Parvati Stotram

इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगे लिरिक्स (Ek Na Ek Din Maa Vinti Sunegi Lyrics in Hindi) - Mata Rani Bhajan Vipin Sachdeva Shraddha - BhaktiLok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी - माता रानी का भावपूर्ण भजन

माता रानी के चरणों में समर्पित यह पावन भजन 'इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी, मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी' सनातन धर्म की अटूट आस्था, अगाध प्रेम, समर्पण और अनंत धैर्य का एक जीवंत प्रतीक है। प्रसिद्ध गायक विपिन सचदेवा की मंत्रमुग्ध कर देने वाली और भावपूर्ण आवाज में गाया गया यह भजन हर उस साधक, भक्त और गृहस्थ के हृदय को झकझोर देता है जो जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर कठिनाइयों, संघर्षों या असफलताओं से जूझ रहा होता है। हिंदू पौराणिक परंपरा और शाक्त संप्रदाय में माँ दुर्गा, जगदम्बा, शेरावाली को करुणा की सागर और सृष्टि की आदि शक्ति माना गया है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि सांसारिक प्रपंचों और दुखों के बीच भी यदि माँ के चरणों में सच्ची पुकार लगाई जाए, तो भक्त की पुकार कभी अनसुनी नहीं रह सकती। इस व्यापक मार्गदर्शिका में हम इस भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और जीवन दर्शन पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपके भीतर भक्ति और सकारात्मकता का संचार करेगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):

इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी...

अंतरा 1:

मैं तो हूँ बालक तेरा, तू है मेरी मैया,
तेरे ही भरोसे है, मेरी जीवन की नैया।
मेरी नैया को माँ, पार लगाएगी,
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।

अंतरा 2:

दर-दर मैं भटका हूँ, अब तेरे द्वार आया हूँ,
लेकर के झोली मैं, तेरा ही नाम लाया हूँ।
मेरी झोली को माँ, खुशियों से भरेगी,
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।

अंतरा 3:

ना कोई मेरा यहाँ, ना कोई सहारा है,
मैया तेरे चरणों में, मैंने डेरा डाला है।
मेरी सूनी माँग माँ, खुद ही भरेगी,
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।

अंतरा 4:

दुखों के अंधेरों ने, हमको है घेरा,
आके दिखा दे माँ, ज्ञान का सवेरा तू।
मेरी अंधियारी रात, सुबह कर जाएगी,
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।

समापन:

चरणों में तेरे 'सचदेवा' शीश झुकाता है,
हर पल मैया तेरा ही गुणगान गाता है।
तेरी रहमत कभी खाली ना जाएगी,
इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी,
मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की तड़प और उसकी माँ के प्रति अगाध निष्ठा का काव्यात्मक दस्तावेज है। जब कोई मनुष्य जीवन के संघर्षों से हारने लगता है, चारों तरफ निराशा के बादल छा जाते हैं, तब उसे केवल एक ही स्थान पर शांति मिलती है - वह है माँ के चरण। भजन के मुखड़े में ही साधक का अटूट विश्वास झलकता है कि "इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी"। यह इस बात का प्रतीक है कि भले ही ईश्वर की परीक्षा में थोड़ा समय लगे, लेकिन न्याय और करुणा की देवी अपनी संतान की पुकार अनसुनी नहीं करतीं।

भजन के पहले अंतरे में भक्त और भगवान के बीच के वात्सल्य संबंध को उजागर किया गया है। "मैं तो हूँ बालक तेरा, तू है मेरी मैया" - यह पंक्ति अद्वैत और विशुद्ध प्रेम का भाव जगाती है। एक माँ कभी अपनी संतान के दुखों को लंबे समय तक नहीं देख सकती। जीवन रूपी भंवर में फंसी नैया को पार लगाने का उत्तरदायित्व जब हम माँ को सौंप देते हैं, तो हमारा सारा अहंकार और चिंता समाप्त हो जाती है। ठीक इसी प्रकार, विभिन्न द्वारों पर भटकने के बाद जब मनुष्य थककर सच्चे मन से जगत जननी के दरबार में झोली फैलाता है, तो ब्रह्मांड की शक्ति उसकी रिक्त झोली को खुशियों और संतोष से भर देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

