भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चोंक चोराहो पर मौत खड़ी है फिर विपदा आई भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें चोंक चोराहो पर मौत खड़ी है फिर विपदा आई भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

यह हृदयस्पर्शी और करुणा से परिपूर्ण भजन "चोंक चोराहो पर मौत खड़ी है फिर विपदा आई" आधुनिक युग के सबसे संवेदनशील और भावुक भजनों में से एक है। इस भजन की रचना और गायन प्रसिद्ध भजन गायक अभिषेक अग्रवाल द्वारा किया गया है। यह भजन विशेष रूप से उस समय की विभीषिका, मानवीय असहायता और ईश्वर के प्रति अनन्य समर्पण को दर्शाता है जब मनुष्य चारों ओर से संकटों से घिर जाता है। सनातन धर्म में 'आर्त भाव' की भक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जहां भक्त अपनी समस्त शक्तियों को सीमित पाकर पूर्ण रूप से परमात्मा की शरण में चला जाता है। इस भजन में श्री खाटू श्याम जी (सांवरिया सेठ) से संकट काल में रक्षा की गुहार लगाई गई है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि संकट के समय में मानवता की सामूहिक पुकार और अटूट विश्वास का जीवंत दस्तावेज है, जो साधक के अंतर्मन में ईश्वर के प्रति अगाध श्रद्धा का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चोंक चौराहों पर मौत खड़ी है, फिर विपदा आई भारी है।
अब तो बचा लो सांवरिया, तेरी ही शरण तिहारी है॥

चारों तरफ है हाहाकार, कोई न सुनता अब पुकार।
हे करुणाकर, हे दीनानाथ, अब थाम लो आकर मेरा हाथ।
तेरे बिना कोई और नहीं, जो संकट हरे हमारी है॥

दुनिया के सब रिश्ते नाते, मुश्किल में काम नहीं आते।
जब चारों ओर अंधेरा हो, बस तेरा ही एक सवेरा हो।
हे श्याम बहादुर, हे कृपाल, अब लाज बचाना तुम्हारी है॥

भक्तों की रक्षा तुमने की, हर युग में लाज बचाई है।
अभिषेक खड़ा है द्वारे पे, तेरी महिमा जग ने गाई है।
अब दया करो हे दीनबंधु, ये अर्जी आज हमारी है॥

चोंक चौराहों पर मौत खड़ी है, फिर विपदा आई भारी है।
अब तो बचा लो सांवरिया, तेरी ही शरण तिहारी है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और मर्मस्पर्शी है। यह भजन संसार की नश्वरता और संकट काल में केवल ईश्वर की सत्ता की सर्वोच्चता को प्रतिपादित करता है। जब मनुष्य जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती हैं जहां विज्ञान, धन, वैभव और सांसारिक संबंध निष्प्रभावी हो जाते हैं, तब केवल एक ही मार्ग बचता है—परमात्मा की शरण।

भजन की शुरुआत में ही भक्त अपनी लाचारी और भय को स्वीकार करता है कि हर मोड़ पर संकट और मृत्यु का साया मंडरा रहा है। ऐसी विषम परिस्थिति में वह अपने आराध्य 'सांवरिया' को पुकारता है। यहाँ 'सांवरिया' शब्द भगवान श्री कृष्ण और उनके कलयुगी अवतार श्री खाटू श्याम जी के लिए प्रयुक्त हुआ है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! अब इस भारी विपदा से केवल आप ही हमें बचा सकते हैं, क्योंकि हमने आपके चरणों में पूर्ण समर्पण कर दिया है।

आगे के पदों में सांसारिक संबंधों की सीमाओं को दर्शाया गया है। संकट के समय जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब केवल ईश्वर ही एकमात्र सहारा बनते हैं। यह भजन कलयुग के जीवों को यह संदेश देता है कि चाहे कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए, यदि हमारा विश्वास अटूट है, तो प्रभु अवश्य ही हमारी रक्षा के लिए दौड़े चले आएंगे। यह आर्त पुकार भक्त और भगवान के बीच के उस संबंध को उजागर करती है जो केवल प्रेम और विश्वास की डोर से बंधा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन कई मायनों में विशिष्ट है और इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यंत उच्च है:

