Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

गुण गाऊं तेरे जगजननी (Gun Gaaun Tere Jagjanani Lyrics in Hindi) - Devi Geet Dr. Satish Chandra

इस भजन में देवी जगजननी की महिमा का गुणगान किया गया है, जो भक्तों को शांति और समृद्धि का अनुभव कराता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

देवी गीत: जगजननी की महिमा

ईश्वर की माँ जगजननी का गुणगान करें, आशीर्वाद प्राप्त करें और हृदय को शांति दें।

गुण गाऊं तेरे जगजननी जगजननी जगजननी, गुण गाऊं तेरे जगजननी। जगत की माँ, जग की रानी, गुण गाऊं तेरे जगजननी। तेरे बिना, जग अधूरा, गुण गाऊं तेरे जगजननी। शांति की, बीज बोई तूने, गुण गाऊं तेरे जगजननी। सुख, सम्पत्ति, प्रेम का सागर, गुण गाऊं तेरे जगजननी। तेरी कृपा से, सब कुछ संभव, गुण गाऊं तेरे जगजननी। तेरी छाया में है सुख, गुण गाऊं तेरे जगजननी।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'गुण गाऊं तेरे जगजननी' में माँ जगजननी का गुणगान किया गया है। जगजननी, या देवी, को संसार की माता माना जाता है। उनकी कृपा से ही सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण और संरक्षण होता है। भजन के आरंभ में ही यह उद्घोष किया गया है कि इस जगत की संपूर्णता उनके बिना अधूरी है। इस संदर्भ में, 'तेरे बिना, जग अधूरा' की पंक्ति हमें यह याद दिलाती है कि माँ का ध्यान और आशीर्वाद ही प्रत्येक जीव की जीवन यात्रा का आधार है। जग की माँ होने के नाते, देवी का गुणगान करते हुए हम अपने मन को उनकी ओर लगाने का प्रयास करते हैं, जिससे शांति और संतोष प्राप्त होता है।

भजन के भावार्थ में गहराई से जाने पर ज्ञात होता है कि देवी की सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमता का विशेष संदर्भ है। 'शांति की, बीज बोई तूने' की पंक्ति में यह बताया गया है कि माँ जगजननी ने शांति का संचार किया है। यहाँ शांति के प्रतीक के रूप में, हम देख सकते हैं कि जब माँ का आशीर्वाद हम पर होता है, तो जीवन में संतुलन और मौनता आती है। 'सुख, सम्पत्ति, प्रेम का सागर' का अर्थ है कि देवी की कृपा से सभी भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूरी होती हैं। यह भक्ति का एक स्त्रोत है, यहाँ हर भक्त को माँ की स्नेहिल छाया में सुकून और सुरक्षा मिलती है।

इस भजन के theological पहलू में हम भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को देख सकते हैं। भक्ति मार्ग में, आत्मा का संकल्प हमेशा ईश्वर और देवी की ओर होना चाहिए। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब हम देवी की शरण में जाते हैं, तो हमारा आत्मिक विकास संभावित हो जाता है। 'तेरी कृपा से, सब कुछ संभव' का अर्थ है कि भक्ति द्वारा, भक्त अपने जीवन के कठिन समय में देवी की इच्छा के अनुसार मार्गदर्शन प्राप्त करता है। यहाँ विश्वास और surrender का भाव भी छिपा है, जिसे स्वीकार कर भक्त अपने जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का प्राचीन भारतीय साहित्य में गहरा महत्व है, जैसा कि देवी महात्म्य और अन्य पुराणों में वर्णित है। देवी दुर्गा, जिन्हें जगदंबा के रूप में पूजा जाता है, का यह गुणगान हमें याद दिलाता है कि देवी की शक्ति जीवन के सभी सुखों और दुखों को दूर करने में सक्षम है। देवी की महिमा का वर्णन पौराणिक कथा में भी देखने को मिलता है, जहाँ वे दुष्टों का नाश करके सत्य और धर्म की स्थापना करती हैं। हमें यह भजन सुनकर देवी की शक्ति और करुणा का अनुभव होता है, और यह हमारे भक्ति अनुभव को समृद्ध करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और भक्ति का अनुभव होता है। भक्तों के लिए यह प्रार्थना तनाव और चिंता को दूर करने में अत्यंत सहायक है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे जीवन में समृद्धि और प्रेम का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को करना सर्वाधिक फलदायी होता है। पूजा करते समय एक दीप जलाना, फूल चढ़ाना और ध्यान मुद्रा में बैठना चाहिए। भजन का गायन करते समय मन को शुद्ध करके, माता का ध्यान गहनता से करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन 'गुण गाऊं तेरे जगजननी' का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माँ जगजननी की महिमा और उनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति है। यह दर्शाता है कि देवी की कृपा से ही मानव जीवन संभव है।

क्या इस भजन के पाठ का कोई विशेष समय है?

हाँ, यह भजन जपने के लिए सुबह का समय या संध्या का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, जिससे भक्ति में वृद्धि होती है।

इस भजन का गान करने से किस प्रकार के मानसिक लाभ होते हैं?

इस भजन का गान मानसिक तनाव को कम करता है, मन को शांति देता है और भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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