भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जब से लिया हम ने तेरा नाम भजन इन हिंदी

पढ़ें जब से लिया हम ने तेरा नाम भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सम्पूर्ण परिचय एवं भक्ति रस

सनातन धर्म और विशेष रूप से उत्तर भारत की अनन्य भक्ति परंपरा में संकीर्तन, नाम-स्मरण और प्रभु के श्रीचरणों में पूर्ण शरणागति का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह पावन भजन "जब से लिया हम ने तेरा नाम हैं" भगवान श्री कृष्ण के परम स्वरूप, हारे के सहारे, कलियुग के जीवंत देवता खाटू श्याम बाबा को समर्पित एक अत्यंत हृदयस्पर्शी एवं भावपूर्ण रचना है। कलियुग में जहां चारों ओर संताप, भौतिकता की दौड़ और मानसिक अशांति का साम्राज्य है, वहीं ईश्वर का नाम ही एकमात्र ऐसी नौका है जो जीवात्मा को इस भवसागर से पार लगा सकती है। इस भजन का मुख्य भाव साधक के भीतर उत्पन्न होने वाले उस गाढ़ अनुराग, आत्मसमर्पण और अगाध विश्वास का प्रतीक है, जो बाबा श्याम के चरणों में पहुंचने मात्र से जागृत हो जाता है। जब कोई भक्त सच्चे हृदय से 'श्याम' नाम का स्मरण करता है, तो उसके जीवन के समस्त संताप, अंधकार और चिंताएं स्वतः ही विलीन होने लगती हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, शब्द-दर-शब्द भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और जीवन पर इसके प्रभाव का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| जब से लिया हमने तेरा नाम हैं ||

जब से लिया हमने तेरा नाम हैं
जिसे हमने पहचान लिया है
कोई और नहीं वह यही है
खाटू वाला श्याम है
|| जब से लिया हमने तेरा नाम हैं ||

खाटू में आ कर के हम खो गए
तेरी गोद में बाबा हम सो गए
ऐ सांवरे हम तुम और हमारा हो गया
|| जब से लिया हमने तेरा नाम हैं ||

जो भी परेशानी से परेशान है
आकर यहां मुस्कान मिलती है
जग में सभी कृपा तेरी देखकर हैरान है
|| जब से लिया हमने तेरा नाम हैं ||

बाबा तेरा पे हमें जाना
बाबुल के जैसा प्यार पाना हमें
कहते हैं किशन ये जीवन साथ निभाना है हमें
|| जब से लिया हमने तेरा नाम हैं ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों की माला नहीं, बल्कि एक भक्त की आत्मीय पुकार है जो अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम और अटूट विश्वास को व्यक्त करती है। भजन की प्रथम पंक्तियां कहती हैं — "जब से लिया हमने तेरा नाम हैं, जिसे हमने पहचान लिया है, कोई और नहीं वह यही है खाटू वाला श्याम है।" इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि इस नश्वर संसार में भटकते हुए जब जीवात्मा को सच्चे इष्ट की पहचान हो जाती है, तब उसे यह बोध होता है कि उसका वास्तविक रक्षक और कोई नहीं बल्कि हारे का सहारा खाटू श्याम बाबा ही हैं। नाम स्मरण से जीवन की भटकन समाप्त हो जाती है और लक्ष्य की प्राप्ति हो जाती है।

अगली पंक्तियों में भक्त अपने आराध्य के दरबार की अलौकिक शांति का वर्णन करते हुए गाता है — "खाटू में आ कर के हम खो गए, तेरी गोद में बाबा हम सो गए, ऐ सांवरे हम तुम और हमारा हो गया।" यह पंक्ति अद्वैत भक्ति और परम शरणागति (Surrender) की पराकाष्ठा है। जिस प्रकार एक बालक अपनी माता की गोद में आकर समस्त भय और चिंताओं से मुक्त होकर निश्चिंत सो जाता है, ठीक उसी प्रकार खाटू धाम के प्रांगण में पहुंचते ही भक्त का अहंकार और उसकी समस्त चिंताएं समाप्त हो जाती हैं। 'हम, तुम और हमारा एक हो जाना' जीव और ब्रह्म के पूर्ण मिलन का प्रतीक है, जहां द्वैत समाप्त होकर केवल प्रेम शेष रहता है।

