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खाटू की गलियों में कोठी मेरी (Khatu Ki Galiyon Mein Kothi Meri Lyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan Vandy Kaur - BhaktiLok

89 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"खाटू की गलियों में कोठी मेरी" भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति एक भक्त के अनन्य प्रेम, समर्पण और उनकी शरण में रहने की तीव्र लालसा को व्यक्त करता है। यह भजन न केवल एक मधुर धुन है, बल्कि यह उस आध्यात्मिक अवस्था का प्रतीक है जहाँ भक्त संसार के समस्त बंधनों को त्यागकर अपने आराध्य के चरणों में अपना स्थायी निवास ढूंढ लेता है। खाटू श्याम जी, जिन्हें कलियुग का 'हारे का सहारा' कहा जाता है, के प्रति यह भावपूर्ण प्रस्तुति वंद्य कौर के स्वर में भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करती है। इस भजन का मूल भाव 'शरणागति' है, जो सनातन धर्म में मोक्ष का प्रथम सोपान माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

खाटू की गलियों में कोठी मेरी,
श्याम के चरणों में ड्योढ़ी मेरी।
मैं तो रहूँ बाबा के पास,
यही है मन की आस।
खाटू की गलियों में कोठी मेरी...

जब से मैंने श्याम को पाया,
संसार का मोह मैंने बिसराया।
अब तो बस श्याम का नाम ही भाए,
श्याम की भक्ति में मन मुस्काए।
खाटू की गलियों में कोठी मेरी...

न कोई चिंता, न कोई डर है,
श्याम का साया मेरे सिर पर है।
हारे का सहारा मेरा श्याम है,
सच्चा साथी मेरा घनश्याम है।
खाटू की गलियों में कोठी मेरी...

दर-दर भटकना अब छूट गया,
माया का बंधन सारा टूट गया।
श्याम की सेवा में जीवन बिताऊं,
खाटू की गलियों में ही बस जाऊं।
खाटू की गलियों में कोठी मेरी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। 'खाटू की गलियों में कोठी मेरी' का अर्थ भौतिक संपत्ति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक निवास से है। भक्त कहता है कि मेरी आत्मा का वास्तविक घर खाटू श्याम जी के चरणों में है। यहाँ 'कोठी' का अर्थ उस सुरक्षित स्थान से है जहाँ भक्त को प्रभु का सानिध्य प्राप्त होता है। जब भक्त कहता है कि 'संसार का मोह मैंने बिसराया', तो वह वैराग्य की उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ उसे सांसारिक सुखों से अधिक आनंद प्रभु के नाम संकीर्तन में मिलता है। यह भजन सिखाता है कि यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लगा रहे, तो उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता, क्योंकि 'हारे का सहारा' स्वयं प्रभु हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का केंद्र: यह भजन खाटू श्याम जी की महिमा और उनके प्रति अटूट विश्वास को समर्पित है।
  • मानसिक शांति: इस भजन का श्रवण करने से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन साधक को पूर्ण रूप से प्रभु के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • कलियुग में प्रभाव: कलियुग में नाम संकीर्तन को ही मुक्ति का मार्ग बताया गया है, जो इस भजन के माध्यम से सहजता से सिद्ध होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप अपनी दैनिक पूजा के समय, एकादशी के दिन, या किसी भी सत्संग के दौरान गा सकते हैं। खाटू श्याम बाबा की आरती के बाद इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में बाबा की छवि का ध्यान करना चाहिए और पूर्ण भाव के साथ संकीर्तन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। खाटू श्याम जी को महाभारत काल के वीर योद्धा बर्बरीक का अवतार माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और सुबोध हिंदी भाषा में रचित है। इसमें ब्रज और खड़ी बोली का सुंदर मिश्रण है, जो इसे जन-जन के हृदय के करीब लाता है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है, जो इसे कीर्तन के लिए उपयुक्त बनाती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
कोठी निवास स्थान प्रभु के चरणों में आश्रय
ड्योढ़ी द्वार/देहरी प्रभु के द्वार पर उपस्थिति
बिसराया भुला दिया सांसारिक मोह का त्याग
हारे का सहारा निराश्रितों का रक्षक श्याम बाबा का विशेष नाम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

खाटू श्याम जी कौन हैं?

खाटू श्याम जी महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का कलियुगी अवतार हैं, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने पूजनीय होने का वरदान दिया था।

यह भजन कब गाना चाहिए?

इसे आप दैनिक पूजा, एकादशी व्रत, या खाटू श्याम जी के कीर्तन के समय कभी भी गा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री खाटू श्याम जी की भक्ति परंपरा और उपलब्ध भजनों के आधार पर तैयार की गई है। यह भजन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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