Sai Baba मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शिरडी की समाधि में

भक्ति भजन "शिरडी की समाधि में" के हिन्दी लिरिक्स, भावार्थ, माहात्म्य और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)। सनातन भक्ति परंपरा के अनुसार संकीर्तन के लाभ और विधि पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

शिरडी की समाधि में ( Shirdi Ki Samadhi Mein Lyrics in Hindi )🙏| C. Laxmichand Sai Baba Bhajan

Song Credits:
Song Name: Shirdi Ki Samadhi Mein Lyrics in hindi
Album: Shri Sai Jyot
Singer: C. Laxmichand
Music Director: C. Laxmichand
Lyrics: Shivshankar Vasistha
Graphics: Sadique
Music Label: Tips Industries Ltd

🙏शिरडी की समाधि में ( Shirdi Ki Samadhi Mein Lyrics in Hindi ) - 

जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge 
जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge
जब भी मुझको याद करोगे मैं आऊंगा
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge Main Aaunga
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसें हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Basein Hain 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge
जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge
जब भी मुझको याद करोगे  मैं आऊंगा
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge Main Aaunga 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain 
ध्यान लगाओ  
Dhyan Lagao  
हा ध्यान लगाओ
Ha Dhyan Lagao 
मुझे सामने ही पाओगे
Mujhe Samne Hi Paoge
नहीं नज़र से कहीं दूर तुम जा पाओगे
Nahin Nazar Se Kahin Door Tum Jaa Paoge 
अलख जगाओ ज्योत जलाओ
Alakh Jagao Jyot Jalao 
अलख जगाओ ज्योत जलाओ
Alakh Jagao Jyot Jalao 
अलख जगाओ ज्योत जलाओ मैं दिखूंगा
Alakh Jagao Jyot Jalao Main Dikhunga 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain 
मैं भक्तों से
Main Bhakton Se 
हा मैं भक्तों से नहीं बिछड़कर रह सकता हूँ
Ha Main Bhakton Se Nahi Bichhadkar Reh Sakta Hoon
भक्तों का दुःख दर्द ज़रा भी सह सकता हूँ
Bhakton Ka Dukh Dard Zara Bhi Seh Sakta Hoon
भीतर के पट खोल रे बंदे 
Bhitar Ke Pat Khol Re Bande 
भीतर के पट खोल रे बंदे 
Bhitar Ke Pat Khol Re Bande 
भीतर के पट खोल तार से तार मिलाओ
Bhitar Ke Pat Khol Tar Se Tar Milao 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain 
शिरडी से जो 
Shirdi Se Jo 
ओ शिरडी से जो सच्चे दिल से प्यार करेगा
O Shirdi Se Jo Sachche Dil Se Pyar Karega 
भवसागर की लहरों में वो नहीं बहेगा  
Bhavsagar Ki Lehron Mein Wo Nahi Bahega
यहाँ वहाँ  हर थल में मेरी
Yahan Wahan Har Thal Mein Meri 
यहाँ वहाँ  हर थल में मेरी
Yahan Wahan Har Thal Mein Meri 
यहाँ वहाँ  हर थल में मेरी 
Yahan Wahan Har Thal Mein Meri 
खुशबू फैली
Kushbu Faili 
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
मुझ पर अपना 
Mujh Par Apna 
ओ मुझ पर अपना जिसने सब कुछ किया समर्पित
O Mujh Par Apna Jisne Sab Kuch Kiya Samarpit 
मैं भी उस पर कर देता हूँ सब कुछ अर्पित
Main Bhi Us Par Kar Deta Hoon Sab Kuch Arpit 
मुझ में और भक्त में कोई
Mujh Mein Aur Bhakt Mein Koi 
मुझ में और भक्त में कोई
Mujh Mein Aur Bhakt Mein Koi 
मुझ में और भक्त में कोई
Mujh Mein Aur Bhakt Mein Koi 
भेद नहीं है 
Bhed Nahin Hai 
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge
जब भी मुझको याद करोगे
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge
जब भी मुझको याद करोगे मैं आऊंगा
Jab Bhi Mujhko Yaad Karoge Main Aaunga
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain
शिरडी की समाधी में  मेरे प्राण बसे हैं
Shirdi Ki Samadhi Mein Mere Pran Base Hain


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "शिरडी की समाधि में" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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