Maha Shivaratri मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

भोले तेरी माया अजब निराली है ( Bhole Teri Maya Ajab Nirali Hai Lyrics in Hindi) - Bhagwan Shiv Bhajan By Praveen Pareek

भोले तेरी माया अजब निराली है भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। प्रवीण पारेख द्वारा गाए इस सुंदर शिव भजन का भावार्थ और महिमा जानें। Bhaktilok पर देखें।

भोले तेरी माया अजब निराली है (Bhole Teri Maya Ajab Nirali Hai Lyrics in Hindi) - Bhagwan Shiv Bhajan By Praveen Pareek

अपडेटेड: फरवरी 2026 श्रेणी: Lord Shiva Bhajan & Devotional Lyrics गायक: प्रवीण पारेख (Praveen Pareek) भाषा: हिंदी (Devanagari)

देवादिदेव महादेव और आशुतोष भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "भोले तेरी माया अजब निराली है (Bhole Teri Maya Ajab Nirali Hai Lyrics in Hindi)" साधकों के हृदय में शिव भक्ति, वैराग्य और अगाध श्रद्धा का संचार करता है। सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रवीण पारेख की मधुर वाणी में गाया गया यह शिव भजन संसार की नश्वरता और भगवान शिव की असीम, अलौकिक व रहस्यमयी कृपा का सुंदर चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही 'कल्याण' है और उनकी माया संपूर्ण ब्रह्मांड को संचालित करने वाली वह परम शक्ति है जिसे त्रिगुणात्मिका माया या प्रकृति कहा जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त देवाधिदेव के चरणों में अपनी संपूर्ण शरणागति अर्पित करते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि इस संसार में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब उन्हीं भोलेनाथ की इच्छा से ही हो रहा है। महाशिवरात्रि, सावन मास और सोमवार के पावन व्रतों के अवसर पर इस भजन का गान और श्रवण अत्यंत फलदायी माना जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मुखड़ा ||

भोले तेरी माया अजब निराली है,
दुनिया ये सारी तेरी भक्तों की पाली है।
जो तेरी शरण में आए, उसका बेड़ा पार हुआ,
हे शिव शंभू, तुझ पर सब कुछ बलिहारी है॥

|| अंतरा 1 ||

कोयला भी हीरा बन जाए, जो तेरी नजर पड़े,
बड़े-बड़े राजा तेरे दर पे हाथ जोड़े खड़े।
तू चाहे तो पल में राजा को रंक बनाए,
रंक को भी राजा तू ही तो बनाए है॥
भोले तेरी माया अजब निराली है...

|| अंतरा 2 ||

गले में तुम्हारे सापों की माला विराजे,
हाथों में डमरू और त्रिशूल साजे।
भस्म रमता जटाओं में गंगा बहती धारा,
ऐसा है निराला रूप मेरा भोले तुम्हारा॥
भोले तेरी माया अजब निराली है...

|| अंतरा 3 ||

कैलाश पर्वत पर तेरा सुंदर डेरा है,
अंधेरे जीवन में तूने ज्ञान का उजाला घेरा है।
पूरी कर दो झोली हमारी ओ आशुतोष भगवान,
'पारेख' गाए गुण तेरे, सुन लो मेरी पुकार॥
भोले तेरी माया अजब निराली है,
दुनिया ये सारी तेरी भक्तों की पाली है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

प्रवीन पारेख द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय शिव भजन के प्रत्येक शब्द में अगाध भक्ति और दार्शनिक गहराई छिपी हुई है। भजन के मुखड़े में साधक भोलेनाथ की महिमा का गुणगान करते हुए कहता है कि हे भोले! आपकी माया (संसार की रचना और इसका संचालन) अत्यंत विचित्र और समझ से परे है। यह संपूर्ण संसार आपकी ही ऊर्जा से पोषित और पाला गया है। जो भी मनुष्य सच्चे भाव से आपकी शरण में आ जाता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और वह भवसागर से तर जाता है।

प्रथम अंतरे में शिव की कृपा की महानता को दर्शाया गया है। कवि कहते हैं कि जिस प्रकार कोयला अत्यधिक दबाव और ताप के बाद हीरे में परिवर्तित हो जाता है, ठीक उसी प्रकार जब किसी पर भगवान शिव की करुणा दृष्टि पड़ जाती है, तो उसका साधारण जीवन भी हीरे की भांति चमक उठता है। बड़े-बड़े सम्राट और चक्रवर्ती राजा भी कैलाशपति के दरबार में नतमस्तक रहते हैं। शिव की इच्छा मात्र से बलवान और धनवान व्यक्ति भी सामान्य स्थिति में आ सकता है और एक साधारण दीन-दुखी व्यक्ति भी उनकी कृपा से राजा जैसा सम्मान पा सकता है। यह इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति में सब कुछ शिव के नियंत्रण में है।

