में...
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...

(अंतरा - 2)
दान है अनजान है, गुरु तू ही तो मेरा भगवान है।
तुझे चाहूँ तुझे पाऊँ, मेरे दिल का यही तो अरमान है।
पढ़ ले रे श्याम दिल की पढ़ ले, सब लिखा है आँखों में...
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...

(अंतरा - 3)
मेरी नैया ओ कन्हैया, पार कर दे तू बनके खिवैया।
मैं तो हारा गम का मारा, आजा आजा ओ बंसी बजैया।
ले ले रे श्याम अब तो ले ले, मेरे हाथ हाथों में...
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...

(अंतरा - 4)
तू है मेरा मैं हूँ तेरा, मैंने डाला तेरे दर पे डेरा।
मुझे आस है विश्वास है, श्याम भर देगा दामन तू मेरा।
झूमे रे श्याम नंदू झूमे, झूमे तेरी ही बाहों में...
भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अत्यंत घनिष्ठ और अनौपचारिक संबंध को दर्शाता है। यहाँ भक्त अपने आराध्य श्री खाटू श्याम जी से किसी औपचारिक याचक की तरह नहीं, बल्कि एक परम स्नेही और अधिकार रखने वाले प्रियजन की तरह बात कर रहा है।

समर्पण और अधिकार का भाव: भजन की शुरुआत में ही भक्त कहता है कि "हे श्याम! अब मेरी खाली झोली को अपनी कृपा से भर दो। मुझे अपनी मीठी-मीठी बातों में मत बहलाओ।" यह इस बात का प्रतीक है कि भक्त अब केवल सांत्वना से संतुष्ट होने वाला नहीं है, उसे अपने प्रभु की साक्षात् कृपा और दर्शन चाहिए।

उलाहना और प्रेम: भक्त भगवान को उलाहना देते हुए कहता है कि हमारे बीच न जाने कितनी मुलाक़ातें हो चुकी हैं, कितने दिन और रातें बीत चुकी हैं। मैंने तुम्हें अच्छी तरह जान और पहचान लिया है। तुम जो वादे करते हो, वे अब तक पूरे नहीं हुए। लेकिन इस उलाहने में कोई क्रोध नहीं है, बल्कि इसमें केवल और केवल निश्छल प्रेम और समर्पण है। भक्त जानता है कि उसका उद्धार केवल श्याम सुंदर के हाथों ही संभव है।

शरणगति का संदेश: भजन के अंतिम चरणों में भक्त स्वयं को पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है। वह कहता है कि "मैं तो हार चुका हूँ और दुखों से घिरा हुआ हूँ। अब तुम ही मेरी जीवन रूपी नैया के खिवैया (नाविक) बनो और मेरा हाथ थाम लो।" यह "शरणगति" का वह सर्वोच्च शिखर है जहाँ जीव अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से परमात्मा की शरण में आ जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह श्रीमद्भगवद्गीता के शरणागति योग का व्यावहारिक रूप है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आर्त और सख्य भाव का मिश्रण: इस भजन में भक्त का भगवान के प्रति सख्य भाव (मित्रता का भाव) और आर्त भाव (संकट में पुकारने का भाव) दोनों एक साथ देखने को मिलते हैं। भक्त अपने श्याम से लड़ता भी है और अंत में उन्हीं के चरणों में गिर भी जाता है।
  • कलयुग के देव की महिमा: भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलयुग में वे उनके "श्याम" नाम से पूजे जाएंगे। यह भजन उसी महादानी श्याम की महिमा का गुणगान करता है।
  • मानसिक शांति का प्रदाता: इस भजन का सस्वर पाठ करने से भक्त के भीतर का तनाव, भय और निराशा दूर होती है। यह विश्वास दिलाता है कि जब तक श्याम हमारे साथ हैं, तब तक कोई हमारा अहित नहीं कर सकता।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान की भक्ति के लिए कोई समय निश्चित नहीं होता, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • एकादशी (ग्यारस) व्रत के दिन: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन संध्या काल में श्याम बाबा के दरबार या घर के मंदिर में ज्योत जलाकर इस भजन को गाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • फाल्गुन मेला और होली उत्सव: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्याम बाबा का मुख्य उत्सव होता है। इस दौरान सामूहिक संकीर्तन में इस भजन का गायन भक्तों को भाव-विभोर कर देता है।
  • दैनिक संध्या आरती: घर में संध्या काल की पूजा के बाद इस भजन को शांत मन से सुनने या गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा और परम दानी बर्बरीक (भगवान श्री खाटू श्याम जी) को समर्पित है। बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे, जिसके कारण उन्हें "हारे का सहारा" कहा गया। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम "श्याम" दिया और कलयुग में पूजे जाने का वरदान दिया। इस भजन के माध्यम से भक्त उसी परम कृपालु देव की आराधना करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक श्याम भजनों के प्रणेता और प्रसिद्ध श्याम भक्त नंदू जी (Nandu Ji) द्वारा की गई मानी जाती है। भजन की अंतिम पंक्तियों में "झूमे रे श्याम नंदू झूमे" का उल्लेख आता है, जो रचनाकार के अनन्य अनुराग और समर्पण को दर्शाता है। इस भजन की पृष्ठभूमि खाटू धाम (राजस्थान) की पावन धरा से जुड़ी है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और बाबा श्याम उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-प्रचलित हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा का पुट भी देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली संवादात्मक (Conversational) है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "नैया पार करना", "हाथ हाथों में लेना" और "झोली भरना" जैसे मुहावरों का प्रयोग करके आध्यात्मिक सत्यों को अत्यंत सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. पूर्ण विश्वास (Faith): जब तक हमें ईश्वर पर पूर्ण विश्वास नहीं होगा, तब तक हमारी प्रार्थना अधूरी रहेगी। भक्त को विश्वास है कि "श्याम भर देगा दामन तू मेरा"।
  2. अहंकार का त्याग (Humility): "मैं तो हारा गम का मारा" कहकर भक्त अपने सांसारिक अहंकार को त्याग देता है। ईश्वर की कृपा वहीं बरसती है जहाँ अहंकार शून्य होता है।
  3. ईश्वर से सीधा संबंध: यह भजन सिखाता है कि भगवान से हमारा संबंध किसी मध्यस्थ का नहीं, बल्कि सीधा और आत्मीय होना चाहिए। हम उनसे अपने दिल की बात बिना किसी संकोच के कह सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
झोली दामन या याचना की थैली भक्त का हृदय और उसकी सांसारिक व आध्यात्मिक कामनाएं।
बहलाओ बातों में केवल सांत्वना देना भक्त को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि प्रभु की प्रत्यक्ष अनुभूति चाहिए।
नैया नाव संसार रूपी भवसागर में फंसा हुआ मानव जीवन।
खिवैया नाविक (नाव चलाने वाला) भगवान श्री कृष्ण/श्याम जो जीवन को पार लगाते हैं।
डेरा डालना स्थायी निवास बनाना प्रभु के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"भर दे रे श्याम झोली भर दे, भर देना बहलाओ बातों में..."
हे मेरे प्यारे श्याम! अब मेरी झोली को अपनी कृपा और आशीर्वाद से भर दो। मुझे केवल बातों से मत बहलाओ, क्योंकि मैं तुम्हारी शरण में पूर्ण विश्वास के साथ आया हूँ।

