Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी मस्ती में झूमे जग सारा(Teri Masti Mein Jhoome Jag Sara Lyrics in Hindi By - Hemant Brijwasi Krishna Bhajan )

हेमंत बृजवासी द्वारा गाए प्रसिद्ध कृष्ण भजन 'तेरी मस्ती में झूमे जग सारा' के संपूर्ण बोल, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक भावार्थ पढ़ें केवल Bhaktilok पर।

भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन "तेरी मस्ती में झूमे जग सारा" (Teri Masti Mein Jhoome Jag Sara Lyrics in Hindi), जिसे अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से प्रख्यात गायक हेमंत बृजवासी (Hemant Brijwasi) ने गाया है, सनातन प्रेमियों और बांके बिहारी के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। भगवान श्री कृष्ण और राधारानी की अहैतुकी कृपा, उनकी अलौकिक मस्ती और प्रेम रस में सराबोर होकर संपूर्ण जगत के झूम उठने का यह भजन साधक के अंतर्मन को सीधे स्पर्श करता है। कृष्ण भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उत्सव है, एक ऐसी अनूठी मस्ती है जिसमें जीव अपने सारे अहंकार और सांसारिक बंधनों को त्यागकर उस परम शक्ति के साथ एकरूप हो जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन शैली, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (Mukhda):

तेरी मस्ती में झूमे जग सारा,
ओ बांके बिहारी मेरे गोपाला!
तेरी प्रीत का रंग चढ़ा ऐसा,
ना दूजा कोई रंग इस जैसा।

अंतरा 1 (First Antara):

वृंदावन की गलियों में गूंजे बंसुरी की तान,
तुझ पर वारी जाए मेरी यह प्राणों सी जान।
जो एक बार तेरी शरण में आ जाए,
वह भवसागर से सहज ही तर जाए।

अंतरा 2 (Second Antara):

मक्खन चोर कहाए तू, राधारानी का मीत,
तीनों लोक में गाई जाए तेरी यह प्रीत।
कदम की छांव में जब तू रास रचाए,
सुध-बुध खोकर जग सारा सुधि बिसराए।

अंतिम चरण (Refrain / Closing):

हे मुरली वाले! हे नन्दलाल!
कर दो कृपा हे दीनदयाल!
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा,
ओ बांके बिहारी मेरे गोपाला!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह कृष्ण भक्त के हृदय की वह पुकार है जो भगवान के प्रेम में पूरी तरह से मग्न हो चुका है। भजन की पहली पंक्ति "तेरी मस्ती में झूमे जग सारा, ओ बांके बिहारी मेरे गोपाला" यह दर्शाती है कि भगवान श्री कृष्ण का सा सान्निध्य और उनका प्रेम ही इस सृष्टि का असली आनंद है। जब मनुष्य प्रभु की भक्ति रूपी मस्ती में डूब जाता है, तो उसे संसार के दुख और संताप स्पर्श भी नहीं कर पाते।

आगे की पंक्तियों में हेमंत बृजवासी अपनी स्वर लहरियों के माध्यम से वृंदावन के कुंज-गलियों और यमुना के तट का सजीव चित्रण करते हैं। "वृंदावन की गलियों में गूंजे बंसुरी की तान" - भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी की वह मोहिनी धुन केवल गोपियों को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण प्रकृति—पशु-पक्षी, नदियां, और लताओं को भी मुग्ध कर देती है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब परमात्मा की पुकार आत्मा तक पहुंचती है, तो साधक सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर केवल उसी में लीन हो जाता है। "मक्खन चोर कहाए तू, राधारानी का मीत" पंक्ति भगवान के बालसुलभ स्वरूप और राधारानी के साथ उनके शाश्वत प्रेम को समर्पित है, जो प्रेम और समर्पण की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन परंपरा में संकीर्तन और प्रभु नाम का गान कलयुग का सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन माना गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश के अनुसार, जो भक्त निरंतर भगवान का स्मरण करते हैं, उन्हें प्रभु कभी नहीं भूलते। इस भजन का मुख्य महत्व यह है कि यह साधक को मानसिक तनाव, चिंता और निराशा से निकालकर दिव्यता और आनंद की अनुभूति कराता है। हेमंत बृजवासी की मधुर आवाज इस भजन में एक अलग ही ऊर्जा और भक्ति का संचार करती है, जिसे सुनकर किसी भी सामान्य व्यक्ति के मन में भी भगवत प्रेम जागृत हो जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को सुनने या गाने के लिए किसी विशेष नियम या अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती, किंतु यदि इसे विधिपूर्वक गाया जाए तो इसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है:

  • समय: प्रातःकाल ब्रह्म मूहूर्त में अथवा संध्याकाल में भगवान की आरती के समय इसका श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • स्थान: अपने घर के मंदिर में, पूजा कक्ष में अथवा किसी शांत स्थान पर बैठकर इसे सुन सकते हैं।
  • अवसर: जन्माष्टमी, राधारानी जन्मोत्सव (राधाष्टमी), एकादशी व्रत, सत्संग, कीर्तन अथवा किसी भी मांगलिक उत्सव के दौरान इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण और स्वरूपा शक्ति श्री राधारानी हैं। ब्रजमंडल के आराध्य बांके बिहारी और गोकुल के नन्दलाल के रूप में उनका स्मरण किया गया है। साथ ही, युवा एवं लोकप्रिय पार्श्व गायक हेमंत बृजवासी ने अपनी अद्भुत गायकी से इस पारंपरिक भाव को आधुनिक संगीत प्रेमियों के बीच पुनर्जीवित किया है। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की मिठास और सूफी एवं भक्ति रस का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

