भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा भजन इन हिंदी

पढ़ें हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा" यह भजन कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा और मीराबाई की अनन्य विरह वेदना का एक अत्यंत भावपूर्ण चित्रण है। मीराबाई, जो स्वयं प्रेम और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं, इस भजन के माध्यम से अपने आराध्य श्री कृष्ण को पुकार रही हैं। यह भजन न केवल मीरा के विरह को दर्शाता है, बल्कि एक भक्त की उस व्याकुलता को भी व्यक्त करता है जहाँ उसे संसार के सारे बंधन गौण लगने लगते हैं और केवल प्रभु का सानिध्य ही एकमात्र लक्ष्य रह जाता है। कलयुग में जब मन अशांत हो, तब इस प्रकार के भजनों का गायन और श्रवण हृदय को निर्मल करने वाला और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा,
हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा।

बालक सी मैं व्याह करवाया तेरे संग मैं व्याही हो,
पीहर छोड़ सासरे आ गी ल्यादी कुल कशाही हो,
धोवे अकेली मीरा,
हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा।

रोम रोम में रम्या होया से नही रोम से न्यारा हो,
दुष्टों का संगार करा तने बन भगतो का प्यारा हो,
हो जंग जावे अकेली मीरा,
हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा।

आदम देह के चोले के संग दूत रहे सयम के हो,
सतरंग सहज बिछा राखी से लगे गलीचे गम के हो,
सोवे अकेली मीरा,
हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा।

मांगे राम राम ने टोहवे कोना पावे दर पे हो,
लखमी चंद सुरग में जा लिए फिर भी भोजा सिर पे हो,
रोवे अकेली मीरा,
हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में मीराबाई की विरह अवस्था का वर्णन है। मीरा कहती हैं कि हे नन्द के दुलारे! मैं यहाँ अकेली रो रही हूँ, आप आकर मुझे दर्शन दें। मीरा अपने विवाह का स्मरण करते हुए कहती हैं कि मैंने तो बचपन से ही आपको अपना पति मान लिया था। सांसारिक मर्यादाओं और कुल की लोक-लाज को छोड़कर मैं आपकी शरण में आई हूँ।

भजन की पंक्तियों में मीरा का यह भाव है कि प्रभु कण-कण में व्याप्त हैं। वे दुष्टों का विनाश करने वाले और भक्तों के रक्षक हैं। मीरा कहती हैं कि इस नश्वर शरीर में रहते हुए भी मैं आपके विरह की अग्नि में जल रही हूँ। अंत में, कवि 'मांगे राम' और 'लखमी चंद' के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि प्रभु को ढूँढने के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है, वे तो हृदय में ही विराजमान हैं, बस उन्हें पुकारने की सच्ची लगन होनी चाहिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति भाव: यह भजन 'विरह भक्ति' का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • समर्पण: मीराबाई का अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण इसमें झलकता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: संसार की नश्वरता और ईश्वर की शाश्वतता का बोध।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन लोक-भजन परंपरा का हिस्सा है, जो ग्रामीण और शहरी सत्संगों में अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को एकांत में, संध्या के समय या ब्रह्ममुहूर्त में गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे गाते समय मन में श्री कृष्ण की छवि का ध्यान करना चाहिए। यदि आप इसे किसी सत्संग में गा रहे हैं, तो इसे धीमी लय और करुण रस के साथ गाना चाहिए ताकि सुनने वालों के हृदय में भी भक्ति का संचार हो सके।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
नन्द के दुलारे नन्द बाबा के प्रिय (श्री कृष्ण) ईश्वर को पुकारने हेतु
कुल कशाही कुल की मर्यादाओं को त्यागने वाली मीरा का सांसारिक त्याग
रोम-रोम प्रत्येक कण में ईश्वर की व्यापकता
आदम देह मानव शरीर नश्वरता का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा
आराध्य श्री कृष्ण
भक्ति भाव विरह और समर्पण
भाषा हिंदी (लोक शैली)
उपयुक्त अवसर सत्संग, एकांत साधना, कीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: मीराबाई के भजनों का मुख्य विषय क्या होता है?

मीराबाई के भजनों का मुख्य विषय श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, विरह और संसार से विरक्ति होता है।

Q2: क्या यह भजन किसी विशेष उत्सव पर गाया जा सकता है?

हाँ, इसे जन्माष्टमी, मीरा जयंती या किसी भी कृष्ण कीर्तन के अवसर पर गाया जा सकता है।

Q3: इस भजन का आध्यात्मिक संदेश क्या है?

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए सांसारिक बंधनों को छोड़कर पूर्ण शरणागति आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति साहित्य और लोक परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है। मीराबाई की भक्ति परंपरा को समझने के लिए आप मीराबाई का जीवन परिचय और कृष्ण भक्ति मार्ग के लेखों को भी पढ़ सकते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • मीराबाई पदावली (प्रामाणिक संस्करण)
  • भारतीय लोक भजन परंपरा
  • भक्ति आंदोलन का इतिहास

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!