भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार Dharti gagan me hoti hai teri jai jai kar

पढ़ें धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार Dharti gagan me hoti hai teri jai jai kar का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक मह

"धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार" (Dharti Gagan Me Hoti Hai Teri Jai Jai Kar) केवल एक भजन नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की उस परम चेतना के प्रति एक भावपूर्ण कृतज्ञता है जो कण-कण में व्याप्त है। यह भजन ईश्वर की सर्वव्यापकता, उनकी महिमा और भक्त की अनन्य शरणागति का जीवंत चित्रण करता है। सनातन धर्म के भक्ति मार्ग में 'संकीर्तन' को कलयुग का सबसे सरल और प्रभावशाली साधन माना गया है, और यह भजन उसी परंपरा का एक अनमोल रत्न है। जब एक भक्त इस भजन को गाता है, तो वह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं करता, बल्कि अपने अस्तित्व को उस विराट सत्ता में विलीन करने का प्रयास करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ, इसके दार्शनिक पक्ष और भक्त के जीवन में इसके महत्व का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार ॥

धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार,
हो मैया तेरी जय जैकार, हो मैया तेरी जय जैकार।
कण-कण में है रूप तुम्हारा, महिमा अपरम्पार,
हो मैया तेरी जय जैकार, हो मैया तेरी जय जैकार॥

तू ही है दाता, तू ही विधाता, तू ही है जग की पालणहार,
तेरे चरणों में झुकता है, सारा ये संसार।
अंधियारे में जो राह दिखाए, तू वो ज्योति अपार,
हो मैया तेरी जय जैकार, हो मैया तेरी जय जैकार॥

दुखियों के तुम दुख हर लेती, भरती हो भंडार,
तेरी दया का अंत नहीं है, तू है करुणा की धार।
भक्तों की नैया पार लगाती, करती हो उद्धार,
हो मैया तेरी जय जैकार, हो मैया तेरी जय जैकार॥

मन मंदिर में मूरत तेरी, नैनों में तेरा वास,
हर पल मैया नाम जपूँ मैं, पूरी कर दो आस।
शरण तुम्हारी जो भी आए, पा जाए उपकार,
हो मैया तेरी जय जैकार, हो मैया तेरी जय जैकार॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और हृदयस्पर्शी है। यहाँ प्रत्येक अंतरे का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:

मुखड़ा: ईश्वर की सर्वव्यापकता

भजन की शुरुआत इस उद्घोष से होती है कि पृथ्वी से लेकर आकाश तक, समस्त ब्रह्मांड में केवल ईश्वर (मैया/शक्ति) की ही जय-जयकार हो रही है। यहाँ 'धरती' और 'गगन' प्रतीक हैं दृश्य और अदृश्य जगत के। भक्त स्वीकार करता है कि सृष्टि का ऐसा कोई कोना नहीं है जहाँ उस परम सत्ता का प्रभाव न हो। "कण-कण में है रूप तुम्हारा" - यह पंक्ति उपनिषदों के 'ईशा वास्यमिदं सर्वम्' (सब कुछ ईश्वर से व्याप्त है) के सिद्धांत को पुष्ट करती है।

प्रथम अंतरा: सृजन और संरक्षण

इस भाग में भक्त ईश्वर को 'दाता' (देने वाला), 'विधाता' (भाग्य निर्माता) और 'पालणहार' (संरक्षक) के रूप में संबोधित करता है। यह स्वीकारोक्ति है कि मनुष्य का अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है; वह जो कुछ भी है और उसके पास जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर की ही देन है। "अंधियारे में जो राह दिखाए" - यह पंक्ति अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाने वाली ईश्वरीय शक्ति का वर्णन करती है।

द्वितीय अंतरा: करुणा और उद्धार

यहाँ ईश्वर के 'करुणामयी' स्वरूप पर बल दिया गया है। संसार में जब मनुष्य दुखों से घिर जाता है, तो केवल ईश्वरीय कृपा ही उसे संबल प्रदान करती है। "तेरी दया का अंत नहीं है" - यह भक्त के अटूट विश्वास को दर्शाता है कि ईश्वर की करुणा असीमित है। 'नैया पार लगाना' संसार रूपी भवसागर से मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त करने का रूपक है।

तृतीय अंतरा: अंतर्मन में वास

अंतिम पंक्तियों में भक्ति की पराकाष्ठा है। भक्त कहता है कि उसे अब बाहर कहीं खोजने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उसने अपने 'मन मंदिर' में ही ईश्वर की मूरत स्थापित कर ली है। यह 'अहं ब्रह्मास्मि' और 'सोऽहम्' की उस अवस्था की ओर संकेत है जहाँ भक्त और भगवान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना 'पूर्ण शरणागति' (Total Surrender) है। इसमें निम्नलिखित आध्यात्मिक संदेश निहित हैं:

  • अद्वैत भाव: समस्त सृष्टि को ईश्वर का ही रूप मानना।
  • कृतज्ञता: जीवन की हर सांस और हर सुख के लिए ईश्वर का आभार व्यक्त करना।
  • निर्भयता: जब हम यह जान लेते हैं कि ईश्वर हमारे साथ है और कण-कण में व्याप्त है, तो भय स्वतः समाप्त हो जाता है।
  • सेवा और भक्ति: कर्म करते हुए भी मन को ईश्वर के चरणों में लगाए रखना।

