भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

भोले दी बरात चली, गज वाज के सारीया ने भंग पीती राज राज के (bhole dee baaraat chalee, gaj vaaj ke saariya ne bhang peetee raaj raaj ke)

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"भोले दी बरात चली, गज वाज के" एक अत्यंत लोकप्रिय और भक्तिपूर्ण शिव भजन है, जो भगवान शिव के विवाह उत्सव के आनंद और उल्लास को दर्शाता है। यह भजन विशेष रूप से शिवरात्रि और सावन के पावन महीनों में भक्तों के बीच अत्यंत प्रिय है। इसमें भगवान शिव की बारात का वर्णन करते हुए उनके गणों, देवताओं और स्वयं महादेव के अलौकिक स्वरूप का चित्रण किया गया है। यह भजन न केवल शिव भक्ति का संचार करता है, बल्कि यह भी बताता है कि शिव के दरबार में ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं है; यहाँ ब्रह्मा, विष्णु से लेकर सामान्य भक्त तक सभी शिव के रंग में रंगे हुए हैं। इस भजन का गायन मन में शिव के प्रति प्रेम, समर्पण और आनंद की अनुभूति कराता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भोले दी बरात चली, गज वाज के
सारीया ने भंग पीती राज राज के
भोले दी बरात चली, भोले दी बरात चली
गज वाज के, सारीया ने भंग पीती राज राज के

हो सारीया ने, सारीया ने
सारीया ने, सारीया ने
सारीया ने भगत प्यारिया ने
ब्रह्मा विष्णु ख़ुशी मांदे, देवी देव जय कारे लौंदे
बन के बाराती आये सज धज के
सारीया ने भंग पीती राज राज के...
भोले दी बरात चली गज वाज के...

भोले वखरा रूप बनया, गौर मैया नाल बयाह रचाया
देखनु ने आये सारी भज भज के
सारीया ने भंग पीती राज राज के...
भोले दी बरात चली गज वाज के...

राजू वीर हरिपुरिये गाणी, महिमा शिव दी कही ना शिवानी
साज भी ना थके बज बज के
सारीया ने भंग पीती राज राज के...
भोले दी बरात चली गज वाज के...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ भगवान शिव के विवाह के उस अलौकिक दृश्य को चित्रित करना है जहाँ सृष्टि के समस्त देवता और गण सम्मिलित हुए हैं। 'गज वाज के' का अर्थ है पूरे ठाठ-बाट और बाजे-गाजे के साथ। शिव की बारात में कोई औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक आत्मीय आनंद है। 'भंग पीती राज राज के' यहाँ शिव के गणों और भक्तों की उस मस्ती का प्रतीक है, जो सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर शिव के प्रेम में डूब गए हैं। ब्रह्मा और विष्णु जैसे देव भी शिव की बारात में बाराती बनकर आए हैं, जो यह दर्शाता है कि शिव ही समस्त सृष्टि के आधार हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में अहंकार का त्याग करके प्रभु के आनंद में सम्मिलित होना ही जीवन की सार्थकता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शिव-शक्ति मिलन: यह भजन शिव और माता पार्वती के विवाह के पावन प्रसंग को समर्पित है।
  • भक्ति का उल्लास: भजन में वर्णित 'भंग' का सेवन शिव गणों की उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ वे सांसारिक बंधनों से परे शिवमय हो जाते हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह भजन उत्तर भारत के शिव मंदिरों और कांवड़ यात्राओं के दौरान अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को महाशिवरात्रि, सावन के सोमवार, प्रदोष व्रत या किसी भी शिव सत्संग के दौरान गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में शिव के प्रति पूर्ण समर्पण और आनंद का भाव होना चाहिए। ढोलक और मंजीरे के साथ इसका गायन वातावरण को शिवमय बना देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity

इस भजन के केंद्र में भगवान शिव (महादेव) हैं, जिन्हें 'भोलेनाथ' के नाम से जाना जाता है। वे कल्याणकारी हैं और अपने भक्तों की छोटी-छोटी प्रार्थनाओं से भी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव के साथ माता पार्वती का विवाह सृष्टि के संतुलन का प्रतीक है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
गज वाज के पूरे ठाठ-बाट और बाजे-गाजे के साथ शिव बारात का वैभव
राज राज के जी भर के / खूब मजे से भक्ति का आनंद
भंग शिव का प्रसाद शिव भक्ति में लीन होना
खुशी मांदे आनंदित होना देवताओं का उल्लास

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम भोले दी बरात चली
देवता भगवान शिव
भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी
विषय शिव विवाह / बारात
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका मुख्य संदेश शिव के प्रति प्रेम और उनके विवाह उत्सव में सम्मिलित होकर आनंद प्राप्त करना है।

इसे महाशिवरात्रि, सावन के महीने या शिव पूजा के दौरान गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के विद्वानों द्वारा शिव भक्ति परंपरा और लोक भजनों के आधार पर तैयार की गई है। यह भजन शिव विवाह की लोक कथाओं से प्रेरित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 05 Oct 2026

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