  • आर्त भाव की पराकाष्ठा: श्रीमद्भगवद्गीता में चार प्रकार के भक्तों (आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी) का वर्णन है। यह भजन 'आर्त भक्त' की श्रेणी में आता है, जो संकट के समय भगवान को अत्यंत व्याकुलता से पुकारता है।
  • कलयुग में नाम संकीर्तन का महत्व: कलयुग में केवल प्रभु का नाम ही समस्त दुखों से पार लगाने वाला है। इस भजन का निरंतर गान मानसिक शांति और सुरक्षा का अहसास कराता है।
  • समर्पण की भावना: यह भजन सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार और कर्तापन को त्यागकर भगवान के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तब भगवान स्वयं हमारे योगक्षेम की जिम्मेदारी लेते हैं।
  • सामूहिक प्रार्थना की शक्ति: संकट के समय जब पूरा समाज या विश्व इस भजन के माध्यम से प्रार्थना करता है, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है जो भय के वातावरण को समाप्त करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु संकट काल, मानसिक अशांति या संध्या काल की प्रार्थना के समय इसका विशेष महत्व है:

  • संध्या आरती के समय: घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर, शांत चित्त से इस भजन का श्रवण या गायन करना चाहिए।
  • संकट काल में: जब भी मन में भय, असुरक्षा या व्याकुलता हो, तब इस भजन को एकांत में बैठकर सुनने से अद्भुत मानसिक बल प्राप्त होता है।
  • गायन की विधि: इसे गाते समय मन में श्री खाटू श्याम जी या भगवान श्री कृष्ण की छवि का ध्यान करना चाहिए। अश्रुपूरित नेत्रों और सच्चे हृदय से की गई पुकार सीधे प्रभु तक पहुंचती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से कलयुग के अवतारी देव श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है। खाटू श्याम जी को महाभारत काल के वीर बर्बरीक का अवतार माना जाता है, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि वे कलयुग में उनके नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे। वे 'हारे का सहारा' कहलाते हैं। जब भी कोई भक्त जीवन की बाजी हार जाता है या अत्यंत संकट में होता है, तब श्याम बाबा उसकी ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं। इस भजन के माध्यम से गायक अभिषेक अग्रवाल ने उसी परम कृपालु देव से संपूर्ण जगत के कल्याण की प्रार्थना की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक काल की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की गई है। जब संपूर्ण विश्व अदृश्य महामारियों और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा था, तब चारों ओर भय और निराशा का माहौल था। ऐसे समय में जब मानवीय प्रयास असफल प्रतीत हो रहे थे, तब इस भजन का प्राकट्य हुआ। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म या जीवन पर संकट आता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में हमारी रक्षा करते हैं। लेखक ने अपनी व्यक्तिगत और वैश्विक पीड़ा को शब्दों में पिरोकर इस कालजयी भजन का निर्माण किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गेय है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक सीधे हृदय को छूते हैं। 'मौत खड़ी है' और 'विपदा आई भारी है' जैसे बिंब पाठक के मन में तात्कालिक संकट की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं, वहीं 'सांवरिया' और 'दीनबंधु' जैसे शब्द आशा और सुरक्षा की किरण जगाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. संसार की नश्वरता: यह भजन हमें याद दिलाता है कि सांसारिक सुख, साधन और संबंध स्थायी नहीं हैं। संकट के समय केवल ईश्वर ही सच्चे साथी हैं।
  2. धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य और ईश्वर पर विश्वास नहीं खोना चाहिए।
  3. अहंकार का त्याग: जब मनुष्य यह मान लेता है कि वह सब कुछ स्वयं कर सकता है, तब प्रकृति उसे उसकी सीमाओं का आभास कराती है। समर्पण ही शांति का मार्ग है।
  4. प्रार्थना की शक्ति: सच्ची प्रार्थना में इतनी शक्ति होती है कि वह नियति को भी बदल सकती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
विपदा संकट या भारी मुसीबत सांसारिक और दैहिक कष्ट जो मनुष्य को विचलित करते हैं।
सांवरिया श्याम वर्ण वाले भगवान कृष्ण / खाटू श्याम भक्तों के दुखों को हरने वाले कृपालु देव।
हाहाकार क्रंदन, चीख-पुकार या त्राहि-त्राहि संसार में फैली अशांति और भय का वातावरण।
करुणाकर करुणा करने वाले, दया के सागर ईश्वर का वह रूप जो जीवों पर बिना किसी शर्त के दया करता है।
दीनबंधु गरीबों और असहायों के भाई/रक्षक भगवान का वह नाम जो दर्शाता है कि वे निर्बलों के रक्षक हैं।
अर्जी प्रार्थना या याचना भक्त द्वारा भगवान के चरणों में लगाई गई गुहार।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"चोंक चौराहों पर मौत खड़ी है, फिर विपदा आई भारी है।"
अर्थ: जीवन के हर मोड़ और चौराहे पर संकट और मृत्यु का भय व्याप्त है। संसार पर एक बार फिर से बहुत बड़ी विपत्ति आ गई है जिससे पार पाना मानव शक्ति के बाहर है।

