Parvati Stotram

सुन ले ओ सवारिया मुझे तेरा ही सहारा | sun le o sawariya mujhe tera hi sahara | sun le o sawariya || Khatu shyam bhajan -Bhaktilok

177 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सुन ले ओ सवारिया मुझे तेरा ही सहारा | sun le o sawariya mujhe tera hi sahara | sun le o sawariya || Khatu shyam bhajan

श्रेणी: कृष्ण स्तोत्र / श्याम भजन | प्रकाशन वर्ष: 2026 | स्रोत: संकलित पारंपरिक श्री खाटू श्याम भजन परंपरा

कलयुग के अवतारी, हारे के सहारे और तीन बाण धारी श्री खाटू श्याम बाबा को समर्पित यह अत्यंत भावुक, हृदयस्पर्शी और अनन्य भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "सुन ले ओ सवारिया मुझे तेरा ही सहारा" श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। जब जीवन की कठिनाइयां, विपत्तियों के काले बादल और निराशा रूपी अंधकार इंसान को चारों तरफ से घेर लेते हैं, तब एक भक्त की पुकार किस प्रकार अपने आराध्य श्याम सांवरिया तक पहुंचती है, उसका सजीव चित्रण इस भजन में किया गया है। खाटू नरेश बाबा श्याम के प्रति पूर्ण शरणागति (Surrender), अटूट विश्वास और अगाध प्रेम का यह पद साधक के मन में आशा और सकारात्मकता का संचार करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ सुन ले ओ सवारिया मुझे तेरा ही सहारा ॥

दूर दूर तक ओ सांवरिया सूजे नही किनारा,
एक बार आ जाओ मोहन मैंने तुम्हे पुकारा,
तुम बिन कौन हमारा बाबा तुम बिन कौन हमारा,
तेरा ही सहारा मुझे तेरा ही सहारा.....

नैया हमारी ओ सांवरिया अब है तेरे भरोसे,
खेते खेते हार गया हु डरता हु लहरों से,
गिर गये काले बादल और छाया है अंधियारा,
तेरा ही सहारा मुझे तेरा ही सहारा.....

अंधारी रातो में कान्हा बिजली कढ़ कढ़ कढ़के,
डूब न जाये नैया मेरी दिल मेरा ये धडके,
श्याम को भी तारो लाखो को तुमने तारा,
तेरा ही सहारा मुझे तेरा ही सहारा.....

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में भक्त की विरह वेदना, दीनता और अपने प्रभु के प्रति अनन्य निष्ठा स्पष्ट झलकती है। आइए इसका विस्तृत भावार्थ समझें:

प्रथम अंतरा: भक्त अपने आराध्य सांवरिया से कहता है कि हे प्रभु! संसार रूपी भवसागर में मैं इस प्रकार फंस गया हूँ कि दूर-दूर तक मुझे जीवन का कोई किनारा या छोर दिखाई नहीं दे रहा है। चारों तरफ असमंजस और संकट की स्थिति है। हे मोहन! मैंने बड़ी आस और पुकार के साथ केवल आपको ही याद किया है। इस संसार में आपके सिवा मेरा और कौन है जो इस संकट की घड़ी में मेरी सुध ले? हे बाबा! मुझे केवल और केवल आपका ही सहारा है।

द्वितीय अंतरा: भक्त अपनी जीवन रूपी नाव (नैया) का उदाहरण देते हुए कहता है कि मेरी यह नैया अब पूरी तरह से आपके भरोसे है। जीवन रूपी इस नौका को खेते-खेते (संघर्ष करते-करते) अब मैं थक चुका हूँ और जीवन की इन विकट लहरों व उतार-चढ़ाव से मुझे भय लगने लगा है। मेरे जीवन के आसमान में संकट रूपी काले बादल घिर आए हैं और चारों तरफ अज्ञान व निराशा का अंधियारा छाया हुआ है। ऐसे में हे श्याम! मुझे केवल आपका ही एकमात्र सहारा शेष बचा है।

तृतीय अंतरा: भक्त अत्यंत भावुक होकर कहता है कि जीवन की इन अंधकारमय रातों में भय रूपी बिजलियां कड़क रही हैं। मेरे मन में यह आशंका बार-बार उठ रही है कि कहीं मेरी यह भक्ति और जीवन की नैया इन भंवरों में डूब न जाए, जिसे सोचकर मेरा हृदय जोर-जोर से धड़क रहा है। हे खाटू श्याम! आपने इतिहास में न जाने कितने ही पतितों और भक्तों का उद्धार किया है, लाखों लोगों को इस भवसागर से तारा है। इसलिए हे प्रभु, मुझ दीन पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालिए क्योंकि मुझे केवल आपका ही सहारा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शरणागति का भाव: यह भजन शरणागति (Total Surrender) के मार्ग को प्रशस्त करता है, जहां भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से भगवान पर निर्भर हो जाता है।
  • खाटू श्याम महिमा: राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर और बाबा के दरबार से जुड़े भक्तों की मनोदशा का इसमें जीवंत वर्णन है।
  • संकट निवारण: यह भजन मानसिक शांति प्रदान करता है और अवसाद या कठिन समय में व्यक्ति को आध्यात्मिक संबल देता है।
  • सरल और भावपूर्ण भाषा: आम बोलचाल की सहज हिंदी और राजस्थानी-ब्रज मिश्रित भाव शैली इसे हर वर्ग के भक्त के लिए हृदयग्राही बनाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया या सुना जा सकता है, विशेषकर निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व है:

