करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे भजन - परिचय
सनातन संस्कृति और लोक परंपरा में माँ शक्ति, देवी दुर्गा और विभिन्न लोक देवियों की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह पावन भजन "करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे" सुहागिन महिलाओं की अनन्य निष्ठा, संपूर्ण समर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना का अत्यंत भावुक और जीवंत प्रतीक है। जब एक विवाहित स्त्री अपनी आराध्य मैया के चरणों में बैठकर सिंदूर की रक्षा, अखंड सुहाग, और सुखी पारिवारिक जीवन की प्रार्थना करती है, तो वह केवल एक गीत नहीं होता, बल्कि उसका संपूर्ण अंतःकरण भगवती के चरणों में समर्पित हो जाता है।
यह भजन विशेष रूप से छठ पूजा गीत, नवरात्रि, मंगला गौरी व्रत, और विभिन्न पारिवारिक अनुष्ठानों के दौरान बड़े ही प्रेम और श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'पति की दीर्घायु', 'मांग के सिंदूर की अमरता' और 'हरा-भरा परिवार' है, जो भारतीय संस्कृति में नारी के त्याग, समर्पण और पारिवारिक वात्सल्य की सर्वोच्च भावना को दर्शाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन की परंपरा का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे ॥
करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे,
मेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे मेरे माथे का सिन्धुर धमकता रहे,
चूड़ियों से भरे मेरे हाथ रहे मेरे मांग सिन्धुर की लाज रहे,
करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे ॥
मेरी झोली में चंदा चमकता रहे मेरी चुनरी में सूरज धमकता रहे,
मेरा हरा भरा परिवार रहे मेरे मांग सिन्धुर की लाज रहे,
करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे ॥
मेरे मायेके में फूले फुलवाड़ी ससुराल में जोड़ी अमर रहे,
मेरे सिर पे सदा तेरा हाथ रहे मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे,
करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे ॥
॥ इति सम्पूर्णम ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस लोक भजन की प्रत्येक पंक्ति में भारतीय नारी की मंगल कामना और उसकी गहरी धार्मिक आस्था झलकती है। आइए इसके विस्तृत भावार्थ को समझें:
प्रथम चरण - सौभाग्य की रक्षा: भक्त महिला अपनी आराध्य मैया से कहती है कि हे मैया! मैं पूर्ण विधि-विधान और सच्चे भाव से आपकी पूजा और अर्चना कर रही हूँ। बदले में बस मेरी यही प्रार्थना है कि मेरी मांग का सिंदूर सदा अमर रहे। मेरे माथे की बिंदिया हमेशा चमकती रहे, मेरे हाथों में सुहाग की चूड़ियाँ खनकती रहें और मेरा सुहाग सुरक्षित रहे।
द्वितीय चरण - वंश वृद्धि एवं परिवार की सुख-समृद्धि: भजन में आगे कामना की गई है कि जिस प्रकार आकाश में चंद्रमा अपनी शीतलता और सूरज अपनी तेजस्विता से प्रकाशित रहता है, उसी प्रकार मेरी झोली सदा खुशियों से भरी रहे। मेरा पूरा परिवार हताश या दुखी न हो, बल्कि हमेशा हरा-भरा, सुखी और समृद्ध बना रहे।
तृतीय चरण - मायका, ससुराल और देवी का आशीर्वाद: भारतीय संस्कृति में मायका और ससुराल दोनों का ही विशेष स्थान है। भक्त प्रार्थना करती है कि मेरा मायका हमेशा फूलों की फुलवारी की तरह फलता-फूलता रहे और ससुराल में मेरे सुहाग की जोड़ी सदा अमर रहे। इन सबके ऊपर हमेशा मेरा सिर आपकी शरण में रहे और आपका वरद हस्त (हाथ) मेरे सिर पर सदा बना रहे।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- पारिवारिक सुख की कामना: यह भजन व्यक्तिगत मुक्ति से अधिक संपूर्ण परिवार, मायके और ससुराल के कल्याण की कामना करता है।
- स्त्री शक्ति और सुहाग का प्रतीक: सिंदूर, चूड़ी, बिंदिया और चुनरी सनातन धर्म में अखंड सौभाग्य और सुहाग के प्रतीक हैं।
