"तेरा दर मिल गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो भजन इन हिंदी लिरिक्स" सनातन भक्ति परंपरा और श्री कृष्ण के चरणों में अनन्य समर्पण का एक अत्यंत पावन और भावपूर्ण भजन है। कलयुग के इस भौतिक और दुखों से परिपूर्ण संसार में जब जीवात्मा चारों ओर से निराश हो जाती है, तब केवल बांके बिहारी श्री कृष्ण की शरण ही उसे परम शांति और संबल प्रदान करती है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के हृदय में करुणा, प्रेम, और अगाध विश्वास का संचार करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Refrain):
तेरा दर मिल गया मुझको, सहारा हो तो ऐसा हो,
चरण में थाम लो हमको, गुजारा हो तो ऐसा हो!
भटकता था मैं दर-दर पर, दुखों के भार से थक कर,
कन्हैया हाथ जब पकड़ा, किनारा हो तो ऐसा हो!
प्रथम अंतरा (Stanza 1):
जमाने भर की ठोकर खा के जब मैं आपके आया,
मुझे हर मोड़ पर मोहन तेरा ही प्यार है पाया।
तुम्हारी एक नजर ने तो मेरी तकदीर बदल दी है,
भवर से नाव निकली है, नजारा हो तो ऐसा हो!
तेरा दर मिल गया मुझको, सहारा हो तो ऐसा हो...
द्वितीय अंतरा (Stanza 2):
सुना है पापियों का भी तू, बांके यार होता है,
गिरा हुओं को उठाने को, तेरा दरबार होता है।
दिखा दी तुमने करुणा तो, हमारा दिल भी कह उठा,
भरोसा हो तो ऐसा हो, इशारा हो तो ऐसा हो!
तेरा दर मिल गया मुझको, सहारा हो तो ऐसा हो...
अंतिम अंतरा (Stanza 3):
उम्र भर अब तेरे चरणों की सेवा मैं करूँगा,
तुम्हारी प्रीत का प्याला, खुशी से रोज पिऊंगा।
यही अरमान है दिल में, तुम्हारी छांव में जियूं,
सहारा जो मुझे तुमने दिया, बंजारा हो तो ऐसा हो!
तेरा दर मिल गया मुझको, सहारा हो तो ऐसा हो,
चरण में थाम लो हमको, गुजारा हो तो ऐसा हो!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन जीव और ईश्वर के बीच के उस अटूट रिश्ते को परिभाषित करता है जहाँ अहंकार समाप्त होकर केवल शरणागति शेष रह जाती है। भजन की पहली पंक्तियों में साधक कहता है कि उसे संसार रूपी सागर में भटकने के पश्चात आखिरकार श्री कृष्ण का दिव्य दरबार मिल गया है। जब प्रभु का सहारा मिल जाता है, तो जीवन की सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
आगे के भावार्थ में कवि बताता है कि मनुष्य जब दुनिया के स्वार्थी रिश्तों और दुखों से थक जाता है, तब भगवान कृष्ण के चरणों में ही उसे सच्ची शांति मिलती है। बांके बिहारी की एक कृपालु दृष्टि मात्र से मनुष्य का सोया हुआ भाग्य जाग जाता है और जीवन की नैया भवसागर से पार हो जाती है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची शरण केवल गोविंद के चरणों में ही है। भगवान कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करते और पतित-पावन बनकर हर दीन-दुखी का उद्धार करते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- श्री कृष्ण भक्ति: यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम (राधा-कृष्ण भाव) और समर्पण को जागृत करता है।
- कलयुग में संकीर्तन का महत्व: श्रीमद्भागवत गीता और पुराणों के अनुसार, कलयुग में केवल भगवान का नाम स्मरण और संकीर्तन ही मुक्ति का सरल मार्ग है।
- मानसिक शांति: इस भजन को सुनने या गाने से मन की चंचलता समाप्त होती है और आंतरिक शांति की अनुभूति होती है।
- शरणागति भाव: यह भजन साधक के भीतर पूर्ण समर्पण (शरणागति) का भाव पैदा करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस दिव्य भजन का गायन या श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इसे करने के कुछ विशेष अवसर और समय उत्तम माने जाते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर या संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इसे गाना अत्यंत फलदायी है।
- सत्संग एवं कीर्तन: घर पर होने वाले साप्ताहिक सत्संग, एकादशी जागरण या जन्माष्टमी उत्सव के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