गीत की जानकारी | Song Information

विषय विवरण
गीत का नाम धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार
मुख्य विषय ईश्वर की महिमा और भक्ति
भाषा हिंदी (सरल एवं सुबोध)
भक्ति मार्ग नवधा भक्ति (कीर्तन एवं स्मरण)
उपयुक्त अवसर जागरण, सत्संग, दैनिक पूजा, नवरात्रि

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
अपरम्पार जिसकी कोई सीमा न हो ईश्वर की अनंत महिमा के लिए
विधाता सृष्टि की रचना करने वाला परमात्मा के सृजनकर्ता रूप के लिए
पालणहार पालन-पोषण करने वाला ईश्वर के संरक्षण भाव के लिए
उद्धार कल्याण या मुक्ति भवसागर से पार उतारने के लिए
ज्योति दिव्य प्रकाश ज्ञान और मार्गदर्शन के लिए

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय संस्कृति में भजनों का स्थान अत्यंत ऊंचा है। "धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार" जैसे भजन सामूहिक चेतना को जागृत करते हैं।

आध्यात्मिक महत्व: यह भजन साधक के अहंकार को नष्ट करने में सहायक है। जब हम गाते हैं कि "तेरी जय जैकार", तो हम अपने 'मैं' को छोटा कर ईश्वर के 'विराट' स्वरूप को स्वीकार करते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा कीर्तन करते हैं, मैं उनके योग-क्षेम का वहन करता हूँ।

सांस्कृतिक महत्व: यह भजन विशेष रूप से उत्तर भारत के जागरणों और माता की चौकियों में अत्यंत लोकप्रिय है। यह सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है क्योंकि भक्ति में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। सभी भक्त एक स्वर में जब जयकारा लगाते हैं, तो एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  1. सकारात्मकता: विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर की सत्ता पर विश्वास रखना और यह मानना कि वह राह दिखाएगा।
  2. विनम्रता: यह समझना कि हम केवल निमित्त मात्र हैं, वास्तविक कर्ता तो वह ईश्वर ही है।
  3. एकाग्रता: "मन मंदिर में मूरत तेरी" - यह सिखाता है कि भक्ति केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि है।
  4. धैर्य: ईश्वर की दया पर भरोसा रखना कि वह उचित समय पर हमारी नैया पार लगाएगा।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि ईश्वर का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन के कुछ विशेष अवसर हैं:

  • ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः काल): दिन की शुरुआत ईश्वर की महिमा के साथ करने से मन शांत और ऊर्जावान रहता है।
  • संध्या आरती: दिन भर के कार्यों के बाद ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए।
  • नवरात्रि उत्सव: शक्ति की उपासना के दौरान यह भजन भक्तों में विशेष उत्साह भर देता है।
  • सत्संग एवं कीर्तन: सामूहिक रूप से गाने पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

भजन का नाम धरती गगन में होती है तेरी जय जैकार
मुख्य देवता आद्यशक्ति / परमात्मा (निर्गुण एवं सगुण दोनों भाव)
केंद्रीय भाव महिमामंडन एवं शरणागति
काव्य शैली पद (गेय शैली)
मुख्य संदेश ईश्वर सर्वव्यापी और परम कृपालु है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य ईश्वर की सर्वव्यापकता को स्वीकार करना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण भाव व्यक्त करना है। यह भक्त को याद दिलाता है कि ईश्वर हर जगह मौजूद है।

'मैया' शब्द यहाँ शक्ति स्वरूपा देवी या उस परम सत्ता के लिए प्रयुक्त हुआ है जो जगत की जननी और पालनकर्ता है। भक्त अक्सर ईश्वर को माता के रूप में संबोधित करते हैं क्योंकि माता का प्रेम निस्वार्थ होता है।

नहीं, यद्यपि यह नवरात्रि में बहुत लोकप्रिय है, लेकिन इसे किसी भी शुभ अवसर, दैनिक पूजा या सत्संग में गाया जा सकता है।

इसका अर्थ है कि परमात्मा केवल मंदिरों या मूर्तियों में ही नहीं, बल्कि सृष्टि के हर छोटे-से-छोटे परमाणु में विद्यमान है। यह अद्वैत वेदांत के दर्शन को दर्शाता है।

इसे सुनने या गाने से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और भक्त के भीतर आत्मविश्वास एवं भक्ति भाव का संचार होता है।

इसका तात्पर्य जीवन की कठिनाइयों से उबरना और अंततः जन्म-मृत्यु के चक्र (भवसागर) से मुक्ति प्राप्त करना है।

हाँ, इसकी भाषा सरल है और यह बच्चों में ईश्वर के प्रति श्रद्धा और नैतिक मूल्यों का विकास करने में सहायक है।

यह भजन सरल और खड़ी बोली हिंदी में है, जिससे यह जनमानस के लिए आसानी से समझने योग्य बन जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति और दर्शन के समन्वय के साथ तैयार किया गया है। सामग्री का संपादन धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक भजन परंपराओं के आधार पर किया गया है। "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" का उद्देश्य पाठकों को न केवल लिरिक्स प्रदान करना है, बल्कि उन्हें उस भजन के पीछे छिपे आध्यात्मिक मर्म से भी अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (भक्ति योग अध्याय)
  • सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा
  • भक्ति लोक भजन संग्रह एवं पारंपरिक पांडुलिपियाँ
  • उपनिषद (ईशावास्य उपनिषद के संदर्भ)

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!