  • एकादशी और फाल्गुन मेला: खाटू श्याम जी के मासिक उत्सव (एकादशी, द्वादशी) और वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेले के दौरान इस भजन का गान भक्तों में उत्साह भर देता है।
  • संध्याकालीन कीर्तन: घर के पूजा स्थल में संध्या आरती के पश्चात या साप्ताहिक सत्संग और जागरण के आरंभ में इसे गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • मानसिक संकट के समय: जब भी जीवन में निराशा या असफलता का अनुभव हो, एकांत में बैठकर इस भजन का स्मरण करने से आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में महाभारत कालीन वीर बर्बरीक, जिन्हें कलियुग में भगवान कृष्ण के वरदान स्वरूप 'खाटू श्याम बाबा' या 'लखदातार' के रूप में पूजा जाता है, वे विराजमान हैं। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान त्याग से प्रसन्न होकर उन्हें अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था। यही कारण है कि भक्त अपने हर संकट के निवारण के लिए श्याम बाबा को ही अपना एकमात्र रक्षक और मार्गदर्शक मानते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
सवारिया सांवले रंग वाले भगवान श्री कृष्ण / श्याम बाबा आराध्य देव के प्रति आत्मीय संबोधन
सूजे नहीं किनारा कोई उपाय या रास्ता दिखाई न देना संकट और अनिश्चितता की स्थिति
खेते खेते नाव चलाना या निरंतर संघर्ष करना जीवन की कठिनाइयों से जूझना
अंधियारा अंधकार, अज्ञान या निराशा कठिन परिस्थितियां
तारा उद्धार करना, भवसागर से पार लगाना भक्तों की रक्षा करने की कृपा

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पंक्तियों का सूक्ष्म अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि कवि ने किस प्रकार एक साधारण नाविक के उदाहरण से जीवन के बड़े दर्शन को समझाया है:

  • "दूर दूर तक ओ सांवरिया सूजे नही किनारा" - यह मनुष्य की उस विवशता को दर्शाता है जब वह अपने बुद्धि-बल से समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाता।
  • "नैया हमारी ओ सांवरिया अब है तेरे भरोसे" - यह योगेश्वर श्रीकृष्ण के गीता उपदेश "मामेकम शरणं व्रज" (केवल मेरी शरण में आ जाओ) का व्यावहारिक रूप है।
  • "श्याम को भी तारो लाखो को तुमने तारा" - यह इस बात का प्रमाण है कि भगवान का इतिहास पतित-पावन और शरणागत-वत्सल होने का है, वे कभी अपने भक्तों का त्याग नहीं करते।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्याम बाबा के स्मरण और इस भजन के साथ निम्नलिखित महामंत्र का जाप करने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

हारायन हराम च सांवरिया, तीन बाण धारी नमो नमः ॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम सुन ले ओ सवारिया मुझे तेरा ही सहारा
आराध्य देव श्री खाटू श्याम बाबा (भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-राजस्थानी मिश्रित
मुख्य विषय पूर्ण शरणागति, संकट निवारण और भक्ति
भक्ति भाव विनय, करुणा, विरह और अनन्य विश्वास
उपयुक्त अवसर एकादशी पूजा, श्याम कीर्तन, जागरण और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन कलियुग के अवतारी देवता श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को समर्पित है, जो अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करने के लिए जाने जाते हैं।

इस भजन को आप संध्याकालीन आरती के समय, एकादशी के पावन व्रत पर, या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और श्याम कीर्तन के दौरान गा सकते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति (Total Surrender) है। यह सिखाता है कि जीवन की हर कठिनाई में भगवान पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, बर्बरीक ने महाभारत युद्ध में हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ने का वचन दिया था, इसलिए उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है।

हाँ, इस प्रकार के भक्ति भावपूर्ण भजनों का श्रवण और गायन मन के तनाव को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा व मानसिक शांति प्रदान करता है।

श्री खाटू श्याम जी का भव्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू नामक कस्बे में स्थित है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

बिल्कुल, इस भजन की धुन बहुत ही सरल, लयबद्ध और कर्णप्रिय है, जिसे शुरुआती गायक और बच्चे बहुत आसानी से सीख और गा सकते हैं।

इस भजन के साथ हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा, और बांसुरी का बहुत सुंदर संगत किया जा सकता है, जिससे भजन का आनंद और बढ़ जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक पोर्टल पर प्रस्तुत यह भजन सामग्री पारंपरिक लोक-साहित्य और श्याम भक्तों के अनुभवों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध भक्ति साहित्य पहुँचाना है। किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में पारंपरिक गुरुजनों या ग्रंथों का मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक श्री खाटू श्याम भजन संकलन एवं लोक कथाएं।
  • श्रीमद्भागवत गीता (शरणागति योग प्रसंग)।
  • भक्तमाल एवं क्षेत्रीय संकीर्तन परंपरा।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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