- पूजा गृह में: ठाकुर जी की आरती के बाद शांत चित्त से इस भजन की पंक्तियों का स्मरण करना मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में लीलाधर भगवान श्री कृष्ण (बांके बिहारी, गोपाल, मोहन) हैं। सनातन परंपरा में संत महात्माओं और भजन रसायनों ने समय-समय पर ऐसे भजनों की रचना की है जो सीधे भक्त के हृदय को स्पर्श करते हैं। श्री कृष्ण को 'दीनबंधु' और 'करुणासागर' कहा गया है, जो बिना किसी भेदभाव के अपने हर शरणार्थी की रक्षा करते हैं। अधिक जानने के लिए आप हमारे श्री कृष्ण भजन संग्रह को पढ़ सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भक्ति साहित्य की यह अनमोल कृति पारंपरिक लोक और संत शैली से प्रेरित है। ब्रज संस्कृति और संकीर्तन परंपरा में ऐसे भजनों का विशेष स्थान रहा है। इन्हें गाने वाले कलाकार अपनी सुरीली आवाज में इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि श्रोता भक्ति रस में सराबोर हो जाते हैं। यह रचना किसी एक कालखंड तक सीमित न होकर शाश्वत और सार्वभौमिक है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल और सुबोध हिंदी तथा ब्रजभाषा के संमिश्रण से तैयार किया गया है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसकी लयात्मकता को बढ़ाते हैं। शब्दावली इतनी सरल है कि एक आम ग्रामीण से लेकर शहर का हर आयु वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से समझ और गुनगुना सकता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य अपने बल पर जीता है, तब तक कष्ट पाता है; ईश्वर के चरणों में समर्पण से ही वास्तविक सुख मिलता है।
- धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी प्रभु पर अटूट विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वही एकमात्र सच्चे खेवैया हैं।
- सेवा भाव: जीवन को सत्कर्मों और भगवान की सेवा में समर्पित करना ही मानव जन्म का परम लक्ष्य है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रसंग |
|---|---|---|
| दर | द्वार / चौखट | परमात्मा का पावन शरण स्थल |
| सहारा | संबल / आश्रय | संकट के समय ईश्वर द्वारा दी जाने वाली सहायता |
| भवर | जल का चक्रवात | संसार रूपी मोह-माया और दुखों का चक्र |
| नजारा | दृश्य / अनुभूति | ईश्वर की कृपा होने पर जीवन में आने वाला आनंद |
| शरणागति | पूर्ण समर्पण | अपनी संपूर्ण इच्छाओं को ईश्वर को सौंप देना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तेरा दर मिल गया मुझको, सहारा हो तो ऐसा हो..." - इस पंक्ति में साधक कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है कि संसार की ठोकरें खाने के बाद उसे भगवान का सच्चा आश्रय मिल गया है।
"भटकता था मैं दर-दर पर, दुखों के भार से थक कर..." - यह जीवन की उस वास्तविकता को दर्शाता है जब मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भागते-भागते थक जाता है और अंततः शांति की खोज में प्रभु की शरण में आता है।
"तुम्हारी एक नजर ने तो मेरी तकदीर बदल दी है..." - भगवान की करुणा दृष्टि (कृपा दृष्टि) का वर्णन है, जो पलभर में पापी को भी तार देती है और भाग्य बदल देती है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक का स्मरण किया जा सकता है:
मामेवैष्यसि युक्तायैवमात्मानं मत्परायणः।।"
(अर्थात: निरंतर मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरा पूजन करो और मुझको ही नमस्कार करो। ऐसा करने से तुम निश्चित रूप से मुझको ही प्राप्त होगे।)
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरा दर मिल गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो भजन इन हिंदी लिरिक्स |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान श्री कृष्ण / बांके बिहारी |
| रचना परंपरा | पारंपरिक भक्ति एवं संकीर्तन |
| भाषा | सरल हिंदी एवं ब्रज भाव |
| मुख्य विषय | भक्ति, शरणागति, करुणा और प्रेम |
| स्थाई भाव | समर्पण और आनंद (भक्ति रस) |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री सनातन धर्म के पारंपरिक स्रोतों, संकीर्तन ग्रंथों और श्रीमद्भागवत पुराण के सिद्धांतों पर आधारित है। पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस लेख को तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इसकी भाषा और भाव पक्ष की पूर्ण शुद्धता का ध्यान रखा गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर
- भक्ति रसामृत सिन्धु - सनातन धर्म ग्रंथ
- पारंपरिक लोक संकीर्तन एवं भजन परंपरा
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