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सुखी मेरा परिवार है ये तेरा उपकार है भजन लिरिक्स (Sukhi Mera Pariwaar Hai Lyrics in Hindi) - Daadi Sati Bhajan - Bhaktilok

127 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"सुखी मेरा परिवार है, ये तेरा उपकार है" - यह भजन रानी सती दादी के भक्तों के हृदय में बसने वाला एक अत्यंत भावपूर्ण और समर्पण से भरा हुआ गीत है। सनातन धर्म में माता की भक्ति को सर्वोपरि माना गया है, और जब बात झुंझुनूं वाली दादी सती की हो, तो भक्तों का विश्वास और भी प्रगाढ़ हो जाता है। यह भजन न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि यह उस कृतज्ञता का प्रतीक है जो एक भक्त अपने आराध्य के प्रति अनुभव करता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी सुख-शांति का श्रेय पूर्णतः माता की कृपा को देता है। यह भजन विशेष रूप से दादी सती के जागरण, मंगल पाठ, और व्यक्तिगत पूजा के समय गाया जाता है, जो मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी:

सुखी मेरा परिवार है, ये तेरा उपकार है,
दादी माँ, ये तेरा उपकार है।
सुखी मेरा परिवार है, ये तेरा उपकार है,
दादी माँ, ये तेरा उपकार है।

अंतरा 1:

तूने संभाला है मुझे, हर कदम पर साथ दिया,
मुश्किलों की धूप में, शीतल सा हाथ दिया।
तेरी ममता की छाया में, फला-फूला संसार है,
दादी माँ, ये तेरा उपकार है।

अंतरा 2:

जो भी माँगा मैंने तुझसे, बिन माँगे ही पा लिया,
तेरी चौखट पे आकर, मैंने अमृत पी लिया।
तेरी कृपा का ही तो, ये सारा विस्तार है,
दादी माँ, ये तेरा उपकार है।

अंतरा 3:

भूल जाऊँ मैं तुझे, ऐसी मेरी औकात नहीं,
तेरे सिवा इस दुनिया में, मेरी कोई बात नहीं।
तेरी भक्ति में ही माँ, मेरा बेड़ा पार है,
दादी माँ, ये तेरा उपकार है।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त अपनी स्थिति का आकलन करते हुए कहता है कि आज उसके परिवार में जो सुख, शांति और समृद्धि है, वह उसकी अपनी मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि माता रानी की असीम कृपा का फल है। 'उपकार' शब्द यहाँ कृतज्ञता को दर्शाता है। भक्त स्वीकार करता है कि जीवन के कठिन समय में जब वह अकेला था, तब माता ने ही उसे सहारा दिया। यह भजन 'शरणागति' का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ भक्त अपने अहंकार को त्याग कर माता के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • कृतज्ञता का भाव: यह भजन सिखाता है कि हमें अपनी सफलताओं के लिए ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।
  • पारिवारिक सुख: यह भजन परिवार की एकता और सुरक्षा के लिए माता का आशीर्वाद मांगने हेतु अत्यंत प्रभावशाली है।
  • दादी सती की महिमा: यह भजन रानी सती दादी के प्रति अटूट विश्वास को प्रकट करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु दादी सती के मंगल पाठ या घर में होने वाली साप्ताहिक पूजा के दौरान इसे गाना विशेष फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में माता के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।

भजन का नाम आराध्य भाषा भाव
सुखी मेरा परिवार है रानी सती दादी हिंदी कृतज्ञता एवं समर्पण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से झुंझुनूं वाली रानी सती दादी को समर्पित है।

जी हाँ, इसे घर पर परिवार के साथ मिलकर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, दादी सती के भजनों के संकलन और लोक मान्यताओं पर आधारित है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

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