- लोक संस्कृति का संगम: यह भजन शास्त्रीय संगीत की जटिलताओं से दूर लोक भाषा की मिठास से ओत-प्रोत है, जिसे हर उम्र की महिलाएं आसानी से गा सकती हैं।
- त्योहारों की अनिवार्य प्रस्तुति: छठ पूजा व्रत कथा, हरियाली तीज, करवा चौथ और देवी पूजन के समय यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को मुख्य रूप से व्रत-पर्वों, अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों पर गाया जाता है:
- सुबह और संध्या वंदन: माता के मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करते समय इसे गाया जा सकता है।
- व्रਤ के अनुष्ठान: सरस्वती पूजा, महाष्टमी, और छठी मैया के पूजन के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से इस सुहाग गीत का गान करती हैं।
- सांसारिक मंगल अवसर: विवाह, मुंडन या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में कुलदेवी के पूजन के समय यह भजन वातावरण को पवित्र और ऊर्जावान बनाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से जगदंबा, माता आदिशक्ति, माँ दुर्गा, छठी मैया और विभिन्न स्थानीय लोक देवियों को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ को सृष्टि की जननी और पालनकर्ता माना गया है। जिस प्रकार एक शिशु अपनी माता के सामने अपनी हर छोटी-बड़ी इच्छा प्रकट करता है, उसी प्रकार एक सुहागिन स्त्री अपनी माता रूपी देवी के समक्ष अपने सुहाग और परिवार की रक्षा की गुहार लगाती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| मांग सिंदूर | सुहाग का प्रतीक | विवाहित स्त्री के अखंड सौभाग्य का सूचक |
| फुलवारी | फूलों का बगीचा | मायके में सुख, शांति और समृद्धि का विस्तार |
| धमकता रहे | चमकता रहना / प्रदीप्त रहना | सुहाग की चमक और तेज का हमेशा बना रहना |
| जोड़ी अमर रहे | पति-पत्नी का साथ | अखंड सुहाग और दीर्घायु की कामना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | करू तेरी मैं पूजा मैया मेरे मांग सिंदूर की लाज रहे |
|---|---|
| समर्पित देवी | माता दुर्गा, छठी मैया, कुलदेवी |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, सुहाग रक्षा एवं पारिवारिक सुख |
| उपयुक्त अवसर | छठ पूजा, नवरात्रि, व्रत एवं मांगलिक उत्सव |
| श्रेणी | लोक भजन / सुहाग गीत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रશ્न 1: यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन मुख्य रूप से छठ पूजा, हरियाली तीज, करवा चौथ, नवरात्रि और माता के जागरण के समय सुहागिन महिलाओं द्वारा गाया जाता है।
प्रश्न 2: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, अखंड सौभाग्य की रक्षा और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना करना है।
प्रश्न 3: क्या इस भजन को पुरुष भी गा सकते हैं?
हाँ, भजन भगवती की आराधना का माध्यम है, यद्यपि इसके शब्द सुहागिन महिलाओं की भावना पर आधारित हैं, फिर भी परिवार के कल्याण की कामना हेतु कोई भी इसे सुन या गा सकता है।
प्रश्न 4: भजन में 'मांग सिंदूर की लाज रहे' का क्या तात्पर्य है?
इसका तात्पर्य पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुहाग की अमरता की रक्षा करने की देवी से गुहार लगाना है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
Bhaktilok.in पर प्रस्तुत यह भजन और उसकी व्याख्या पारंपरिक लोक-साहित्य, व्रत कथाओं और सनातन संस्कृति के मान्य सिद्धांतों पर आधारित है। इसे पाठकों की सहजता और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संपादित किया गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — Bhaktilok Editorial Board
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन लोकगीत और सुहाग परंपरा संग्रह।
- छठ पर्व एवं देवी उपासना की पारंपरिक लोक कथाएं।
- भक्ति संगीत एवं संकीर्तन परंपरा के मौखिक एवं लिखित स्त्रोत।
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