भजन का अगला चरण लोक-कल्याण और बाबा की अहेतु कृपा को रेखांकित करता है — "जो भी परेशानी से परेशान है, आकर यहां मुस्कान मिलती है, जग में सभी कृपा तेरी देखकर हैरान है।" कलियुग में दुःख और संताप से घिरे मनुष्य जब बाबा के दरबार में अपनी अर्जी लेकर आते हैं, तो उनकी सूनी झोली भर जाती है और उनके चेहरों पर मुस्कान लौट आती है। दुनिया के लोग जब उस असीम कृपा को देखते हैं तो वे भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अंत में भक्त निवेदन करता है — "बाबा तेरा पे हमें जाना, बाबुल के जैसा प्यार पाना हमें, कहते हैं किशन ये जीवन साथ निभाना है हमें।" यहां बाबा को 'बाबुल' (पिता) के समान स्नेह देने वाला मानकर उनके साथ आजीवन जुड़े रहने और भवसागर पार करने की प्रार्थना की गई है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस लोकप्रिय श्याम भजन की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता इसके सरल शब्दों और गहरे भाव में निहित है। खाटू श्याम जी को भगवान श्री कृष्ण का ही कलयुगी अवतार माना जाता है, जिन्होंने बर्बरीक के रूप में अपने शीश का दान देकर कलयुग में पूजित होने का वरदान प्राप्त किया था। यह भजन भक्तों के बीच सामूहिक संकीर्तन, खाटू श्याम जागरण, एकादशी महोत्सव और फाल्गुन मेलों के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इसमें निहित समर्पण का भाव भक्तों को मानसिक संबल प्रदान करता है और जीवन की विषम परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के नियमानुसार किसी भी पावन भजन का गायन या श्रवण पवित्र मन और शांत चित्त से किया जाना चाहिए। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से गाया जा सकता है:

  • प्रतिदिन प्रातः काल की पूजा के पश्चात या संध्या कालीन आरती के समय।
  • शुक्ल पक्ष की एकादशी या द्वादशी के पावन अवसर पर खाटू श्याम जी के स्मरण हेतु।
  • घर में आयोजित होने वाले श्री श्याम सत्संग, संकीर्तन या चौकी के दौरान।
  • फाल्गुन मास के वार्षिक मेले या खाटू धाम की यात्रा के मार्ग में।
  • जब भी मन विचलित हो या जीवन में किसी प्रकार की मानसिक परेशानी या संकट का अनुभव हो।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) हैं, जो महाभारत काल के महान योद्धा घटोत्कच के पुत्र और मौरवी के नंदन हैं। भगवान श्री कृष्ण के आशीर्वाद से वे कलयुग में 'हारे के सहारे' के रूप में पूजे जाते हैं। इस भजन के रचयिता और गायकों ने लोक-भाषा और सरल शैली का प्रयोग करके इसे जन-जन तक पहुंचाया है, जिससे हर आयु वर्ग का भक्त इससे सहज ही जुड़ जाता है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

श्याम संकीर्तन की परंपरा में आधुनिक काल में अनेक भजन प्रेमियों और गीतकारों ने बाबा की महिमा पर अनगिनत रचनाएं की हैं। यह भजन उसी लोक-साहित्य का एक अनुपम उदाहरण है, जिसमें ब्रज और राजस्थानी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'सांवरे', 'बाबुल', और 'खाटू वाला' सीधे राजस्थान की पावन माटी और खाटू धाम की संस्कृति से जुड़े हैं, जो सुनने वाले के हृदय को तुरंत द्रवित कर देते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और राजस्थानी-ब्रज मिश्रित लोक-बोली में रचित है। इसमें अलंकारों के जटिल प्रयोग के स्थान पर सीधे और हृदयस्पर्शी भावों को प्रधानता दी गई है। 'अनुप्रास' और 'रूपक' अलंकार का सहज प्रयोग इस भजन के सौंदर्य को और अधिक बढ़ा देता है। इसकी लयबद्धता ऐसी है कि एक बार सुनने के बाद कोई भी इसे आसानी से गुनगुना सकता है, जो लोकगीतों और भजनों की सबसे बड़ी विशेषता होती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें जीवन के गहरे दार्शनिक और आध्यात्मिक सूत्र छिपे हैं:

