प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
GULSHAN KUMAR BABLA MEHTA - Bhaktilok
Devi Bhajan: आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा | Aa Maa Aa Tujhe Dil Ne Pukara
Singer: Babla Mehta
Music Director: Dilip Sen, Samir Sen
Lyricist: Naqsh Layalpuri
Artist: Gulshan Kumar
Album: Main Balak Tu Mata
Music Label: T-Series
आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ।
दिल ने पुकारा तू है मेरा सहारा माँ ॥
शेरांवाली जोतांवाली मेहरांवाली माँ ।
आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा ॥
प्रेम से बोलो जय माता दी ।
सारे बोलो जय माता दी ।
मिल के बोलो जय माता दी ।
फिर से बोलो जय माता दी ।
मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।
मुझ को दर्शन दे के मैया भाग जगा दे मेरे ।
मैंने मन से तेरी पूजा की है सांझ सवेरे ।
मुझ को दर्शन दे के मैया भाग जगा दे मेरे ।
मैया मैया बोले मेरा मन एक तारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
तूने ही पाला है मुझको तू ही मुझे संभाले ।
तूने ही मेरे जीवन मे पल पल किये उजाले ।
तूने ही पाला है मुझको तू ही मुझे संभाले ।
तूने ही मेरे जीवन मे पल पल किये उजाले ।
चरणों मे तेरे मैंने तन मन वारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
मान ले मेरी विनती मैया एक झलक दिखला दे ।
रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।
मान ले मेरी विनती मैया एक झलक दिखला दे ।
रूप की शीतल किरणों से नयनो के द्वार सजा दे ।
नो को रूप तेरा लगता है प्यारा माँ ॥
॥ आ माँ आ तुझे दिल ने पुकारा...॥
जय माता दी जय माता दी ।
कष्ट निवारे शेरों वाली ।
पार लगादे शेरों वाली ।
है दुःख हरनी शेरों वाली ।
बिगड़ी बना दे शेरों वाली ।
प्रेम से बोलो जय माता दी ।
सारे बोलो जय माता दी ।
जोर से बोलो जय माता दी ।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "आ माँ तुझे दिल ने पुकारा भजन लिरिक्स (Aa Maa Aa Tujhe Dil Ne Pukara Lyrics in Hindi) - GULSHAN KUMAR BABLA MEHTA - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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