ब्रज संस्कृति और कृष्ण भक्ति की परंपरा सदियों पुरानी है सूरदास, मीराबाई और रसखान जैसे संतों ने जिस कृष्ण प्रेम की नींव रखी थी, उसी परंपरा को आधुनिक भजन रचनाकारों और गायकों ने आगे बढ़ाया है। "तेरी मस्ती में झूमे जग सारा" भजन इसी लंबी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की एक सुंदर कड़ी है। इसमें ब्रजभाषा के लोक शब्दों और हिंदी की सरलता का ऐसा मिश्रण है कि यह हर उम्र के श्रोता के दिल को छू लेता है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और प्रवाहमयी हिंदी है जिसमें ब्रज संस्कृति के शब्दों का सुंदर प्रयोग किया गया है। काव्य शैली के दृष्टिकोण से इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों की छटा देखने को मिलती है। शब्दों का चयन ऐसा है कि गाते समय स्वतः ही लय और ताल बन जाती है। भावुकता और भक्ति रस (शृंगार एवं शांत रस का समन्वय) इस रचना की मुख्य विशेषता है जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की भागदौड़ और संघर्षों के बीच भी यदि मन भगवान के चरणों में लगा रहे, तो सारे कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं। सच्ची मस्ती बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि भीतर से परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम में है। जिस प्रकार गोपियों ने अपना सब कुछ छोड़कर कृष्ण को ही अपना सर्वस्व माना, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने अहंकार का त्याग कर शरणागति का मार्ग अपनाना चाहिए। इसके लिए आप श्री कृष्ण अमृतवाणी का नियमित पाठ भी कर सकते हैं।

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बांके बिहारी टेढ़े-मेढ़े रूपों में सुंदर दिखने वाले भगवान श्री कृष्ण भक्तों के संकट हरने वाले परम आराध्य
मस्ती दिव्य आनंद और प्रेम का नशा सांसारिक मोह से मुक्त होकर परमात्मा में मग्न होना
भवसागर जन्म-मृत्यु का संसार चक्र जिसे केवल भगवान की कृपा से ही पार किया जा सकता है
सुधि बिसराए अपनी सुध-बुध खो देना ईश्वर प्रेम में लीन होकर बाहरी दुनिया को भूल जाना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरी मस्ती में झूमे जग सारा, ओ बांके बिहारी मेरे गोपाला!"
अर्थात हे बांके बिहारी! हे मेरे गोपाला! आपकी भक्ति और प्रेम का नशा ऐसा है कि पूरा संसार इसमें झूमने लगता है। यहाँ 'जग सारा' का तात्पर्य केवल मनुष्यों से नहीं, बल्कि संपूर्ण चराचर जगत से है जो प्रभु की ऊर्जा से संचालित है।

"वृंदावन की गलियों में गूंजे बंसुरी की तान, तुझ पर वारी जाए मेरी यह प्राणों सी जान।"
अर्थात ब्रज की पवित्र भूमि और वृंदावन की कुंज-गलियों में गूंजने वाली आपकी मुरली की धुन पर मेरा यह जीवन और प्राण भी न्यौछावर है। यह अनन्य प्रेम का प्रतीक है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत लाभकारी होता है:

"कृष्ाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणाता क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥"

इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण के पावन नाम हरे कृष्ण महामंत्र का निरंतर जाप करने से मन को असीम शांति और भक्ति की प्राप्ति होती है।

भजन की जानकारी (Quick Info) विवरण
भजन का नाम तेरी मस्ती में झूमे जग सारा (Teri Masti Mein Jhoome Jag Sara)
गायक (Singer) हेमंत बृजवासी (Hemant Brijwasi)
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण एवं राधारानी
भाषा हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित
मुख्य भाव भक्ति, प्रेम, आनंद एवं शरणागति
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, दैनिक पूजा एवं संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन को प्रसिद्ध पार्श्व एवं भजन गायक हेमंत बृजवासी (Hemant Brijwasi) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति ही मनुष्य के सभी दुखों का अंत कर सकती है तथा जीवन को आनंद और मस्ती से भर देती है।

इसे आप अपनी दैनिक पूजा के समय, सुबह या शाम के विश्राम के क्षणों में, अथवा जन्माष्टमी और राधाष्टमी जैसे पावन पर्वों पर सुन सकते हैं।

हाँ, इसकी धुन और शब्द इतने सरल और ऊर्जावान हैं कि इसे घर के छोटे-मोटे सत्संग या कीर्तन में आसानी से समूह के साथ गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिकुल (BhaktiLok) पर प्रकाशित यह आलेख सनातन संस्कृति, कृष्ण भक्ति परंपरा और संगीत प्रेमियों की रुचि को ध्यान में रखते हुए पूरी निष्ठा और शुद्धता के साथ तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक लिरिक्स और गहरा आध्यात्मिक भावार्थ प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों और परंपराओं का यथोचित ध्यान रखा गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (ब्रज लीला प्रसंग)
  • पारंपरिक श्री कृष्ण संकीर्तन एवं भजन संग्रह
  • हेमंत बृजवासी द्वारा प्रस्तुत लोक एवं भक्ति संगीत परंपरा
  • सनातन धर्म के भक्ति ग्रंथ और संत साहित्य

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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