"अब तो बचा लो सांवरिया, तेरी ही शरण तिहारी है॥"
अर्थ: हे मेरे सांवरिया सेठ! अब केवल आप ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। हमने अपनी बुद्धि और बल का अहंकार छोड़कर पूरी तरह से आपकी शरण ले ली है।

"चारों तरफ है हाहाकार, कोई न सुनता अब पुकार।"
अर्थ: संसार में चारों ओर दुख और पीड़ा का हाहाकार मचा हुआ है। हर व्यक्ति अपने ही कष्टों में इतना व्यस्त है कि कोई किसी दूसरे की पुकार सुनने वाला नहीं है।

"हे करुणाकर, हे दीनानाथ, अब थाम लो आकर मेरा हाथ।"
अर्थ: हे दया के सागर, हे अनाथों के नाथ! अब आप स्वयं आकर हमारा हाथ थाम लीजिए ताकि हम इस भवसागर और संकट से पार उतर सकें।

"दुनिया के सब रिश्ते नाते, मुश्किल में काम नहीं आते।"
अर्थ: सांसारिक संबंध केवल सुख के साथी होते हैं। जब वास्तविक और भीषण संकट आता है, तब ये भौतिक रिश्ते-नाते धरे के धरे रह जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के शरणागति के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह प्रसिद्ध श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है:

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥

(श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 18, श्लोक 66)

अर्थ: भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि सभी धर्मों (कर्तव्यों और आश्रयों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों और कष्टों से मुक्त कर दूंगा, तुम शोक मत करो। यही भाव इस भजन का मूल आधार है। इसके साथ ही श्री खाटू श्याम चालीसा का पाठ भी भक्तों को असीम संबल प्रदान करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चोंक चोराहो पर मौत खड़ी है फिर विपदा आई
समर्पित देव श्री खाटू श्याम जी / भगवान श्री कृष्ण
गायक व रचयिता अभिषेक अग्रवाल
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
भक्ति का भाव आर्त भाव, पूर्ण शरणागति, करुणा रस
उपयुक्त अवसर दैनिक संध्या आरती, संकट काल, एकादशी, श्याम संकीर्तन
मुख्य संदेश संकट में केवल ईश्वर ही एकमात्र रक्षक और सहारा हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "चोंक चोराहो पर मौत खड़ी है" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस अत्यंत भावुक और लोकप्रिय भजन के मुख्य गायक और रचयिता अभिषेक अग्रवाल हैं।

प्रश्न 2: यह भजन किस देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन मुख्य रूप से 'हारे के सहारे' भगवान श्री खाटू श्याम जी (सांवरिया सेठ) को समर्पित है।

प्रश्न 3: इस भजन को गाने या सुनने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?
उत्तर: इस भजन को सुबह या शाम की पूजा के समय, अथवा जब भी मन अशांत या भयभीत हो, तब सुनना अत्यंत फलदायी होता है।

प्रश्न 4: इस भजन में 'सांवरिया' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'सांवरिया' शब्द भगवान श्री कृष्ण और उनके कलयुगी स्वरूप श्री खाटू श्याम जी के लिए आदर और प्रेम से प्रयुक्त किया गया है।

प्रश्न 5: यह भजन हमें क्या आध्यात्मिक सीख देता है?
उत्तर: यह भजन हमें सिखाता है कि सांसारिक साधन सीमित और नश्वर हैं। अंतिम संकट के समय केवल ईश्वर की शरण ही सच्ची सुरक्षा प्रदान करती है।

प्रश्न 6: क्या इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है?
उत्तर: हाँ, इस भजन के शब्द और धुन मन से भय को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा और असीम मानसिक शांति का संचार करते हैं।

प्रश्न 7: इस भजन में 'अर्जी' शब्द का क्या महत्व है?
उत्तर: 'अर्जी' का अर्थ है प्रार्थना पत्र। भक्त अपनी व्यथा और रक्षा की गुहार भगवान के दरबार में अर्जी के रूप में लगाता है, जो कि श्याम भक्ति की एक पारंपरिक पद्धति है।

प्रश्न 8: क्या यह भजन किसी विशेष संकट काल की पृष्ठभूमि में लिखा गया है?
उत्तर: हाँ, यह भजन वैश्विक संकट और मानवीय असहायता के दौर में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास जगाने के लिए रचा गया था।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख और भजन का विश्लेषण "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वान संपादकीय टीम ने इस भजन के साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन अध्ययन कर इसे तैयार किया है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य कलयुग के कठिन समय में मानव मन को संबल प्रदान करना और ईश्वर के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (शरणागति योग और आर्त भक्ति प्रसंग)
  • श्री खाटू श्याम महात्म्य एवं पौराणिक आख्यान
  • पारंपरिक श्याम संकीर्तन पद्धति एवं भजन संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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