माता रानी के भजनों की इस परंपरा में विपिन सचदेवा की आवाज ने इस रचना को अमर बना दिया है। इस भजन का मुख्य महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में निहित है:

  • अटूट धैर्य और संयम: यह भजन साधक को कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  • वात्सल्य भाव: ईश्वर को केवल शक्तिपुंज न मानकर अपनी करुणामयी 'मैया' के रूप में देखना इस भजन की मूल आत्मा है।
  • आत्मसमर्पण (Surrender): "तेरे ही भरोसे है मेरी जीवन की नैया" पंक्ति पूर्ण शरणागति (Sharanagati) का संदेश देती है।
  • मानसिक शांति: इस भजन का श्रवण करने मात्र से अशांत मन को गहरा संबल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के आनंद और सकारात्मक ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए इसे सही समय और विधि से सुनना या गाना अत्यंत प्रभावी होता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: सुबह उठकर स्नान के बाद या संध्या बेला में माँ के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना मन को पूरे दिन ऊर्जावान रखता है।
  • नवरात्र के पावन दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्र के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के समय यह भजन वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना देता है।
  • माता की चौकी या जागरण: किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, माता के जगराते या संकीर्तन में इस भजन को गाकर माहौल को भावविभोर किया जा सकता है।
  • विपरीत परिस्थितियों में: जब भी जीवन में निराशा या हताशा का अनुभव हो, एकांत में बैठकर इस भजन का स्मरण करने से भीतर एक नई उम्मीद जागती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का सम्मिलित स्वरूप भगवती जगदम्बा हैं। सनातन संस्कृति में माँ को प्रकृति और चेतना का आधार माना गया है। जिस प्रकार एक लौकिक माता अपनी संतान की हर त्रुटि को क्षमा कर उसे गले लगाती है, उसी प्रकार माँ भगवती अपने भक्तों के कर्मों के बंधन को काटकर उन्हें मोक्ष और अभय दान देती हैं। गायक विपिन सचदेवा ने अपनी भावभीनी प्रस्तुति के माध्यम से इस आध्यात्मिक संबंध को श्रोताओं के अंतःकरण तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति गीतों की इस श्रृंखला में समकालीन रचनाकारों द्वारा रचे गए ऐसे भजन उन लोगों के लिए संजीवनी का काम करते हैं जो आधुनिक जीवन की दौड़-भाग और मानसिक तनाव से त्रस्त हैं। विपिन सचदेवा जैसे प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी मधुर और सात्विक स्वर लहरियों से इन पंक्तियों में प्राण फूंके हैं। इसकी पृष्ठभूमि पूरी तरह से लोक-आस्था, माता रानी के प्रति अटूट प्रेम और भारतीय पारिवारिक मूल्यों पर आधारित है, जहाँ हर संकट का अंतिम समाधान माँ के आंचल में ही ढूंढा जाता है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बेहद सरल, सुबोध और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें ब्रज और अवधी का हल्का सा माधुर्य भी घुला हुआ है। भाषा की इस सहजता के कारण ही यह भजन ग्रामीण अंचल से लेकर महानगरों तक के हर वर्ग के भक्त की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे "जीवन की नैया", "दुखों के अंधेरे" और "ज्ञान का सवेरा", जो इसके साहित्यिक सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई गहरे पाठ पढ़ाता है:

  1. आशा कभी न छोड़ें: अंधेरी रात के बाद सूर्योदय निश्चित है, ठीक वैसे ही दुखों के बाद सुख का आना तय है।
  2. अहंकार का त्याग: जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हमारा सब कुछ उसी मैया के भरोसे है, तो जीवन का आधा तनाव स्वतः समाप्त हो जाता है।
  3. निरंतर प्रार्थना: लगातार प्रयास और माँ के चरणों में निरंतर पुकार हमारी तकदीर बदलने की सामर्थ्य रखती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तकदीर भाग्य, किस्मत कर्मों के फल और ईश्वर की कृपा से बदलने वाला भविष्य
जीवन की नैया जीवन रूपी नाव संसार सागर में तैरता हुआ मानव शरीर और उसकी यात्रा
झोली कपड़े की थैली, दामन भक्त की इच्छाएं, आकांक्षाएं और अंतःकरण
रहमत कृपा, करुणा, दया माँ भगवती का अहेतुकी अनुग्रह