द्वितीय अंतरे में भगवान शिव के वैराग्यमय और अलौकिक स्वरूप का वर्णन किया गया है। महादेव किसी राजसी ठाट-बाट के स्वामी नहीं हैं, बल्कि उनका श्रृंगार प्रकृति और ब्रह्मांड के मूल तत्वों से जुड़ा है। उनके गले में नागराज का वास है, हाथ में प्रलय और सृजन का प्रतीक डमरू तथा त्रिशूल शोभायमान है। उनके शरीर पर भस्म लगी है और उनकी जटाओं से मां गंगा प्रवाहित होती हैं। यह रूप साधक को सिखाता है कि भौतिक दिखावे से परे वास्तविक सौंदर्य त्याग और संतोष में है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • ाराध्य देव: देवादिदेव महादेव, आशुतोष, भगवान शिव और कैलाशपति।
  • मुख्य भाव: शिव के प्रति अगाध समर्पण, शरणागति, विश्वास और वैराग्य।
  • गायक: सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रवीण पारेख, जिनकी शैली में ग्रामीण और शास्त्रीय भक्ति का अद्भुत समन्वय मिलता है।
  • आध्यात्मिक संदेश: यह भजन सिखाता है कि अहंकार का त्याग कर शिव की शरण में जाने से मनुष्य को आंतरिक शांति और मुक्ति की प्राप्ति होती है।
  • सांस्कृतिक महत्व: महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और रुद्राभिषेक के दौरान भक्तों द्वारा इस भजन का गायन अत्यंत लोकप्रिय है।

शिव भक्तों के लिए यह रचना एक प्रेरणास्त्रोत है। आप भगवान शिव के अनमोल विचार और पवित्र रामायण चौपाइयों के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत को उसके सही समय और वातावरण में सुनने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भगवान शिव के इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर गाना या सुनना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह उठकर स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाकर इस भजन का स्मरण करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है।
  • सोमवार का व्रत एवं पूजा: सावन मास के सोमवार या वर्ष के प्रत्येक सोमवार को शिव पूजन के समय इस भजन को कीर्तन के रूप में गाया जा सकता है।
  • महाशिवरात्रि पर्व: रात्रि जागरण के दौरान जब चारों प्रहर की पूजा चलती है, तब ऐसे भावपूर्ण भजनों का गायन भक्तों को ध्यानमग्न कर देता है।
  • सत्संग और धार्मिक आयोजन: पारिवारिक अनुष्ठानों, रुद्राभिषेक या शिव कथा के दौरान इस भजन को समूह में गाना सामूहिक चेतना को जागृत करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
माया रहस्य, प्रकृति की शक्ति, भ्रम ईश्वर की वह शक्ति जिसके द्वारा यह संपूर्ण सृष्टि संचालित होती है।
अजब निराली अद्भुत, अनोखी, सबसे अलग शिव की लीलाओं का वह स्वरूप जिसे साधारण बुद्धि से समझना असंभव है।
भस्म रमता राख धारण करने वाला इस नश्वर शरीर की अंतिम सच्चाई और वैराग्य का प्रतीक।
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव का एक नाम जो थोड़े से जल और बेलपत्र मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं।
बेड़ा पार हुआ संकटों से मुक्ति मिलना जन्म-मृत्यु के चक्र तथा सांसारिक दुखों से मुक्ति पाना।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित पावन शिव मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ नमः शिवाय॥

पंचाक्षर मंत्र - शिव साधना का मूल आधार

मृत्युंजयेशा महेश्वराय शरणं प्रपद्ये॥

महामृत्युंजय भाव - शरणागति का श्लोक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम भोले तेरी माया अजब निराली है (Bhole Teri Maya Ajab Nirali Hai)
आराध्य देव भगवान शिव / महादेव / आशुतोष
गायक कलाकार प्रवीण पारेख (Praveen Pareek)
भाषा हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक शैली
मुख्य थीम शिव भक्ति, वैराग्य, ईश्वर की असीम कृपा और शरणागति
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, दैनिक पूजा एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय शिव भजन सुप्रसिद्ध भजन गायक प्रवीण पारेख (Praveen Pareek) द्वारा गाया गया है, जो अपनी भावपूर्ण और मधुर प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं।

इस भजन को सावन मास के सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और प्रतिदिन सुबह की पूजा के समय सुनना अत्यंत शांतिदायक और आध्यात्मिक रूप से लाभदायक होता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि इस संसार में भगवान शिव की माया सर्वशक्तिमान है। उनके दरबार में राजा और रंक समान हैं और सच्चे मन से शरण में जाने वाले हर भक्त का उद्धार निश्चित है।

'आशुतोष' का अर्थ है जो अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाएं। भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भावना, एक लोटा जल और बेलपत्र मात्र से ही प्रसन्न होकर मनोवांछित वरदान दे देते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन परंपरा, शिव महापुराण के दर्शन और लोक भक्ति साहित्य के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध गीत के बोल, प्रामाणिक अर्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण - कोट रुद्र संहिता एवं ईश्वर गीता
  • पारंपरिक शिव संकीर्तन एवं लोक भजन परंपरा
  • श्री प्रवीण पारेख भजन संग्रह एवं ऑडियो अभिलेख

संबंधित भजन एवं लेख

भगवान शिव के अनमोल विचार

महादेव के वैराग्य, कर्म और जीवन दर्शन पर आधारित प्रेरणादायक कोट्स।

श्री रामचरितमानस चौपाइयां

शिव-पार्वती संवाद और श्रीराम कथा से जुड़ी पावन और प्रसिद्ध चौपाइयां।

महाशिवरात्रि व्रत कथा एवं पूजा विधि

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर व्रत रखने और रात्रि जागरण की संपूर्ण विधि।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!