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माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी लिरिक्स (Maa Murade Pooree Karade Halava Batungi)

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित माँ दुर्गा का यह लोकप्रिय भजन पढ़ें और भक्ति का आनंद लें।

देवी भजन & माता रानी संकीर्तन

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी लिरिक्स || Maa murade pooree karade halava batungi lyrics in hindi

प्रकाशन तिथि: जनवरी 2025 • साधना एवं भक्ति रस • पढ़ने में समय: 8-10 मिनट

भक्ति की पावन धारा में जगत जननी माँ आदिशक्ति दुर्गा की आराधना का विशेष स्थान है। जब भक्त का हृदय श्रद्धा और अगाध विश्वास से भर जाता है, तो वह अपनी दीन-दुखियों की पुकार को अत्यंत ही सरल और भावुक शब्दों में माँ के चरणों में अर्पित करता है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भाव-विभोर कर देने वाला भजन है— "माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी"। यह भजन शेरावाली माता के दरबार में लगाई जाने वाली उस अनन्य पुकार का प्रतीक है जहाँ भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता को अपनी श्रद्धा का मिष्ठान्न (हलवे का प्रसाद) चढ़ाने का संकल्प लेता है। इस विस्तृत लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, गायन की विधि, माता के दरबार की महिमा और इसके आध्यात्मिक संदेश पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप माता की आराधना में पूर्ण रूप से तल्लीन हो सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

// मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें //

माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी।
ज्योत जगा के, सर को झुका के,
मैं मनाऊंगी, दर पे आउंगी, मनाऊंगी, मैं आउंगी॥

संतो महंतो को बुला के घर में कराऊं जगराता。
सुनती है सब की फ़रिआदे, मेरी भी सुन लेगी माता।
झोली भरेगी, संकट हरेगी, भेटा गाऊँगी,
मैं मनाऊंगी, भेटें गाऊँगी, मनाऊंगी, मैं आउंगी॥

दिल से सुनो शेरा वाली माँ, खड़ी मैं बन के सवाली।
झोली भरो मेरी रानी वाली माँ, गोदी है लाल से खाली।
कृपा करो, गोदी भरो, मैं दर पे आउंगी, मैं भेटें गाऊँगी,
मैं आउंगी, मैं गाऊँगी, मैं आउंगी॥

भवन तेरा है सब से ऊँचा माँ, और गुफा तेरी नयारी।
भाग्य विदाता ज्योता वाली माँ, कहती है दुनिया सारी।
दाति तुम्हारा, ले के सहारा, मैं दर पे आउंगी, मैं भेटे गाऊँगी,
मैं आउंगी, मैं गाऊँगी, मैं आउंगी॥

कृपा करो वरदानी माँ, छाया है गम का अँधेरा।
तेरे बिना मेरा कोई ना, मुझ को भरोसा है तेरा।
दाति तुम्हारा, ले के सहारा, दर पे आउंगी, मैं भेटे गाऊँगी !!

नोट: इस भजन को नवरात्रि, मंगलवार या शुक्रवार की संध्या को माँ की चौकी या जागरण के दौरान पूर्ण श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है। माता रानी के अन्य भजनों के लिए आप श्री दुर्गा चालीसा और माता की आरती का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी आराध्य देवी के प्रति अनन्य समर्पण और विनय की गाथा है। भक्त अपनी माता से निवेदन करता है कि हे माँ! यदि आप मेरी मुराद (मनोकामना) पूरी कर देंगी, तो मैं आपके दरबार में आकर हलवे का प्रसाद बाँटूंगी और हर्षोल्लास के साथ आपकी महिमा का गुणगान करूँगी।

भजन के दूसरे चरण में भक्त कहता है कि वह अपने घर पर संतों और महात्माओं को आमंत्रित कर भव्य जगराता (माता का जागरण) करवाएगी। उसे पूर्ण विश्वास है कि जो माता संसार के समस्त प्राणियों की पुकार सुनती है, वह उसकी भी फरियाद अवश्य सुनेगी। माता भक्तों की सूखी झोली भरती है और उनके जीवन के तमाम संकटों को हर लेती है।