"दिन बीते बीती रातें, अपनी कितनी हुई रे मुलाक़ातें..."
हे प्रभु! तुम्हारे दर पर आते-आते कई दिन और रातें बीत गईं। हमारी न जाने कितनी मुलाक़ातें हुईं, लेकिन मेरी विपदा अभी वैसी ही है। अब मेरी पुकार सुनो।

"दान है अनजान है, गुरु तू ही तो मेरा भगवान है..."
मैं तो अज्ञानी और नादान हूँ, मुझे संसार का कोई ज्ञान नहीं है। मेरे लिए तो तुम ही मेरे गुरु, मार्गदर्शक और साक्षात् भगवान हो।

"मेरी नैया ओ कन्हैया, पार कर दे तू बनके खिवैया..."
यह जीवन रूपी नाव बीच मझधार में फंसी है। हे कन्हैया! तुम इसके नाविक बन जाओ और मुझे इस संसार रूपी भवसागर से पार उतार दो।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम बाबा की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा। मोर मुकुट बंसीवाले की जय।"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम भर दे रे श्याम झोली भर दे (Bhar De Re Shyam Jholi Bhar De)
आराध्य देव भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक / श्री कृष्ण)
रचनाकार / कवि पारंपरिक / भक्त नंदू जी
मुख्य रस / भाव भक्ति रस, सख्य भाव, शरणागति भाव
उपयुक्त अवसर फाल्गुन मेला, होली, एकादशी (ग्यारस), श्याम संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी (राजस्थानी मिश्रित)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के लेखक प्रसिद्ध श्याम भक्त और भजन गायक "नंदू जी" माने जाते हैं। भजन की अंतिम पंक्तियों में उनके नाम का उल्लेख आता है।

महाभारत काल में बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में जो भी पक्ष हारेगा, उसकी ओर से लड़ेंगे। इसी कारण उन्हें "हारे का सहारा" कहा जाता है।

इस भजन को एकादशी (ग्यारस) के दिन, संध्या आरती के समय या किसी भी श्याम संकीर्तन के दौरान गाना और सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

हाँ, खाटू श्याम जी का मुख्य मेला फाल्गुन मास में होली के आसपास ही लगता है। इसलिए होली और फाल्गुन के उत्सवों में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।

यहाँ "नैया" का अर्थ मानव जीवन से है और "खिवैया" का अर्थ भगवान श्री कृष्ण या श्याम बाबा से है, जो इस जीवन रूपी नाव को संसार सागर से पार लगाते हैं।

भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम "श्याम" दिया था और वरदान दिया था कि कलयुग में वे इसी नाम से पूजे जाएंगे।

इसका मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति और अटूट विश्वास है। जब मनुष्य अपने सारे प्रयास छोड़कर भगवान की शरण में आ जाता है, तो भगवान उसकी झोली अवश्य भरते हैं।

हाँ, इस भजन के मधुर स्वर और भावपूर्ण शब्द भक्त के मन से चिंता और अवसाद को दूर कर असीम शांति और सुरक्षा का अनुभव कराते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक भक्ति ग्रंथों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और खाटू धाम के पुजारियों द्वारा समय-समय पर किए गए प्रवचनों के आधार पर संकलित और व्याख्यायित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन आध्यात्मिक जानकारी पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता - शरणागति योग एवं भक्ति योग प्रसंग।
  • महाभारत - बर्बरीक प्रसंग एवं खाटू श्याम इतिहास।
  • पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं संकीर्तन मंडलियां।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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