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श्याम सा दानी कोई नहीं ( Shyam Sa Daani Koi Nahi Lyrics in Hindi ) - तीन बाणधारी श्री खाटू श्याम की गाथा | Babita Goswami - BhaktiLok

84 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें



श्याम सा दानी कोई नहीं ( Shyam Sa Daani Koi Nahi Lyrics in Hindi ) -  तीन बाणधारी श्री खाटू श्याम की गाथा | Babita Goswami - BhaktiLok


श्याम सा दानी कोई नहीं ( Shyam Sa Daani Koi Nahi Lyrics in Hindi ) -  तीन बाणधारी श्री खाटू श्याम की गाथा | Babita Goswami - 



श्याम का सुमिरण अपने मन में श्रद्धा से एक बार करो 
श्याम सा दानी कोई नहीं है सोचो थोड़ा विचार करो 
श्याम का सुमिरण ...............

बर्बरीक चलने लगे घर से युद्ध की इच्छा साथ लिए 
तरकश में सजे तीन बाण फिर माता को प्रणाम किये 
बर्बरीक ने माँ का वचन माना चले वचन निभाने को 
हारे का बस साथ है देना बैठे लीले जाने को 
रस्ते में एक ब्राह्मण मिल गए बोले कुछ उपकार करो 
श्याम सा दानी कोई नहीं है सोचो थोड़ा विचार करो 
श्याम का सुमिरण ...............

ब्राह्मण रूप में नारायण थे साड़ी बात वो जानते थे 
गर युद्ध में ये पहुँच गए तो कुछ ना बचेगा मानते थे
महाभारत के युद्ध में कौरव पांडव का संग्राम जो है 
कौरव ही हारेंगे क्यूंकि पांडव संग श्री श्याम जो हैं 
लीलाधर की लीला न्यारी माँगा शीश का दान करो 
श्याम सा दानी कोई नहीं है सोचो थोड़ा विचार करो 
श्याम का सुमिरण ...............

बर्बरीक जी समझ गए कहा कौन हो मुझे बताओ तुम 
शीश दान तो ले लो अपना असली रूप दिखाओ तुम 
फिर नारायण ने दिए दर्शन बर्बरीक ने नमन किया 
युद्ध देखने की है इच्छा ऐसा मुख से वचन कहा
शीश को काटा कृष्ण से बोले दान मेरा स्वीकार करो 
श्याम सा दानी कोई नहीं है सोचो थोड़ा विचार करो 
श्याम का सुमिरण ...............

नारायण ने शीश लिया ऊँचे पर्वत पर टिका दिया 
सारा युद्ध देखोगे उनकी इच्छा का भी मान किया
मेरे नाम से दुनिया पूजेगी ऐसा वरदान दिया
बर्बरीक फिर श्याम हो गए नारायण ने नाम दिया 
मेरे श्याम ने अपना नाम दिया 
कलयुग में नहीं श्याम सा कोई श्याम नाम से प्यार करो 
श्याम सा दानी कोई नहीं है सोचो थोड़ा विचार करो 
श्याम का सुमिरण ...............


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्याम सा दानी कोई नहीं ( Shyam Sa Daani Koi Nahi Lyrics in Hindi ) - तीन बाणधारी श्री खाटू श्याम की गाथा | Babita Goswami - BhaktiLok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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