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी, मेरी बिगड़ी हुई तकदीर माँ खुद ही बनाएगी।"

इस पंक्ति में साधक का अगाध विश्वास प्रकट होता है। वह जानता है कि वर्तमान परिस्थितियां उसके अनुकूल नहीं हैं, भाग्य रुठा हुआ है, परंतु जगत की विधाता जब कृपा करेंगी, तो पल भर में भाग्य की रेखाएं बदल जाएंगी।

"मैं तो हूँ बालक तेरा, तू है मेरी मैया, तेरे ही भरोसे है, मेरी जीवन की नैया।"

यहाँ जीव और ब्रह्म का संबंध माता और संतान के रूप में स्थापित किया गया है। बच्चा अपनी रक्षा के लिए सर्वथा अपनी माँ पर निर्भर होता है। ठीक उसी प्रकार, साधक अपनी समस्त चिंताओं को माँ के चरणों में समर्पित कर निश्चिंत हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हे सभी प्रकार का मंगल करने वाली मंगलमयी शिवे! सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण में आए हुए की रक्षा करने वाली और तीन नेत्रों वाली हे गौरी नारायणि! आपको हमारा बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम इक न इक दिन ये माँ विनती सुनेगी (Ek Na Ek Din Maa Vinti Sunegi)
आराध्य देवी माता रानी / माँ दुर्गा / जगदम्बा
गायक विपिन सचदेवा (Vipin Sachdeva)
भाषा हिंदी / सरल ब्रज-अवधी मिश्रित
मुख्य भाव अटूट विश्वास, समर्पण, विनय और धैर्य
उपयुक्त अवसर नवरात्र, माता का जागरण, संध्या वंदना एवं दैनिक सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन अपनी भावपूर्ण और मधुर आवाज में लोकप्रिय गायक विपिन सचदेवा द्वारा गाया गया है।

इस भजन को सुनने से मन को अगाध शांति मिलती है, जीवन की कठिन परिस्थितियों में लड़ने का साहस बढ़ता है और माता रानी के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा मजबूत होती है।

माता रानी की आराधना के लिए शुक्रवार का दिन, मंगलवार का दिन और वर्ष में आने वाले दोनों गुप्त तथा प्रकट नवरात्र (चैत्र एवं शारदीय नवरात्र) अत्यंत पवित्र और शुभ माने जाते हैं।

हाँ, यह भजन विशेष रूप से उन गृहस्थों और साधकों के लिए है जो जीवन में संघर्षों का सामना कर रहे हैं और जिन्हें किसी मानसिक संबल की आवश्यकता होती है।

माता रानी की पूजा में लाल सिंदूर, लाल चुनरी, ताजे फूल (विशेषकर गुड़हल या कमल), अक्षत, नारियल, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है।

निश्चित रूप से, प्रातःकाल स्नान के पश्चात इस भजन को सुनने से पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मन केंद्रित रहता है।

भजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि ईश्वर की न्याय व्यवस्था पर धैर्य रखना चाहिए; सच्ची पुकार और समर्पण से हर बिगड़ी हुई तकदीर संवर सकती है।

समर्पण का अर्थ अपने अहंकार और चिंताओं को भगवान के चरणों में त्याग देना है, जिससे साधक का मन हल्का और निर्मल हो जाता है तथा भगवती की कृपा सहज ही प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की लोक-भक्ति परंपरा, माता रानी के भजनों की साहित्यिक समीक्षा और आध्यात्मिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रयुक्त सभी भावार्थ और संदर्भ पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं ताकि पाठकों को प्रामाणिक और शांतिप्रद जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं देवी महाभागवत पुराण
  • लोक-साहित्य एवं माता रानी के पारंपरिक भक्ति गीत संग्रह
  • विपिन सचदेवा द्वारा गायित लोकप्रिय माता के भजन आडियो/वीडियो संग्रह
  • भारतीय संगीत एवं भक्ति परंपरा के विभिन्न आयाम

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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