  • पूर्ण शरणागति: भगवान के चरणों में अपने अहंकार को त्यागकर पूरी तरह समर्पित हो जाना ही सच्ची भक्ति है।
  • संकट में संबल: दुनिया चाहे साथ छोड़े, किंतु इष्ट पर अटूट विश्वास हो तो हर संकट से पार पाया जा सकता है।
  • पितृवत स्नेह: ईश्वर केवल एक शक्ति नहीं, बल्कि हमारे परम पिता (बाबुल) हैं जो हर परिस्थिति में हमारी रक्षा करते हैं।
  • संतोष और शांति: भौतिकता की दौड़ से दूर प्रभु के चरणों में ही वास्तविक शांति और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
खाटू वाला श्याम राजस्थान के खाटू धाम में विराजमान भगवान श्री कृष्ण (बर्बरीक) कलयुग के आराध्य और हारे के सहारे
सांवरे सांवले रंग वाले भगवान श्री कृष्ण भक्तों के प्रियतम और स्नेह के प्रतीक
बाबुल पिता परम पिता परमात्मा का वात्सल्य प्रेम
संकीर्तन ईश्वर के गुणों और नामों का सामूहिक गान कलियुग में मोक्ष का सुगम साधन
शरणागति खुद को पूरी तरह भगवान को सौंप देना अहंकार का नाश और परम शांति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: जब से लिया हमने तेरा नाम हैं, जिसे हमने पहचान लिया है...

अर्थ: जब से मनुष्य ने सांसारिक प्रपंचों को छोड़कर अपने वास्तविक इष्ट का नाम जपना शुरू किया है, तब से उसे यह ज्ञान हो गया है कि इस संसार में उसका अपना और सच्चा रक्षक केवल खाटू श्याम बाबा ही हैं।

पंक्ति: खाटू में आ कर के हम खो गए, तेरी गोद में बाबा हम सो गए...

अर्थ: खाटू धाम की अलौकिक ऊर्जा और बाबा के दरबार में पहुंचते ही भक्त का मन सभी चिंताओं से मुक्त हो जाता है और वह परम आनंद की अवस्था में मग्न हो जाता है।

पंक्ति: जो भी परेशानी से परेशान है, आकर यहां मुस्कान मिलती है...

अर्थ: संसार के दुखों और परेशानियों से हारे हुए लोग जब बाबा के दरबार में आते हैं, तो उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उनके चेहरों पर खुशी लौट आती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

खाटू श्याम बाबा के स्मरण और इस भजन के पाठ के दौरान निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः ||

हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा। शीश के दानी की जय!

इसके साथ ही सनातन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण के मूल मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करने से भी श्याम बाबा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम जब से लिया हम ने तेरा नाम हैं
आराध्य देवता खाटू श्याम बाबा (श्री कृष्ण रूपी बर्बरीक)
भक्ति परंपरा श्याम संकीर्तन एवं वैष्णव भक्ति
भाषा सरल हिंदी एवं लोक-बोली
मुख्य भाव प्रेम, अनन्य समर्पण और शरणागति
उपयुक्त अवसर श्याम सत्संग, एकादशी, जागरण और मंदिर दर्शन
प्रमुख संदेश नाम स्मरण से समस्त संकटों का निवारण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन भजन कलयुग के अवतार, हारे के सहारे खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को समर्पित है।

इस भजन को प्रातः काल की पूजा के समय, संध्या आरती में, अथवा एकादशी के पावन व्रत पर किसी भी समय श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

खाटू श्याम बाबा महाभारत कालीन योद्धा बर्बरीक हैं, जिन्होंने भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था और कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान पाया था।

भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास, पूर्ण शरणागति और नाम-स्मरण के माध्यम से जीवन के सभी दुखों से मुक्ति पाना है।

हाँ, यह भजन सामूहिक संकीर्तन और श्याम चौकियों के लिए अत्यंत लोकप्रिय और उपयुक्त है।

भक्तों को हमेशा सत्य बोलना चाहिए, दीन-दुखियों की सहायता करनी चाहिए और अपने इष्ट पर पूर्ण भरोसा रखना चाहिए।

एकादशी का दिन भगवान विष्णु और उनके अवतारों को समर्पित होता है। इस दिन श्याम भजन सुनने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

निश्चित रूप से, प्रभु के नाम का स्मरण और भावपूर्ण पाठ मानसिक तनाव को दूर कर आंतरिक शांति प्रदान करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा, खाटू श्याम महिमा और लोक-भक्ति साहित्य के अध्ययन पर आधारित है। पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने और शुद्ध भक्ति भाव जगाने के उद्देश्य से इसे तैयार किया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो पूरी तरह से प्रामाणिक परंपराओं और जन-विश्वास पर आधारित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री श्याम स्तुति एवं संकीर्तन संग्रह, खाटू धाम प्रकाशन।
  • सनातन भक्ति ग्रंथ एवं कलयुग में नाम-स्मरण महिमा।
  • पारंपरिक श्याम भजन लोक-साहित्य एवं संकीर्तन पुस्तिकाएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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