आगे चलकर भक्त माता को 'शेरावाली', 'रानी वाली' और 'ज्योता वाली' कहकर संबोधित करती है। वह कहती है कि हे माँ! मैं तेरे दरबार में एक सवाली बनकर खड़ी हूँ। त्रिकुटा पर्वत पर स्थित तेरा भवन सबसे ऊँचा है और तेरी पवित्र गुफा का स्वरूप अत्यंत अलौकिक व नयारा है। जीवन के इस कठिन अंधकार और संकट के समय केवल और केवल तेरा ही सहारा है, जिस पर मुझे अटूट भरोसा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • 🕓 अगाध विश्वास और निष्ठा: यह भजन सिखाता है कि संकट के समय मनुष्य को निराश होने के बजाय माता के चरणों में अपनी अर्जी लगानी चाहिए।
  • 🎆 प्रसाद और मन्नत की परंपरा: सनातन धर्म में देवी-देवताओं को भोग लगाने और मन्नत पूरी होने पर हलवा-पूरी बांटने की प्राचीन लोक परंपरा रही है।
  • 🎵 संगीतमय संकीर्तन: इस भजन की लय इतनी मधुर है कि इसे महिलाएं किर्तन, माता की चौकी और विशेषकर नवरात्रि के दिनों में बहुत प्रेम से गाती हैं।
  • 🙏 मानसिक शांति और सकारात्मकता: माता के इन भजनों के श्रवण मात्र से मन के भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता रानी के इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पावन पर्वों पर संध्या के समय माता की ज्योति प्रज्वलित करते समय।
  • माता की चौकी या जागरण: पारिवारिक आयोजनों, मुंडन या किसी विशेष मन्नत के पूर्ण होने पर होने वाले जागरण में।
  • मंगलवार और शुक्रवार: देवी माँ को समर्पित इन वारों पर घर के पूजा स्थल पर धूप-दीप दिखाकर।

गायन से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, माता के चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और लाल फूल अर्पित करें। सच्चे मन से किया गया यह संकीर्तन माता को अतिशीघ्र प्रसन्न करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
मुरादे मनोकामनाएं / इच्छाएं भक्त द्वारा माँ से अपनी आर्त पुकार रखना
ज्योत जगा के अखंड दीपक प्रज्वलित करके प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक
संतो महंतो ज्ञानीजन, साधु और महात्मा धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग में आदरणीय अतिथि
फरियाद गुहार / प्रार्थना माता के दरबार में अपनी पीड़ा रखना
सवाली याचक / वर मांगने वाला माता के आगे हाथ फैलाने वाला दीन भक्त
दाति दाता / देने वाली (दात्री) सबको सब कुछ प्रदान करने वाली माँ

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँ मुरादे पूरी करदे हलवा बाटूंगी (Maa Murade Pooree Karade Halava Batungi)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली माता / जगत जननी
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-लोक भाषा मिश्रित
मुख्य भाव समर्पण, मन्नत, विनय और अगाध विश्वास
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, मंगलवार/शुक्रवार पूजा
मुख्य संदेश माता अपने सच्चे भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन जगत जननी माँ आदिशक्ति, शेरावाली माता, दुर्गा माता को समर्पित है।

इस भजन को नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण के समय, या किसी मन्नत के पूरे होने पर विशेष रूप से गाया जाता है।

सनातन परंपरा में देवी माँ को हलवा-पूड़ी का भोग अत्यंत प्रिय है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर माता को भोग लगाकर उसे प्रसाद रूप में वितरित करने का संकल्प लेते हैं।

हाँ, आप इसे घर पर पूजा के समय अकेले या अपने परिवार के साथ पूरी श्रद्धा और भाव के साथ गा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख और भजन लिरिक्स पाठकों की आध्यात्मिक संतुष्टि और भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति, लोक भजनों और देवी आराधना की परंपरा को संजोना है।


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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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